
#पलामू #रामनवमी : डीजे और ध्वनि को लेकर प्रशासनिक रोक पर एएचपी अध्यक्ष अविनाश राजा के तीखे बोल।
पलामू प्रमंडल क्षेत्र में रामनवमी पर्व को लेकर माहौल गर्म होता जा रहा है। इसी बीच एएचपी पलामू के अध्यक्ष अविनाश राजा ने एक प्रेस ज्ञापन जारी कर डीजे और साउंड सिस्टम पर रोक को लेकर प्रशासन से सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रामनवमी हिंदुओं की आस्था का पर्व है और इसमें डीजे बजेगा, लेकिन मर्यादा के साथ बजना चाहिए।
- एएचपी अध्यक्ष अविनाश राजा ने जारी किया प्रेस बयान।
- कहा – रामनवमी सिर्फ उत्सव नहीं, माह उत्सव है।
- प्रशासन द्वारा डीजे पर रोक लगाने के प्रयास पर उठाए सवाल।
- ध्वनि प्रदूषण को लेकर लाउडस्पीकर और अन्य आयोजनों का भी जिक्र।
- हिंदू समाज से डीजे को लेकर दिखावा बंद करने की अपील।
पलामू। एएचपी पलामू अध्यक्ष अविनाश राजा ने रामनवमी और डीजे को लेकर एक प्रेस ज्ञापन जारी किया है। उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल क्षेत्र की आवाज है कि डीजे बजेगा और बजना ही चाहिए, जो रोके उसे भी बाजा दो, लेकिन हद में बजाए।
उन्होंने कहा कि मेदनीनगर की रामनवमी सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि माह उत्सव है, जिससे लाखों हिंदुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हर वर्ष डीजे जैसे आधुनिक वाद्य यंत्रों पर रोक लगाने के नाम पर शासन और प्रशासन हिंदुओं के बढ़ते मनोबल पर रोक लगाने का काम करता है।
उन्होंने कहा कि यह देश हिंदुओं का है और हिंदुओं को अपने उत्सव मनाने का मौलिक अधिकार है, जिसे कोई भी विभाग छीन नहीं सकता।
प्रशासन से ध्वनि प्रदूषण पर सवाल
अविनाश राजा ने प्रशासन और शासन से सवाल करते हुए कहा कि क्या सिर्फ डीजे से ही ध्वनि प्रदूषण फैलता है। क्या हिंदुओं के पर्व में बजने वाले वाद्य यंत्रों से ही ध्वनि प्रदूषण होता है। क्या वर्ष में एक बार आने वाले पर्व, जिसमें उमंग के साथ साउंड बजते हैं, उसे ही ध्वनि प्रदूषण माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि ध्वनि प्रदूषण की इतनी ही चिंता है तो दिन में पांच बार छह लाख मस्जिदों के मीनारों से लाउडस्पीकर पर आवाज देने को क्या ध्वनि प्रदूषण में गिना जाएगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लग्न और शादी-ब्याह में बजने वाले डीजे से क्या ध्वनि प्रदूषण नहीं होता। ऐसे कई कार्यक्रमों में डीजे का उपयोग होता है, तो क्या प्रशासन उन सभी पर रोक लगा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि ध्वनि और वायु प्रदूषण केवल हिंदुओं के पर्व के समय ही दिखाई देता है। हिंदू समाज ऐसे किसी भी पक्षपात का पुरजोर विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि देश के कानून व्यवस्था सुरक्षा और सहूलियत के लिए बनाए जाते हैं, न कि बाधा बनने के लिए। जो कानून बाधक बन जाए उसे तोड़ देना चाहिए। इसलिए साउंड बजेगा और जोर से बजेगा।
हिंदू समाज से आत्ममंथन की अपील
अविनाश राजा ने अपने बयान में हिंदू समाज से आत्ममंथन करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह भी समझना जरूरी है कि क्या राम उत्सव केवल डीजे बजाने का नाम है।
उन्होंने कहा कि क्या जो जितना बड़ा डीजे बजाएगा वही बड़ा हिंदू कहलाएगा, जो ज्यादा डीजे पर नाचेगा वही बड़ा हिंदू कहलाएगा, या जो सबसे महंगा डीजे लाएगा वही विराट हिंदू कहलाएगा।
उन्होंने हिंदू समाज से आग्रह किया कि इस तरह की सोच को बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि मेदनीनगर में लाल कोठ से लेकर तेलीपति तक ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां डीजे साउंड सिस्टम नहीं पहुंचता क्योंकि लोग केवल बड़े और आकर्षक डीजे के पीछे लगे रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि साउंड बजाना है तो उन क्षेत्रों में भी जाकर बजाया जाए, जहां लोग अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। इससे भाईचारा मजबूत होगा और उत्सव की असली भावना भी सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि केवल बड़ा डीजे बजाने से उत्सव बड़ा नहीं बनता। यदि ध्वज नहीं है, श्रीराम का नाम नहीं है और केवल शोर है, तो उसे राम उत्सव नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से यह देखने को मिल रहा है कि जो जितना अधिक हल्ला मचाता है वही बड़ा राम भक्त कहलाता है, जो सही नहीं है।
उन्होंने अंत में कहा कि हिंदू समाज को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि कहीं हम लोग दिशाहीन तो नहीं हो रहे।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
धार्मिक उत्सव समाज की आस्था से जुड़े होते हैं। ऐसे अवसरों पर उत्साह के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और मर्यादा का पालन भी उतना ही आवश्यक होता है।
मर्यादा और संतुलन से ही बढ़ेगी उत्सव की गरिमा
पर्व-त्योहार समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं।
आस्था, अनुशासन और भाईचारा ही किसी भी उत्सव की असली पहचान है।
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