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एआई आधारित टूल रक्षा से झारखंड में बाल तस्करी और बाल विवाह पर लगेगा प्रभावी अंकुश

#झारखंड #बाल_सुरक्षा : एआई आधारित रक्षा टूल से समय रहते हस्तक्षेप और बच्चों की पहचान संभव।

झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के प्रयासों को एआई आधारित टूल ‘रक्षा’ से नई मजबूती मिल सकती है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन द्वारा विकसित यह तकनीकी प्लेटफॉर्म बाल तस्करी, बाल विवाह और ऑनलाइन यौन शोषण की समय रहते पहचान और रोकथाम में सहायक होगा। देशव्यापी लॉन्च के बाद यह टूल राज्य के बाल संरक्षण तंत्र को और प्रभावी बनाने में उपयोगी साबित हो सकता है।

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  • एआई आधारित टूल ‘रक्षा’ से बाल तस्करी और बाल विवाह की पहचान संभव।
  • जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन द्वारा विकसित देश का पहला समग्र बाल सुरक्षा एआई प्लेटफॉर्म।
  • झारखंड के 24 जिलों में 22 सहयोगी संगठन बाल संरक्षण पर कार्यरत।
  • एनसीआरबी 2023 के अनुसार बच्चों के खिलाफ अपराधों में आई गिरावट।
  • ट्रैफिकिंग, सी-सीम और संगठित अपराध गिरोहों की निगरानी में मदद।

झारखंड जैसे राज्य, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिये पर रहने वाले परिवारों के बच्चे अक्सर तस्करी और बाल विवाह के शिकार बनते रहे हैं, वहां कृत्रिम मेधा आधारित टूल ‘रक्षा’ एक निर्णायक बदलाव ला सकता है। इस तकनीकी पहल से सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सामाजिक संगठनों को बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों की पहचान और रोकथाम में एक शक्तिशाली साधन मिलने की उम्मीद है।

झारखंड में बाल तस्करी की चुनौती

झारखंड के कई जिलों में गरीबी, अशिक्षा और पलायन के कारण बच्चे ट्रैफिकिंग गिरोहों के आसान शिकार बन जाते हैं। कई मामलों में बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम करने के लिए भेज दिया जाता है, जबकि लड़कियों की कम उम्र में जबरन शादी कर दी जाती है। ऐसे अपराध अक्सर संगठित गिरोहों द्वारा अंजाम दिए जाते हैं, जिनकी समय रहते पहचान कर पाना एक बड़ी चुनौती रही है।

क्या है एआई आधारित टूल ‘रक्षा’

‘रक्षा’ दुनिया में अपनी तरह का अनूठा प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने विकसित किया है। यह टूल उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर देशभर के आंकड़ों का विश्लेषण करता है और वास्तविक समय में ट्रैफिकिंग व बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण करता है। इसके माध्यम से संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, अपराध गिरोहों की निगरानी और शोषण के नए रुझानों का पता लगाया जा सकता है।

देशव्यापी लॉन्च और राष्ट्रीय समर्थन

‘रक्षा’ का लॉन्च प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट में किया गया, जो एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम था। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा:

जितिन प्रसाद ने कहा: “प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों की सुरक्षा में निहित है। बच्चों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म की शुरुआत एक क्रांतिकारी कदम है।”

झारखंड में नेटवर्क की मजबूत मौजूदगी

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन देशभर में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। इसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन 451 जिलों में सक्रिय हैं। अकेले झारखंड में ही इसके 22 सहयोगी संगठन राज्य के 24 जिलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं। यह मजबूत नेटवर्क ‘रक्षा’ जैसे टूल के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को और बढ़ाता है।

आंकड़े क्या कहते हैं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2023 रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में बच्चों के खिलाफ अपराधों में बीते वर्षों में कमी आई है।
2021 में 1867, 2022 में 1917 और 2023 में 1626 मामले दर्ज किए गए। यह गिरावट सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते हस्तक्षेप और तकनीक आधारित निगरानी से इस संख्या को और कम किया जा सकता है।

तीन स्तरों पर काम करेगा ‘रक्षा’

‘रक्षा’ का फोकस बाल सुरक्षा तंत्र में पूर्वानुमान, बचाव और सुरक्षा पर आधारित है।
पहला टूल परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर बाल विवाह जैसी प्रथाओं की रोकथाम करता है।
दूसरा टूल संगठित अपराध और ट्रैफिकिंग नेटवर्क की पहचान कर उनके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की निगरानी करता है।
तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को मजबूत करता है और ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े हीट जोन और आईपी पतों का विश्लेषण करता है।

विशेषज्ञों की राय

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा:

भुवन ऋभु ने कहा: “तकनीक के उपयोग से भारत दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित कर सकता है। ‘रक्षा’ बच्चों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।”

उनका मानना है कि यह टूल आंकड़ों को ठोस कार्रवाई में बदलकर न्याय तक पहुंच को आसान बनाएगा।

न्यूज़ देखो: तकनीक से मजबूत होगा बाल सुरक्षा तंत्र

‘रक्षा’ जैसे एआई टूल यह दिखाते हैं कि तकनीक का सही उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान में कैसे किया जा सकता है। झारखंड में जहां पहले से अपराधों में कमी देखी जा रही है, वहां यह पहल सुरक्षा तंत्र को और सशक्त कर सकती है। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इसे तेजी से अपनाकर जमीनी स्तर पर लागू करेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हर बच्चे की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

जब तकनीक और संवेदनशीलता एक साथ आती हैं, तो बदलाव संभव होता है।
बाल तस्करी और शोषण के खिलाफ लड़ाई में ‘रक्षा’ एक मजबूत हथियार बन सकता है।
इस पहल पर अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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