
#गिरिडीह #महिला_सुरक्षा : आदिवासी नाबालिगों से जुड़े मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग।
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र में आदिवासी नाबालिग बच्चियों के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर आजसू पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को आजसू महिला जिलाध्यक्ष प्रियंका शर्मा ने पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार को आवेदन सौंपकर दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मामले में त्वरित व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की। बढ़ते जनदबाव के बीच जोनल डीआईजी अंजनी कुमार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
- पीरटांड़ थाना क्षेत्र में आदिवासी नाबालिगों के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला।
- आजसू महिला जिलाध्यक्ष प्रियंका शर्मा ने एसपी डॉ. विमल कुमार को सौंपा आवेदन।
- दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग।
- जोनल डीआईजी अंजनी कुमार ने हरलाडीह पहुंचकर लिया घटनास्थल का जायजा।
- आजसू नेताओं ने हर स्तर पर संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी।
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र में सामने आए सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आदिवासी नाबालिग बच्चियों के साथ हुई इस जघन्य घटना को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में आजसू पार्टी ने पीड़ितों के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभालते हुए प्रशासन से सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
एसपी को सौंपा गया लिखित आवेदन
शुक्रवार को आजसू पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका शर्मा ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार से मुलाकात कर एक लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, सख्त कानूनी कार्रवाई और पीड़ित बच्चियों को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाली हैं और ऐसे अपराधियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
महिला मोर्चा और पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी
इस दौरान श्रीमती प्रियंका शर्मा के साथ आजसू नगर महिला मोर्चा की आरती देवी, अनुपमा देवी, रिंक सिन्हा, अनिता देवी और पूजा देवी उपस्थित रहीं। वहीं पार्टी की ओर से जिला कार्यकारी अध्यक्ष श्री काम्पू यादव और छात्र संघ के जिला सचिव श्री अक्षय यादव भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की जाए।
घटना को बताया मानवता को शर्मसार करने वाली
मीडिया से बातचीत के दौरान आजसू महिला जिलाध्यक्ष प्रियंका शर्मा ने घटना की कड़ी निंदा की।
प्रियंका शर्मा ने कहा: “यह घटना अत्यंत निंदनीय है और मानवता को शर्मसार करने वाली है। आदिवासी नाबालिग बच्चियों के साथ हुई इस दरिंदगी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए। उनका कहना था कि पीड़ित परिवारों का भरोसा न्याय व्यवस्था पर बना रहना चाहिए।
पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग
प्रियंका शर्मा ने स्पष्ट किया कि आजसू पार्टी का उद्देश्य केवल ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
प्रियंका शर्मा ने कहा: “प्रशासन को चाहिए कि वह पीड़ित बच्चियों को न्याय दिलाने के लिए त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
उनके इस बयान से पार्टी के रुख की गंभीरता साफ झलकती है।
बढ़ते दबाव के बीच डीआईजी का घटनास्थल निरीक्षण
मामले की गंभीरता और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए जोनल डीआईजी अंजनी कुमार स्वयं हरलाडीह पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और जांच की प्रगति की समीक्षा की। डीआईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाए।
पुलिस अधिकारियों को दिए गए निर्देश
घटनास्थल निरीक्षण के दौरान डीआईजी अंजनी कुमार ने पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता बेहद जरूरी है। जांच प्रक्रिया को तेज करने, सबूतों को सुरक्षित रखने और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
आजसू नेताओं की दो टूक चेतावनी
आजसू पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में दोषी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों को न्याय दिलाने में देरी या लापरवाही हुई, तो आजसू पार्टी आंदोलन के लिए बाध्य होगी। नेताओं का कहना है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
जिला कार्यकारी अध्यक्ष श्री काम्पू यादव और छात्र संघ के जिला सचिव श्री अक्षय यादव ने भी प्रशासन से मांग की कि कानून का डर अपराधियों में साफ नजर आना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
समाज में आक्रोश और न्याय की अपेक्षा
इस घटना के बाद पीरटांड़ और आसपास के इलाकों में लोगों में गहरा आक्रोश है। आदिवासी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने घटना की निंदा की है और पीड़ित बच्चियों के लिए न्याय की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार या समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द होती हैं।
न्यूज़ देखो: कानून की परीक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी
पीरटांड़ गैंगरेप मामला प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है। आजसू महिला जिलाध्यक्ष द्वारा एसपी को आवेदन सौंपना और डीआईजी का स्वयं घटनास्थल पहुंचना यह दिखाता है कि जनदबाव बढ़ रहा है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि दोषियों पर कार्रवाई कितनी तेज और प्रभावी होती है। पीड़ित नाबालिग बच्चियों को न्याय दिलाना और समाज में विश्वास बहाल करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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न्याय की लड़ाई में समाज की भूमिका
ऐसी जघन्य घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि महिला और बाल सुरक्षा को लेकर हम कितने सजग हैं। कानून, प्रशासन और समाज तीनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि अपराधियों को सख्त सजा मिले और पीड़ितों को समय पर न्याय मिले।
अब वक्त है चुप रहने का नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का। आप इस मामले में प्रशासन की भूमिका को कैसे देखते हैं? अपनी राय कम



