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नाइजर में अगवा हुए गिरिडीह के सभी पांच मजदूर सुरक्षित लौटे, आठ महीने बाद घरों में लौटी खुशियां

#गिरिडीह #विदेश_अपहरण : नाइजर में अगवा हुए बगोदर प्रखंड के पांचों मजदूर सुरक्षित स्वदेश लौटे।

नाइजर में करीब आठ महीने तक अगवा रहने के बाद गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के सभी पांच मजदूर सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। रविवार और सोमवार को अलग-अलग समय पर मजदूरों की घर वापसी हुई, जिससे परिजनों और ग्रामीणों में राहत और खुशी का माहौल है। ये सभी मजदूर नाइजर में एक टावर लाइन कंपनी में कार्यरत थे, जहां से उनका अपहरण कर लिया गया था। लंबे समय तक चले अनिश्चित हालात के बाद सुरक्षित वापसी को लेकर प्रशासन और परिवार दोनों ने राहत की सांस ली है।

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  • बगोदर प्रखंड के पांच मजदूर नाइजर से सकुशल लौटे।
  • दोंदलो पंचायत के तीन मजदूर सोमवार शाम घर पहुंचे।
  • संजय महतो और उत्तम महतो रविवार शाम पहले लौटे।
  • सभी मजदूर टावर लाइन कंपनी में कार्यरत थे।
  • आठ महीने बाद परिवारों में खुशी और भावुक माहौल

नाइजर में अपहरण की घटना के बाद से ही गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के कई परिवार चिंता और अनिश्चितता में जीवन बिता रहे थे। करीब आठ महीने बाद जब सभी मजदूर सुरक्षित अपने गांव लौटे, तो परिजनों के साथ-साथ पूरे इलाके में राहत और उत्साह का माहौल बन गया। रविवार और सोमवार को अलग-अलग समय पर मजदूरों की वापसी हुई, जिसे देखने के लिए गांवों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

सोमवार की शाम दोंदलो पंचायत के राजू कुमार महतो, फलजीत महतो और चंद्रिका महतो अपने घर पहुंचे। वहीं, इससे एक दिन पहले रविवार की शाम दोंदलो पंचायत के ही संजय महतो और मुंडरो पंचायत के उत्तम महतो घर लौट चुके थे। सभी मजदूरों के सुरक्षित लौटने की खबर मिलते ही उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।

नाइजर में टावर लाइन कंपनी में कर रहे थे काम

जानकारी के अनुसार, ये सभी मजदूर अफ्रीकी देश नाइजर में एक टावर लाइन कंपनी में कार्यरत थे। रोजगार की तलाश में विदेश गए इन मजदूरों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उन्हें इतने लंबे समय तक अपहरण जैसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा। अपहरण के बाद से ही उनके परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए थे।

नाइजर में अपहृत मजदूरों में दोंदलो गांव के राजू महतो, फलजीत महतो, संजय महतो और चंद्रिका महतो के साथ मुंडरो गांव के उत्तम महतो शामिल थे। सभी एक ही कंपनी में काम कर रहे थे और एक साथ ही इस घटना के शिकार बने थे।

घर पहुंचते ही भावुक हुए परिजन

घर लौटते ही मजदूरों को देखने के लिए रिश्तेदारों और पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। परिजनों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया और लंबे समय बाद चैन की सांस ली। अपहरण की दहशत से मुक्त होकर घर लौटे मजदूरों ने भी अपने परिवार के बीच पहुंचकर राहत महसूस की। गांव में इस वापसी को लेकर एक तरह का उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक विदेश में अगवा रहने के बाद सभी मजदूरों का सुरक्षित लौट आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी साझा की और ईश्वर का धन्यवाद किया।

लंबे इंतजार के बाद लौटी राहत

आठ महीने तक चले इंतजार ने इन परिवारों को मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया था। हर दिन किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती थी। मजदूरों की सुरक्षित वापसी ने न सिर्फ उनके परिवारों को, बल्कि पूरे बगोदर प्रखंड को राहत दी है। यह घटना एक बार फिर विदेश में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े करती है।

न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

नाइजर से सुरक्षित लौटे गिरिडीह के मजदूरों की कहानी राहत देने वाली जरूर है, लेकिन यह विदेशों में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। इतनी लंबी अवधि तक अपहरण में रहना यह दर्शाता है कि जोखिम कितने बड़े होते हैं। अब यह जरूरी है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और प्रवासी मजदूरों को बेहतर सुरक्षा मिले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित रोजगार और जागरूकता की जरूरत

विदेश में रोजगार के अवसर आकर्षक जरूर होते हैं, लेकिन उससे जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सही जानकारी, पुख्ता कागजी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
अगर आप या आपके आसपास कोई विदेश जाने की योजना बना रहा है, तो सतर्क रहें और पूरी जानकारी के साथ ही कदम बढ़ाएं। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे दूसरों तक पहुंचाएं और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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