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गिरिडीह में आल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन की बैठक, चालकों ने सरकार से ठोस नीति की माँग उठाई

#गिरिडीह #चालकएकता : रतन हॉल में हुई धनवार इकाई की जिला स्तरीय बैठक, सरकार से सुरक्षा और सम्मान की गारंटी की माँग
  • घोड़थंबा स्थित रतन हॉल में हुई आल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन धनवार इकाई की जिला स्तरीय बैठक।
  • बैठक में सैकड़ों चालकों ने भाग लेकर अपनी एकता और नाराजगी का प्रदर्शन किया।
  • चालकों ने सुरक्षा, बीमा, स्वास्थ्य जांच और पहचान पत्र की माँग उठाई।
  • सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप, कहा अब तक नहीं बनी कोई स्थायी नीति।
  • यूनियन ने आपात कोष बनाने और बड़े प्रदर्शन की घोषणा की।

गिरिडीह जिले के घोड़थंबा स्थित रतन हॉल में आल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन धनवार इकाई की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में जिलेभर से सैकड़ों चालक शामिल हुए और उन्होंने एकजुट होकर सरकार से उनके हित में ठोस नीति बनाने की माँग की। चालकों का कहना था कि वे राज्य की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी स्थिति आज भी असुरक्षित और उपेक्षित है।

चालकों ने सरकार से जताई नाराजगी

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि अब तक की सभी सरकारें केवल वादे करती रही हैं, लेकिन चालकों के लिए कोई स्थायी योजना या नीति नहीं बनाई गई। दुर्घटनाओं के समय चालकों के परिवारों को कोई सहायता नहीं मिलती, न ही बीमा की सुविधा सही ढंग से लागू है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार को ड्राइवरों के लिए एक स्थायी सामाजिक सुरक्षा योजना बनानी चाहिए, जिससे उनके परिवारों को भी सुरक्षा मिल सके।

यूनियन के एक पदाधिकारी ने कहा: “हम सड़क पर दिन-रात जनता की सेवा करते हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा और सम्मान की कोई गारंटी नहीं। अब वक्त आ गया है कि सरकार चालक समुदाय के लिए ठोस कदम उठाए।”

यूनियन ने रखीं प्रमुख माँगें

बैठक में यूनियन के नेताओं ने सरकार से दुर्घटना बीमा, नियमित स्वास्थ्य जांच, अवैध वसूली पर रोक, और ड्राइवरों को स्थायी पहचान पत्र जारी करने जैसी माँगें रखीं। उनका कहना था कि यदि सरकार शीघ्र कार्रवाई नहीं करती, तो यूनियन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।

एक चालक प्रतिनिधि ने कहा: “हमारा पेशा सबसे कठिन है। हर दिन सड़क पर जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, लेकिन हमारे लिए न कोई बीमा लागू है, न स्वास्थ्य सुरक्षा। सरकार हमारी पीड़ा सुने।”

बनेगा चालकों के लिए आपात कोष

बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि यूनियन स्तर पर एक आपात सहायता कोष बनाया जाएगा, जिससे दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में प्रभावित चालकों या उनके परिवारों को त्वरित मदद दी जा सके। यूनियन ने कहा कि यह कोष पूरी तरह सदस्य योगदान आधारित होगा ताकि किसी जरूरतमंद चालक को संकट के समय सहायता मिल सके।

यूनियन अध्यक्ष ने कहा: “हम अपने साथियों को अकेला नहीं छोड़ेंगे। यूनियन हर उस परिवार के साथ खड़ी होगी जो मुसीबत में है।”

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बड़ा प्रदर्शन की तैयारी

बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय पर बड़ा धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन ने कहा कि यदि चालकों की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। चालकों ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन मांगों पर समझौता नहीं किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: सड़क पर संघर्ष, नीति में उपेक्षा

गिरिडीह की यह बैठक बताती है कि झारखंड के हजारों चालक अब अपनी समस्याओं को लेकर सजग और एकजुट हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह चालकों को केवल परिवहन साधन का हिस्सा न समझे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उनका सम्मान करे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

चालक ही सड़क की धड़कन

ड्राइवर समुदाय हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ऐसे में उनका सम्मान और सुरक्षा केवल सरकारी नीति का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।
अब समय है कि हम सब मिलकर उन लोगों के हक में आवाज उठाएं जो हमें मंज़िल तक पहुँचाते हैं।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और चालकों के अधिकारों की लड़ाई में उनका साथ दें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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