सहायक आचार्य पोस्टिंग में महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप, डीसी से हस्तक्षेप की मांग

सहायक आचार्य पोस्टिंग में महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप, डीसी से हस्तक्षेप की मांग

author Ram Niwas Tiwary
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#विश्रामपुर #शिक्षा_विवाद : सहायक आचार्य की पोस्टिंग में महिलाओं के साथ अनियमितता का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता बिनय चन्द्रवंशी ने जिला उपायुक्त से संज्ञान लेने की मांग की
  • सहायक आचार्य पोस्टिंग में महिलाओं के साथ अनियमितता और भेदभाव का आरोप।
  • बयान देने वाले भाजपा नेता व पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी बिनय चन्द्रवंशी
  • सुदूरवर्ती प्रखंडों में महिला शिक्षिकाओं की पोस्टिंग को बताया गया कष्टप्रद।
  • छोटे बच्चों वाली माताओं के लिए 100 किलोमीटर दूर सेवा कठिन।
  • 20 किलोमीटर के दायरे में पोस्टिंग नीति लागू करने की मांग।
  • मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन की चेतावनी

पलामू जिले के विश्रामपुर क्षेत्र में सहायक आचार्य की पोस्टिंग को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा नेता सह विश्रामपुर के पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी बिनय चन्द्रवंशी ने आरोप लगाया है कि सहायक आचार्य की पोस्टिंग में विशेषकर महिलाओं के साथ अनियमितता और भेदभाव बरता जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले पर जिला उपायुक्त पलामू से शीघ्र संज्ञान लेने की मांग की है।

मीडिया को संबोधित करते हुए उठाए सवाल

भाजपा नेता बिनय चन्द्रवंशी ने सोमवार को अपने आवास सिगसीगी, विश्रामपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार एक ओर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जब बेटियां पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी प्राप्त करती हैं तो उनके साथ पोस्टिंग के मामले में भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास सरकार की कथनी और करनी के अंतर को दर्शाता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सुदूरवर्ती इलाकों में पोस्टिंग बनी बड़ी समस्या

बिनय चन्द्रवंशी ने बताया कि पलामू जिले के पांडू, छतरपुर, मनातू, पिपरा, हरिहरगंज जैसे सुदूरवर्ती प्रखंडों में महिला सहायक आचार्यों की पोस्टिंग की जा रही है। इन क्षेत्रों की दूरी कई मामलों में 80 से 100 किलोमीटर तक है, जिससे प्रतिदिन आना-जाना बेहद कठिन हो जाता है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश महिला शिक्षिकाओं के बच्चे छोटे हैं। ऐसे में रोजाना इतनी लंबी दूरी तय करना न केवल शारीरिक रूप से थकाऊ है, बल्कि मानसिक और पारिवारिक दबाव भी बढ़ाता है।

मातृत्व और जिम्मेदारियों की अनदेखी का आरोप

भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि जब महिला शिक्षिकाओं के छोटे बच्चे होते हैं, तो वे उन्हें इतनी लंबी दूरी पर नौकरी करते समय किसके भरोसे छोड़ें। उन्होंने कहा कि मातृत्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि समाज की ताकत है, और इसी को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए।

बिनय चन्द्रवंशी ने कहा:
“सरकार जब मातृत्व वंदना की बात करती है, तो फिर नौकरी मिलने के बाद महिलाओं की पारिवारिक जिम्मेदारियों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?”

20 किलोमीटर के दायरे में पोस्टिंग की मांग

बिनय चन्द्रवंशी ने जिला प्रशासन से स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि महिला सहायक आचार्यों की पोस्टिंग अधिकतम 20 किलोमीटर के दायरे में की जानी चाहिए। इससे वे अपने कर्तव्यों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकेंगी और परिवार तथा बच्चों की जिम्मेदारियों को भी संभाल पाएंगी।

उन्होंने कहा कि यदि जिला उपायुक्त इस विषय में संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्णय लेते हैं, तो इससे सैकड़ों महिला शिक्षिकाओं को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।

आंदोलन की चेतावनी

भाजपा नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मांग को अनदेखा किया गया, तो वे और उनके समर्थक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि महिला शिक्षकों के अधिकार और सम्मान के लिए होगा।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को सशक्त करने की बात केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों में भी उसका प्रभाव दिखना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि महिला शिक्षिकाएं अत्यधिक दूरी के कारण मानसिक और शारीरिक दबाव में रहती हैं, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह मुद्दा केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र से जुड़ा हुआ है।

प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें

अब सभी की निगाहें पलामू जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विषय को किस गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है।

न्यूज़ देखो: महिला सशक्तिकरण बनाम प्रशासनिक वास्तविकता

यह मामला सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता है। महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासनिक फैसलों से संभव है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह इस विषय में संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बराबरी और सम्मान से ही बनेगा मजबूत समाज

महिलाओं को अवसर देने के साथ-साथ सुविधा और सुरक्षा भी जरूरी है।
यदि आप भी मानते हैं कि महिला शिक्षकों के साथ न्याय होना चाहिए, तो अपनी राय साझा करें।
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Written by

बिश्रामपुर, पलामू

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