
#गढ़वा #सरकारी_जमीन : नोटिस और माइकिंग के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटा, प्रखंड प्रमुख ने डीसी से शिकायत की।
गढ़वा जिले के विशुनपुरा प्रखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बनता जा रहा है। अंचल कार्यालय द्वारा नोटिस जारी करने और माइकिंग के बावजूद सरकारी जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया है। प्रखंड प्रमुख ने इस गंभीर मामले को लेकर उपायुक्त गढ़वा को आवेदन देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रकरण ने स्थानीय किसानों और आम जनता में असंतोष बढ़ा दिया है।
- विशुनपुरा प्रखंड के लाल चौक स्थित सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला।
- 1 एकड़ 48 डिसमिल आम गैरमजरुआ भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप।
- 13 अतिक्रमणकारियों को 28 नवंबर 2025 को नोटिस जारी किया गया।
- 05 दिसंबर 2025 तक भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया था।
- प्रखंड प्रमुख ने उपायुक्त गढ़वा से सख्त हस्तक्षेप की मांग की।
- किसानों को पीएम किसान योजना समेत अन्य लाभ नहीं मिल पाने का आरोप।
विशुनपुरा प्रखंड में सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। लाल चौक स्थित पुराने पंचायत भवन के समीप लगभग 1 एकड़ 48 डिसमिल आम गैरमजरुआ सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मुद्दे को लेकर प्रखंड प्रमुख ने उपायुक्त गढ़वा को लिखित शिकायत देकर अंचल और पंचायत स्तर पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
नोटिस और माइकिंग के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण
प्रखंड प्रमुख के आवेदन के अनुसार, विशुनपुरा अंचल कार्यालय द्वारा 28 नवंबर 2025 को सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए विधिवत नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में ग्राम विशुनपुरा के 13 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करते हुए खाता संख्या 392, प्लॉट संख्या 1370 की सरकारी भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया था।
नोटिस में यह स्पष्ट किया गया था कि यदि 05 दिसंबर 2025 तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा केवल माइकिंग और प्रचार–प्रसार तक ही सीमित कार्रवाई की गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं दिखा।
प्रखंड प्रमुख का आरोप: सिर्फ कागजी कार्रवाई
प्रखंड प्रमुख ने अपने आवेदन में कहा है कि अंचल प्रशासन की पूरी प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। नोटिस जारी करना, सार्वजनिक घोषणा करना और फिर कोई ठोस कदम न उठाना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह स्थिति झारखंड उच्च न्यायालय के सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने संबंधी निर्देशों की अवहेलना है।
किसानों पर पड़ रहा सीधा असर
अंचल प्रशासन की निष्क्रियता का सबसे अधिक प्रभाव स्थानीय किसानों पर पड़ रहा है। आवेदन में कहा गया है कि पिछले एक वर्ष से कई योग्य और पात्र किसान पीएम किसान योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। इससे किसानों में भारी नाराजगी है और प्रशासन के प्रति भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
प्रखंड प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वर्ष 2026 से पहले किसानों, सब्जी विक्रेताओं और प्रखंड के जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में अंचल कार्यालय के समक्ष बड़ा धरना–प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी जनआंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
अंचलाधिकारी का बयान
इस पूरे मामले में जब अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी खगेश कुमार से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने कहा:
खगेश कुमार ने कहा: “अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी किया गया है। जितना जल्द हो अतिक्रमण हटा दिया जाएगा, अन्यथा संबंधित लोगों पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बयान से नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई से ही भरोसा बहाल हो सकता है।
न्यूज़ देखो: प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा
विशुनपुरा का यह मामला सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की सच्चाई उजागर करता है। नोटिस और माइकिंग के बावजूद कार्रवाई नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह समय रहते हस्तक्षेप कर कानून का पालन सुनिश्चित करता है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सरकारी जमीन की रक्षा, जनहित की जिम्मेदारी
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण केवल जमीन का नहीं, बल्कि अधिकारों का हनन है। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर पारदर्शी प्रशासन की मांग करनी होगी। यदि आज आवाज नहीं उठी, तो कल नुकसान और बढ़ेगा। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और जनहित में जागरूकता फैलाएं।











