
#बरवाडीह #निर्माण_अनियमितता : लात पंचायत के बरखेता-द्वारपार सरना स्थल में घटिया निर्माण और पारदर्शिता की कमी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के नक्सल प्रभावित लात पंचायत में सरना स्थल की चारदीवारी निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है। बरखेता-द्वारपार स्थित सरना स्थल में हो रहे इस कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- बरवाडीह प्रखंड के लात पंचायत के बरखेता-द्वारपार सरना स्थल में निर्माण कार्य पर विवाद।
- ग्रामीणों ने चारदीवारी निर्माण में वित्तीय अनियमितता का लगाया आरोप।
- निर्माण में बांग्ला ईंट और कमजोर कॉलम-बीम उपयोग की शिकायत।
- योजना स्थल पर सूचना पट्ट और शिलान्यास का अभाव बताया गया।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती और नक्सल प्रभावित लात पंचायत में स्थित बरखेता-द्वारपार सरना स्थल की चारदीवारी निर्माण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाते हुए प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरना स्थल आदिवासी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र होता है, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे पवित्र स्थल के विकास कार्य में लापरवाही और अनियमितता से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार इन दिनों सरना स्थल की चारदीवारी का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन इसमें गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में बांग्ला ईंट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे दीवार, कॉलम और बीम की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इसी तरह कमजोर सामग्री का इस्तेमाल जारी रहा तो कुछ ही समय में दीवारों में दरार पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य जल्दबाजी में और मानकों की अनदेखी करते हुए किया जा रहा है, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
योजना में पारदर्शिता की कमी का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण स्थल पर अब तक किसी प्रकार का शिलान्यास कार्यक्रम नहीं किया गया है। इसके अलावा योजना से संबंधित सूचना पट्ट भी नहीं लगाया गया है।
इस कारण ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि योजना की कुल लागत, प्राक्कलन राशि, कार्य एजेंसी या संवेदक कौन है। पारदर्शिता के अभाव को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला और गंभीर हो सकता है।
आस्था से जुड़ा है सरना स्थल
सarna स्थल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां समुदाय के लोग पारंपरिक त्योहारों और पूजा-पाठ के दौरान एकत्रित होते हैं।
इसी कारण ग्रामीण चाहते हैं कि सरना स्थल से जुड़े विकास कार्य पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ किए जाएं, ताकि यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक बना रहे।

न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता जरूरी
सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है। जब किसी धार्मिक या सामुदायिक स्थल से जुड़ा विकास कार्य होता है तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच से ही जनता का भरोसा कायम रह सकता है।
जागरूक समाज ही रोक सकता है अनियमितता
यदि लोग अपने क्षेत्र के विकास कार्यों पर नजर रखते हैं और समय-समय पर सवाल उठाते हैं, तो इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। समाज और प्रशासन के बीच सहयोग से ही योजनाओं का सही लाभ लोगों तक पहुंच सकता है।
यदि आपके क्षेत्र में भी किसी विकास कार्य में गड़बड़ी दिखाई देती है तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक जरूर पहुंचाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।






