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मनरेगा में ऐतिहासिक भ्रष्टाचार के आरोप, सौरभ श्रीवास्तव की 16 जनवरी को लातेहार में बड़ी प्रेस वार्ता

#लातेहार #मनरेगा_भ्रष्टाचार : सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ श्रीवास्तव करेंगे बड़े खुलासे का दावा।

लातेहार जिले में मनरेगा योजना को लेकर बड़े भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने वाले हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने 16 जनवरी 2026 को जिला मुख्यालय लातेहार में प्रेस वार्ता कर अहम खुलासे करने की घोषणा की है। सौरभ का दावा है कि वर्षों से चली आ रही मनरेगा योजनाओं में व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है।

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  • 16 जनवरी 2026 को लातेहार जिला मुख्यालय में होगी प्रेस वार्ता।
  • मनरेगा में वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार के दस्तावेजी प्रमाण पेश करने का दावा।
  • प्रशासनिक पदाधिकारियों और योजना से जुड़े लोगों की संलिप्तता का आरोप।
  • सामाजिक कार्यकर्ता व झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव करेंगे संबोधन।
  • घोषणा के बाद मनरेगा महकमे में हड़कंप की स्थिति।

लातेहार जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सौरभ श्रीवास्तव ने ऐलान किया है कि वे 16 जनवरी को जिला मुख्यालय लातेहार में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता करेंगे। इस प्रेस वार्ता में वे मनरेगा के तहत बीते वर्षों में हुए कथित ऐतिहासिक भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करेंगे।

बताया जा रहा है कि यह प्रेस वार्ता जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है, क्योंकि सौरभ श्रीवास्तव ने भ्रष्टाचार में विभिन्न स्तर के अधिकारियों और योजना से जुड़े लोगों की संलिप्तता का दावा किया है।

मनरेगा का नाम बदला, जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव के बाद उन्होंने लातेहार जिले में इससे जुड़ी योजनाओं की गहराई से पड़ताल शुरू की। इस दौरान उन्हें कई ऐसे तथ्य और आंकड़े मिले, जो सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।

उनका कहना है कि कागजों में दिखाए गए कार्य, मजदूरी भुगतान और परिसंपत्तियों के निर्माण की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया है। कई योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रहीं, जबकि भुगतान और निकासी पूरी हो गई।

प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर उठे सवाल

सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, यह भ्रष्टाचार केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न स्तर के प्रशासनिक पदाधिकारी, तकनीकी कर्मी और योजना से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास ऐसे पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

सौरभ ने संकेत दिए हैं कि प्रेस वार्ता में वे दस्तावेज, भुगतान विवरण और योजनाओं से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक कर सकते हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता सामने आएगी।

प्रेस वार्ता को लेकर जिले में बढ़ी हलचल

सौरभ श्रीवास्तव की प्रेस वार्ता की घोषणा के बाद से ही लातेहार जिले में मनरेगा से जुड़े विभागों में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारी और कर्मचारी स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि आखिर किन योजनाओं और किन लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

जिले भर के पत्रकारों को इस प्रेस वार्ता में आमंत्रित किया गया है, जिससे यह साफ है कि सौरभ इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर मजबूती से उठाने की तैयारी में हैं।

पहले भी उठा चुके हैं जनहित के मुद्दे

स्थानीय लोगों के अनुसार, सौरभ श्रीवास्तव पहले भी कई जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। वे सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं की निगरानी और जमीनी सच्चाई सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि उनकी इस प्रेस वार्ता को लेकर आम लोगों और राजनीतिक हलकों में खास दिलचस्पी देखी जा रही है।

क्या होगी आगे की कार्रवाई

यदि प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। संभावना है कि राज्य स्तर पर जांच एजेंसियां सक्रिय हों और मनरेगा से जुड़े मामलों की विशेष जांच की मांग उठे।

यह भी देखा जाना बाकी है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई आधिकारिक जांच की घोषणा की जाती है।

न्यूज़ देखो: जवाबदेही तय होने की कसौटी

मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार के आरोप बेहद गंभीर हैं। सौरभ श्रीवास्तव की प्रस्तावित प्रेस वार्ता प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सामने आने वाले तथ्य कितने ठोस हैं और उन पर क्या कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग जरूरी

जनता के पैसे से चलने वाली योजनाओं में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद है। ऐसे मामलों पर सवाल उठाना और सच सामने लाना जरूरी है। अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और व्यवस्था में सुधार के लिए जागरूकता फैलाएं।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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