
#सिमडेगा #भूमि_विवाद : पहनाई आदिवासी जमीन पर नक्सा पास कर अवैध निर्माण का आरोप।
सिमडेगा के ईदगाह मुहल्ला एनएच स्थित आदिवासी बकाश्त पहनाई जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस आदिवासी कांग्रेस नेता दिलीप तिर्की ने नगर परिषद अधिकारियों पर मिलीभगत से नक्सा पास कराने का आरोप लगाया है। मामले में उपायुक्त को आवेदन देकर जांच और नक्सा रद्द करने की मांग की गई है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
- दिलीप तिर्की ने आदिवासी बकाश्त पहनाई जमीन पर अवैध निर्माण का लगाया आरोप।
- ईदगाह मुहल्ला NH, सिमडेगा स्थित जमीन पर पहले रुका था निर्माण।
- नगर परिषद के कुछ अधिकारियों पर मिलीभगत से नक्सा पास कराने का आरोप।
- 2023 में अंचल अधिकारी द्वारा म्यूटेशन पहले ही रद्द किया जा चुका था।
- उपायुक्त को आवेदन देकर जांच और नक्सा रद्द करने की मांग।
सिमडेगा में आदिवासी बकाश्त पहनाई जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस आदिवासी कांग्रेस के नेता दिलीप तिर्की ने नगर परिषद के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आदिवासियों की जमीन को व्यवस्थित तरीके से हड़पने की कोशिश की जा रही है। यह मामला ईदगाह मुहल्ला एनएच के पास स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जहां पूर्व में निर्माण कार्य रोका गया था, लेकिन अब फिर से कथित रूप से नक्सा पास कर निर्माण शुरू किए जाने का आरोप लगाया गया है।
आदिवासी जमीन को मजाक बनाने का आरोप
कांग्रेस आदिवासी कांग्रेस नेता दिलीप तिर्की ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीन को कुर्सी पर बैठे लोग मजाक बना चुके हैं और उसे लूटने के लिए अलग-अलग तरकीबें निकाली जा रही हैं।
दिलीप तिर्की ने कहा:
“आदिवासियों की जमीन को कुर्सी पर बैठे लोगों ने मजाक बना रखा है, उसे लूटने के लिए हर तरह की तरकीब निकाली जा रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर अवैध निर्माण रुका हुआ था, उसी जमीन पर दोबारा दूसरे नाम से नक्सा पास कराकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
पहले रोका गया था निर्माण, फिर अंदरूनी तरीके से शुरू हुआ काम
जानकारी के अनुसार ईदगाह मुहल्ला एनएच स्थित आदिवासी बकाश्त पहनाई जमीन पर पहले शिकायत के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया था। दिलीप तिर्की का दावा है कि पूर्व में दिए गए आवेदन के आधार पर निर्माण पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अंदरूनी स्तर पर कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं की गई।
उनका कहना है कि बाद में उसी व्यक्ति द्वारा दूसरे के नाम से फिर से नक्सा के लिए आवेदन किया गया और कथित रूप से नगर परिषद के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से उसे पास करा लिया गया, जिसके बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया।
एक ही अधिकारी पर कई भूमिकाओं में नक्सा पास करने का आरोप
दिलीप तिर्की ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर माह में एक ही अधिकारी ने खुद को नोडल ऑफिसर, टैक्स ऑफिसर और टाउन प्लानर की भूमिका में दिखाते हुए नक्सा पास कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय टैक्स ऑफिसर का पद अस्तित्व में ही नहीं था, फिर भी दस्तावेजों में उसका हवाला दिया गया।
उन्होंने कहा कि अंचल अधिकारी के एलपीसी देने का हवाला देकर आदिवासी बकाश्त पहनाई जमीन पर नक्सा पास किया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसी जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती।
2023 में म्यूटेशन पहले ही हो चुका था रद्द
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि वर्ष 2023 में पूर्व अंचल अधिकारी ने उक्त जमीन को पहनाई जमीन बताते हुए म्यूटेशन रद्द कर दिया था। वरीय अधिकारियों से बातचीत में भी यह स्पष्ट किया गया कि आदिवासी बकाश्त पहनाई भूमि की खरीद-बिक्री कानूनी रूप से संभव नहीं है, ऐसे में एलपीसी जारी करने का प्रश्न ही नहीं उठता।
इसके बावजूद नक्सा पास होना कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
ईमेल और फोन नंबर को लेकर भी उठे संदेह
दिलीप तिर्की ने आरोप लगाया कि नक्सा पास कराने के आवेदन में उसी व्यक्ति का ईमेल आईडी और फोन नंबर दिया गया था, जिसका म्यूटेशन पहले रद्द किया जा चुका था। उनका कहना है कि बाद में रजिस्ट्रेशन को कैंसिल कर पुराने कागजात के मालिक मो. सलीम के नाम से आवेदन दिया गया, लेकिन संपर्क विवरण उसी व्यक्ति का रखा गया ताकि ओटीपी और अन्य जानकारी उसी तक पहुंचे और प्रक्रिया पर किसी की नजर न पड़े।
यह पूरा मामला प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
जमीन रजिस्ट्री और वास्तविक निर्माण को लेकर भी विवाद
दिलीप तिर्की के अनुसार उक्त जमीन को दो लोगों ने 15-15 डिसमिल के हिसाब से रजिस्ट्री कराया था। इनमें से एक व्यक्ति ने अपनी रजिस्ट्री वापस ले ली, जबकि दूसरे ने नहीं ली। इस स्थिति में केवल 15 डिसमिल जमीन ही खाली मानी जा सकती है, लेकिन निर्माण उसी हिस्से में बताया जा रहा है, जिस जमीन की रजिस्ट्री अब भी दूसरे व्यक्ति के नाम पर है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किस जूनियर इंजीनियर और टैक्स ऑफिसर ने फील्ड वेरिफिकेशन कर नक्सा निर्गत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, जबकि फील्ड सत्यापन में निर्माण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देने की बात कही जा रही है।
उपायुक्त को सौंपा गया आवेदन, जांच की मांग तेज
मामले को गंभीर बताते हुए दिलीप तिर्की ने उपायुक्त से मिलकर लिखित आवेदन दिया है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही नगर कार्यपालक पदाधिकारी से भी नक्सा की वैधता की जांच कर उसे रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला आदिवासी पहनाई जमीन से जुड़ा है, इसलिए जिला प्रशासन और उपायुक्त इस विषय को गंभीरता से ले रहे हैं।
स्थल पर काम कर रहे मजदूरों का बयान भी आया सामने
दिलीप तिर्की ने दावा किया कि जब स्थल पर काम कर रहे मजदूरों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि वे एक ऐसे व्यक्ति के कहने पर काम कर रहे हैं, जिनका होंडा शोरूम है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
न्यूज़ देखो: आदिवासी जमीन पर निर्माण विवाद प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा
यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं बल्कि आदिवासी भूमि अधिकार और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। यदि पहनाई जमीन पर नियमों के विपरीत नक्सा पास हुआ है तो यह जांच का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। अब प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि नियमों का पालन हुआ या मिलीभगत के आरोप सही हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
आदिवासी जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं बल्कि पहचान और अधिकार का सवाल है।
ऐसे मामलों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन बेहद आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों को भी भूमि से जुड़े मामलों में सजग रहना चाहिए।
अनियमितता दिखे तो संबंधित प्रशासन को तुरंत सूचना दें।
जागरूक समाज ही गलत कार्यों पर रोक लगा सकता है।
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