
#महुआडांड़ #स्कूल_लापरवाही : बच्चों को सिर्फ चावल-अचार, 44 में से 25 को ही मिली स्कूल ड्रेस
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित कुकुदपाठ प्राथमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा और विद्यालय में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है।
- कुकुदपाठ प्राथमिक विद्यालय में मीनू के अनुसार नहीं दिया जा रहा मध्यान्ह भोजन।
- बच्चों को शनिवार को केवल चावल और अचार परोसे जाने का आरोप।
- रसोई के आसपास गंदगी, लकड़ी से बनाया जा रहा भोजन।
- 44 नामांकित बच्चों में से सिर्फ 25 को मिली स्कूल ड्रेस, ग्रामीणों में नाराजगी।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच कर कार्रवाई करने की उठाई मांग।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत स्थित कुकुदपाठ प्राथमिक विद्यालय में व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में बच्चों को सरकार द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार मध्यान्ह भोजन नहीं दिया जा रहा है और स्कूल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है।
ग्रामीणों के अनुसार शनिवार को विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यान्ह भोजन के नाम पर केवल चावल और अचार दिया गया, जबकि सरकारी मीनू के अनुसार उस दिन अन्य खाद्य सामग्री भी दी जानी चाहिए थी। इससे अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
गंदगी के बीच बन रहा भोजन
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय में मध्यान्ह भोजन की तैयारी साफ-सफाई के मानकों के अनुसार नहीं की जा रही है। भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है और रसोई के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
बताया गया कि रसोई क्षेत्र में स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं की जाती, जिससे वातावरण अस्वच्छ बना रहता है।
स्कूल ड्रेस वितरण में भी अनियमितता
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के बीच स्कूल ड्रेस वितरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार कक्षा 1 और 2 में कुल 44 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन इनमें से केवल 25 बच्चों को ही ड्रेस उपलब्ध कराई गई है।
बाकी बच्चों को अब तक ड्रेस नहीं मिलने से अभिभावकों में असंतोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सभी बच्चों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है।
प्रभारी शिक्षक ने नहीं दिया स्पष्ट जवाब
ग्रामीणों का कहना है कि जब इस संबंध में विद्यालय के प्रभारी शिक्षक से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे ग्रामीणों के संदेह और भी बढ़ गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय में इस तरह की लापरवाही जारी रही तो बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होंगे।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
न्यूज़ देखो : स्कूलों में योजनाओं की निगरानी जरूरी
सरकार द्वारा बच्चों के पोषण और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए मध्यान्ह भोजन और स्कूल ड्रेस जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन यदि इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही होती है तो उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
प्रशासनिक निगरानी से ही सुधरेगी व्यवस्था
ऐसे मामलों में नियमित निरीक्षण और कड़ी निगरानी से ही स्कूलों में व्यवस्था सुधर सकती है और यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से बच्चों तक पहुंचे।
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