
#सिमडेगा #पुल_निर्माण : सर्पलता गांव में पुल निर्माण में अनियमितता और मजदूरी बकाया को लेकर जिला परिषद सदस्य का कड़ा रुख।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत कोनपाला पंचायत के सर्पलता गांव में बन रहे पुल निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मजदूरों ने महीनों से मजदूरी नहीं मिलने और शोषण का आरोप लगाया है। जिला परिषद सदस्य अजय एक्का ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संवेदक व विभाग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।
- सर्पलता गांव में पुल निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का आरोप।
- फरवरी 2025 से मजदूरों को नहीं मिली पूरी मजदूरी।
- मजदूरों को सरकारी दर से कम 300 रुपये दिहाड़ी देने का आरोप।
- त्योहारों में सिर्फ 500-500 रुपये देकर मजदूरों को भेजा गया।
- जिला परिषद सदस्य अजय एक्का ने लेबर कोर्ट जाने की चेतावनी दी।
- निर्माण अधूरा रहने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोनपाला पंचायत के सर्पलता गांव में बन रहा पुल अब ग्रामीणों और मजदूरों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी और संघर्ष का कारण बन गया है। पुल निर्माण में कथित अनियमितताओं और मजदूरी भुगतान को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
महीनों से बकाया मजदूरी, मजदूर बेहाल
ग्रामीणों और निर्माण में लगे मजदूरों ने बताया कि उन्हें फरवरी 2025 से अब तक उनके काम का पूरा भुगतान नहीं किया गया है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें सरकारी दर से कम, मात्र 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है, जबकि कागजों में पूरी राशि दिखाकर बंदरबांट किया जा रहा है।
मजदूरों ने बताया कि लंबे समय से मजदूरी न मिलने के कारण उनके परिवारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
त्योहारों में भी नहीं मिली राहत
मजदूरों ने भावुक होकर बताया कि क्रिसमस और नए साल जैसे बड़े त्योहारों के मौके पर भी उन्हें राहत की उम्मीद थी, लेकिन संवेदक द्वारा केवल 500-500 रुपये देकर उन्हें घर भेज दिया गया। मजदूरों का कहना है कि यह उनके श्रम का मजाक उड़ाने जैसा है।
मुंशी पर मारपीट का आरोप, गांव में तनाव
पुल निर्माण की देखरेख कर रहे गांव के ही एक मुंशी ने दावा किया कि मजदूर मजदूरी की मांग को लेकर उसके साथ धक्का-मुक्की करते हैं। वहीं मजदूरों का आरोप है कि जब वे अपने हक की मजदूरी मांगते हैं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। इस स्थिति ने गांव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
अधूरा पुल बना ग्रामीणों की परेशानी
पुल निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इसके कारण सर्पलता गांव के ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
जिला परिषद सदस्य अजय एक्का का सख्त रुख
मामले की जानकारी मिलने पर जिला परिषद सदस्य अजय एक्का मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। मजदूरों की बदहाली और घटिया निर्माण कार्य को देखकर उन्होंने कड़ा रोष जताया।
अजय एक्का ने कहा:
“मजदूरों के हक के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि मजदूरों को जल्द उनका बकाया नहीं मिला, तो यह सीधा कानून का उल्लंघन है।”
उपायुक्त से शिकायत और लेबर कोर्ट की तैयारी
अजय एक्का ने ऐलान किया कि वे जल्द ही सिमडेगा उपायुक्त से मिलकर इस पूरे मामले की लिखित शिकायत करेंगे। साथ ही मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए लेबर कोर्ट में केस दर्ज कराया जाएगा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ और निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं आया, तो संबंधित विभाग और संवेदक के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों का साफ संदेश
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और पुल निर्माण कार्य सही तरीके से पूरा नहीं होगा, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे। यह मामला अब केवल मजदूरी का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बनता जा रहा है।

न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में जवाबदेही की परीक्षा
सर्पलता पुल निर्माण का मामला यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी किस तरह मजदूरों और ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रही है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई करता है।
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मजदूर का हक, विकास की असली पहचान
बिना न्याय के विकास अधूरा है।
मजदूरों का सम्मान और समय पर भुगतान ही सच्ची प्रगति का आधार है।
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