
#सिमडेगा #डाडिंग #मानवीय_प्रशासन : पर्यटन भ्रमण के दौरान सिकल सेल पीड़ित बच्चे के इलाज और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाकर डीसी ने रचा संवेदनशील शासन का उदाहरण।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड सीमा पर स्थित विश्वविख्यात पर्यटन स्थल डाडिंग में एक प्रशासनिक पहल ने मानवीय संवेदनशीलता की नई मिसाल कायम की है। भ्रमण के दौरान उपायुक्त कंचन सिंह ने सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चे देवानन्द की स्थिति को जाना और उसके इलाज व शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की निगरानी में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह निर्णय जिले में संवेदनशील, जिम्मेदार और जनमुखी प्रशासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।
- डाडिंग पर्यटन स्थल भ्रमण के दौरान डीसी की नजर पड़ी सिकल सेल पीड़ित बच्चे पर।
- देवानन्द लंबे इलाज के कारण स्कूल जाने में असमर्थ था।
- उपायुक्त कंचन सिंह ने इलाज और घर पर शिक्षा की व्यवस्था के निर्देश दिए।
- बीडीओ को तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश।
- प्रशासन की पहल बनी उम्मीद और भरोसे की किरण।
सिमडेगा जिले का डाडिंग पर्यटन स्थल आमतौर पर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दक्षिणी कोयल नदी की अठखेलियों और हरियाली के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार डाडिंग एक मानवीय प्रशासनिक निर्णय के कारण चर्चा का केंद्र बना। उपायुक्त सिमडेगा कंचन सिंह जब डाडिंग भ्रमण पर थीं, तभी एक छोटी-सी मुलाकात ने प्रशासन की भूमिका को केवल फाइलों से आगे ले जाकर संवेदना और जिम्मेदारी का प्रतीक बना दिया।
डाडिंग भ्रमण के दौरान मासूम देवानन्द से मुलाकात
डाडिंग में भ्रमण के दौरान उपायुक्त की नजर एक बच्चे पर पड़ी, जो एक पर्यटक मित्र के पीछे सकुचाया हुआ खड़ा था। बुलाने पर बच्चा मुस्कुराते हुए सामने आया और उसने अपना नाम देवानन्द बताया। सहज बातचीत में पता चला कि देवानन्द सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। बीमारी के लंबे इलाज के कारण वह नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहा है और पिता उसे अकेला छोड़ने में असहज महसूस करते हैं।
सच्ची संवेदनशीलता का परिचय
बच्चे की स्थिति जानकर उपायुक्त कंचन सिंह भावुक हुईं, लेकिन उन्होंने भावनाओं से आगे बढ़कर जिम्मेदार प्रशासन का उदाहरण पेश किया। मौके पर ही उन्होंने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि देवानन्द के इलाज की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासन की निगरानी में सुनिश्चित की जाए, ताकि उसे समय पर और बेहतर उपचार मिल सके।
शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्था
उपायुक्त ने यह भी सुनिश्चित किया कि बीमारी के कारण देवानन्द की पढ़ाई बाधित न हो। उन्होंने घर पर ही शिक्षा की व्यवस्था, आवश्यक किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। देवानन्द की आंखों में पढ़ने की जिज्ञासा और सीखने की ललक देखकर उपायुक्त ने कहा:
“बीमारी किसी बच्चे के सपनों की राह नहीं रोक सकती। यह जिम्मेदारी प्रशासन और समाज दोनों की है कि हर बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।”
शिबू सोरेन जयंती से जुड़ा मानवीय संदेश
संयोगवश यह दिन झारखंड निर्माता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती का भी था। इस अवसर पर उपायुक्त का यह कदम मुख्यमंत्री के उस संदेश को साकार करता दिखा, जिसमें कहा गया है कि “झारखंड का हर बच्चा पढ़े”। देवानन्द के लिए उठाया गया यह निर्णय इसी सोच की जीवंत मिसाल बन गया।
प्रशासन केवल आदेश नहीं, जिम्मेदारी भी
इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि जिला प्रशासन केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ज़मीन पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी पीड़ा समझने और समाधान करने का संकल्प रखता है। देवानन्द के चेहरे पर लौटी मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि संवेदनशील निर्णय किसी के जीवन में कितनी बड़ी उम्मीद जगा सकते हैं।
उपायुक्त सिमडेगा की अपील
उपायुक्त कंचन सिंह ने जिलेवासियों से अपील की कि यदि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य या पोषण से वंचित है, तो उसकी जानकारी सीधे प्रशासन तक साझा करें, ताकि समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके और कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।
न्यूज़ देखो: जब प्रशासन बने अभिभावक
डाडिंग की इस घटना ने यह साबित किया है कि जब प्रशासन संवेदनशील बनता है, तब शासन मानवीय रूप ले लेता है। एक बच्चे की बीमारी को समस्या नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझना ही सच्चे जनसेवक की पहचान है। उपायुक्त कंचन सिंह की यह पहल जिले में भरोसे और उम्मीद का मजबूत संदेश देती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हर मुस्कान मायने रखती है
हर बच्चा भविष्य है।
हर सपना जिम्मेदारी है।
संवेदनशील प्रशासन ही मजबूत समाज की नींव है।
आइए, मिलकर किसी भी देवानन्द को पीछे न छूटने दें।






