#पश्चिमसिंहभूम #सड़कनिर्माणविवाद : ग्रामीणों ने गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सड़क जाम किया।
पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर प्रखंड में एनएच 320 डी सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं के विरोध में ग्रामीणों ने मुख्य सड़क को जाम कर दिया। सुबह छह बजे से शुरू हुआ जाम करीब साढ़े पांच घंटे तक चला। एनएचएआई सुपरविजन टीम, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता के बाद लिखित सहमति बनी और आवागमन बहाल किया गया। यह मामला निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से जुड़ा महत्वपूर्ण जनहित मुद्दा बन गया है।
- आनंदपुर के मोरंग में सुबह 6 बजे से साढ़े पांच घंटे तक सड़क जाम रहा।
- एनएच 320 डी (रायकेरा से कोलेविरा) निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप।
- एनएचएआई सुपरविजन टीम, बीडीओ नाजिया अफरोज, थाना प्रभारी प्रिंस झा ने की वार्ता।
- ग्रामीणों की मांगों पर लिखित एकरारनामा के बाद यातायात सामान्य।
- 15 अप्रैल तक रायकेरा से डुमिरता तक कालीकरण पूरा करने पर सहमति।
पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग 320 डी के निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने निर्माण में अनियमितता और संवेदक की मनमानी का आरोप लगाते हुए मुख्य सड़क जाम कर दिया। रायकेरा से बेड़ाकेंदुदा तक चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। इस जाम के कारण सुबह से ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह बाधित रहा।
सड़क निर्माण में अनियमितता के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध
मनोहरपुर के रायकेरा से कोलेविरा तक लगभग 78 किलोमीटर लंबी एनएच 320 डी सड़क के निर्माण कार्य के दौरान आनंदपुर प्रखंड के कई हिस्सों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी क्रम में रायकेरा से बेड़ाकेंदुदा के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने आनंदपुर के मोरंग में सड़क जाम कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप था कि निर्माण कार्य के दौरान तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में धूल, दुर्घटना का खतरा और आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। सुबह छह बजे से शुरू हुए इस जाम के कारण मालवाहक वाहन, यात्री बसें और छोटे वाहन सड़क पर ही फंस गए, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ।
प्रशासन और एनएचएआई टीम की मौके पर पहुंचकर वार्ता
सड़क जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक टीम सुबह से ही स्थल पर पहुंच गई थी। करीब चार घंटे बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की सुपरविजन टीम के अधिकारी अनादी शंकर राव और किशन राय मौके पर पहुंचे। उनके साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी नाजिया अफरोज, थाना प्रभारी प्रिंस झा, संवेदक के कर्मी तथा ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा।
ग्रामीणों की ओर से प्रतिनिधिमंडल में प्रभुदयाल जोजो, सुशील डांग, सुशीला टोप्पो, मुखिया अनिल नायक, सावन हेम्ब्रोम, जिला परिषद सदस्य विजय भेंगरा सहित अन्य लोग शामिल थे। वार्ता के दौरान निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
अनादी शंकर राव ने कहा:
“ग्रामीणों की सभी मांग जायज हैं। विभाग ने संवेदक को निर्देश दिया है कि सभी कार्य तय मानकों के अनुसार पूरे किए जाएं, अन्यथा जुर्माना लगाया जाएगा।”
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान डब्लूएमएम कार्य में पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिससे धूल और दुर्घटना की आशंका बढ़ रही है। साथ ही पुलिया निर्माण स्थल पर कोई चेतावनी संकेत नहीं लगाया गया है और डायवर्शन मार्ग भी समुचित रूप से तैयार नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि निर्माण के दौरान रोलिंग और गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे सड़क जल्द ही खराब होने की आशंका है। उन्होंने पहले भी 20 फरवरी को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर तीन बार पानी छिड़काव, रोलिंग, पुलिया निर्माण और चरणबद्ध कालीकरण की मांग की थी।
वार्ता के बाद लिखित समझौता, तय समयसीमा
लगातार वार्ता के बाद प्रशासन, संवेदक और ग्रामीणों के बीच विभिन्न मांगों पर लिखित एकरारनामा तैयार किया गया। समझौते के अनुसार 15 अप्रैल तक रायकेरा से डुमिरता तक सड़क का कालीकरण कार्य पूरा किया जाएगा और इस अवधि में आगे पुरानी पिच नहीं उखाड़ी जाएगी।
इसके अलावा पुलिया निर्माण कार्य शीघ्र कराने, 2 मार्च तक सभी डायवर्शन में डब्लूएमएम कार्य पूरा करने, दुर्घटना से बचाव के लिए बोर्ड और रिबन लगाने तथा प्रतिदिन कम से कम तीन बार पानी का छिड़काव करने पर सहमति बनी। जहां सड़क पर मेटल और चिप्स उखड़ गए हैं, वहां पुनः फिलिंग करने का भी निर्णय लिया गया।
सुपरविजन टीम ने यह भी आश्वासन दिया कि निर्माण गुणवत्ता की नियमित जांच की जाएगी और संतोषजनक कार्य नहीं होने पर दोबारा निर्माण कराया जाएगा।
जाम के दौरान आवश्यक सेवाओं को दी गई छूट
सड़क जाम के दौरान प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था लागू की। छोटे वाहनों और कुछ बसों को भालुडुंगरी चौक से रोबकेरा होते हुए गंतव्य की ओर भेजा गया। बंद के दौरान स्कूली छात्र, स्कूली वाहन, एम्बुलेंस, मरीजों से जुड़े वाहन और आवश्यक सेवाओं को विशेष छूट दी गई।
बताया गया कि जाम के दौरान सुरक्षा बलों के छह वाहन भी फंस गए थे, जिन्हें प्रशासन और बंद समर्थकों के बीच वार्ता के बाद सुरक्षित रूप से रवाना कराया गया। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और पुरुष मौजूद थे, जिनमें जयवंत एक्का, जीवन कंडायबुरु, इमानुअल जोजो, अनिल भुइयां, मुनिलाल सुरीन, सुनील सुरीन, करुणा जोजो, अनिता तोपनो, बिरसी उरांव सहित कई लोग शामिल रहे।
प्रशासन की भूमिका और आगे की निगरानी
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी सुपरविजन टीम द्वारा निरीक्षण के समय सूचना देने का निर्णय लिया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
साथ ही यह भी तय हुआ कि यदि संवेदक निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और इसकी जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी दी जाएगी।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा
यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता की निगरानी कितनी आवश्यक है। सड़क निर्माण में लापरवाही सीधे आम जनता की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा विषय है। प्रशासन और एनएचएआई की त्वरित पहल सराहनीय है, लेकिन क्या तय समयसीमा में सभी कार्य मानकों के अनुरूप पूरे होंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग नागरिक और जवाबदेह विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश
सड़क, पुल और आधारभूत संरचना केवल विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा अधिकार है।
ग्रामीणों का शांतिपूर्ण विरोध यह दिखाता है कि जागरूक समाज ही बेहतर विकास सुनिश्चित करता है।
जरूरी है कि हर परियोजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य को प्राथमिकता दी जाए।
आप भी अपने क्षेत्र के विकास कार्यों पर नजर रखें, समस्याएं सामने लाएं और समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।
स्थानीय मुद्दों पर जागरूक रहें, अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जिम्मेदार नागरिक बनकर विकास की प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करें।