
#गढ़वा #धार्मिक_आयोजन : श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा आश्रम मरहटिया में अनन्य दिवस पर पूजा, गोष्ठी और भंडारे का आयोजन हुआ।
गढ़वा जिले के मरहटिया स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा आश्रम में माघ कृष्ण चतुर्दशी के अवसर पर अनन्य दिवस समारोह श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस मौके पर भगवान महावराह पीठ एवं समाधि स्थल पर विशेष पूजा-अर्चना, पाठ और आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आश्रम से जुड़े साधक, श्रद्धालु और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ गोष्ठी, भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को विशेष बना दिया।
- श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा आश्रम मरहटिया में अनन्य दिवस का आयोजन।
- भगवान महावराह पीठ एवं समाधि स्थल पर विशेष पूजा और आरती।
- सफल योनि पाठ का वाचन।
- माघ कृष्ण चतुर्दशी के धार्मिक महत्व पर गोष्ठी।
- श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
गढ़वा जिले के मरहटिया गांव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा आश्रम में अनन्य दिवस समारोह का आयोजन पूरे भक्तिभाव और श्रद्धा के वातावरण में किया गया। माघ कृष्ण चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर दिनभर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जिन्होंने भगवान महावराह पीठ एवं समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
विशेष पूजा और सफल योनि पाठ
अनन्य दिवस के अवसर पर आश्रम में स्थापित भगवान महावराह एवं समाधि स्थल पर विशेष पूजा एवं आरती संपन्न हुई। इस दौरान श्री सुरेन्द्र चौबे द्वारा सफल योनि का पाठ किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक श्रवण किया। पूजा के उपरांत शुद्ध प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे भक्तों में प्रसन्नता देखी गई।
गोष्ठी में बताए गए अनन्य दिवस के महत्व
पूजा-पाठ के पश्चात आश्रम परिसर में एक धार्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने माघ कृष्ण चतुर्दशी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि इसी तिथि को परम पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु जी को लंबे समय तक उपेक्षा और तिरस्कार सहने के बाद प्रयागराज संगम तट पर मां भगवती का दर्शन प्राप्त हुआ था।
वक्ताओं ने बताया कि उस दिन मां भगवती ने बाबा जी से तिलकुट-चूड़ा ग्रहण किया, जिसके बाद उनके जीवन में अभाव समाप्त हुआ और ऐसी कृपा हुई कि दूसरों को भी टालना पड़ने लगा। तभी से श्री सर्वेश्वरी समूह में माघ कृष्ण चतुर्दशी को अनन्य दिवस के रूप में पर्व की तरह मनाने की परंपरा चली आ रही है।
गुरु कृपा और पात्रता का संदेश
गोष्ठी में यह भी बताया गया कि परम पूज्य गुरुदेव मां गुरु जी आज के दिन अपने शिष्यों को उनकी पात्रता के अनुसार भरपूर प्रदान करते हैं। यह दिन श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं ने गुरु कृपा और साधना के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम
गोष्ठी के उपरांत आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद संध्या आरती का आयोजन हुआ, जिसमें पूरा आश्रम परिसर भक्तिरस में डूब गया। संध्या आरती के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो उठा। इन्हीं कार्यक्रमों के साथ अनन्य दिवस समारोह का विधिवत समापन किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में श्री रविन्द्र नाथ द्विवेदी, श्री जगनरायण दुबे, सुरेन्द्र चौबे, पुष्कर सुमन, सत्येंद्र तिवारी, टेपण जायसवाल, बबलू तिवारी, संजीत कुमार मिश्रा, सत्येंद्र ठाकुर, सुधीर तिवारी, रमेश राम, सुशीला द्विवेदी, रीता तिवारी, पुष्पा जायसवाल, मांगलवास देवी, संगीता तिवारी, लीलावती देवी, उषा देवी, कृष्ण राम, अनिल राम सहित अन्य श्रद्धालुओं और सेवाभावी लोगों का सराहनीय योगदान रहा।

न्यूज़ देखो: परंपरा और आस्था का जीवंत उदाहरण
मरहटिया आश्रम में मनाया गया अनन्य दिवस यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक परंपराएं आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा भाव को भी बढ़ावा देते हैं। आश्रमों की यह भूमिका आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गई है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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