गिरिडीह में अतिक्रमण और जाम पर फूटा गुस्सा नगरनिगम की कार्यशैली पर राजेश सिन्हा ने उठाए गंभीर सवाल

author Surendra Verma
6 hours ago 7 Views
#गिरिडीह #अतिक्रमण_विवाद : नगरनिगम पर दोहरी भूमिका निभाने और व्यवस्था विफल होने के आरोप लगे।

गिरिडीह में बढ़ते अतिक्रमण और जाम की समस्या को लेकर माले नेता राजेश सिन्हा ने नगरनिगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फुटपाथ दुकानों से शुल्क वसूली के बावजूद अतिक्रमण हटाने में ढिलाई बरती जा रही है। शहर में यातायात अव्यवस्था और अवैध टोटो संचालन को भी उन्होंने समस्या का बड़ा कारण बताया। 9 अप्रैल को प्रस्तावित नगरनिगम बैठक में इन मुद्दों पर ठोस निर्णय की मांग की गई है।

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  • राजेश सिन्हा ने नगरनिगम पर अतिक्रमण मामले में दोहरी भूमिका का आरोप लगाया।
  • फुटपाथ दुकानों से शुल्क वसूली के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल।
  • कालीबाड़ी से टावर चौक तक कार्रवाई, लेकिन अन्य क्षेत्रों में अनदेखी का आरोप।
  • 9 अप्रैल की नगरनिगम बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा की मांग।
  • नाबालिग टोटो चालकों और रूट व्यवस्था पर भी जताई चिंता।
  • 36 वार्ड पार्षद, मेयर और डिप्टी मेयर के बावजूद स्थिति नहीं सुधरने पर नाराजगी।

गिरिडीह शहर में अतिक्रमण और जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस मुद्दे पर माले नेता राजेश सिन्हा ने खुलकर नगरनिगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगरनिगम अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाने में असफल रहा है, जिससे शहर की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जहां फुटपाथ पर दुकानों के लिए स्थान निर्धारित है, वहां दुकानदारों को शिफ्ट नहीं किया जाता।

नगरनिगम पर दोहरी भूमिका निभाने का आरोप

राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि नगरनिगम अतिक्रमण के मामलों में डबल रोल निभा रहा है। एक ओर अतिक्रमण हटाने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर फुटपाथ दुकानदारों से नियमित रूप से शुल्क वसूला जाता है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “जब नगरनिगम को पता है कि यह अतिक्रमण है, तो फिर फुटपाथ पर दुकान लगाने की अनुमति क्यों दी जाती है और उनसे पैसे क्यों लिए जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि नगरनिगम कर्मियों और संवेदकों के बीच बेहतर तालमेल है, जिसके कारण अतिक्रमण की समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।

चयनित क्षेत्रों में ही कार्रवाई पर सवाल

राजेश सिन्हा ने नगरनिगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कालीबाड़ी से टावर चौक तक ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है और उसकी तस्वीरें मीडिया में प्रकाशित होती हैं।

लेकिन बड़ा चौक, पचंबा, गिरिडीह मुस्लिम, मकतपुर और बरगंडा जैसे क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में लगातार समझाने और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

9 अप्रैल की बैठक से उम्मीदें

राजेश सिन्हा ने बताया कि 9 अप्रैल को नगरनिगम की पहली बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सभी जनप्रतिनिधि एकजुट होंगे। उन्होंने इस बैठक में अतिक्रमण, जाम और शहरी व्यवस्था से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय लेने की मांग की।

उन्होंने कहा कि शहर के विकास और व्यवस्था सुधार के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

टोटो संचालन और जाम की समस्या

गिरिडीह में बढ़ती जाम की समस्या को लेकर भी राजेश सिन्हा ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 18 साल से कम उम्र के टोटो चालकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो यातायात व्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि शहर में टोटो के लिए अलग-अलग जोन और निर्धारित रूट तय किए जाने चाहिए, जिससे जाम की समस्या से राहत मिल सके।

डीटीओ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

राजेश सिन्हा ने कहा कि डीटीओ ऑफिस को सजग होने की जरूरत है। उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि शहर में कुल कितने टोटो चल रहे हैं और उनका संचालन किस प्रकार हो रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टोटो संचालन में भी संवेदकों को जिम्मेदारी दी गई है, जिसके कारण रूट तय नहीं हो पा रहा है और अव्यवस्था बनी हुई है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल

गिरिडीह में कुल 36 वार्ड पार्षद, एक मेयर और एक डिप्टी मेयर होने के बावजूद शहर की स्थिति खराब बनी हुई है। राजेश सिन्हा ने कहा कि इतने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के होते हुए भी यदि समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और भी खराब हो सकती है।

न्यूज़ देखो: जवाबदेही तय करने का समय

गिरिडीह का अतिक्रमण और जाम मुद्दा अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। यदि वसूली हो रही है और कार्रवाई नहीं, तो पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल उठते हैं। नगरनिगम, डीटीओ और जिला प्रशासन को मिलकर एक समन्वित योजना बनानी होगी, तभी स्थायी समाधान संभव है। अब देखना होगा कि 9 अप्रैल की बैठक में क्या ठोस फैसले सामने आते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए आपकी भागीदारी जरूरी

एक बेहतर शहर केवल प्रशासन के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता से भी बनता है। अतिक्रमण और अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है।

यदि आप भी अपने शहर को साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित देखना चाहते हैं, तो नियमों का पालन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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