Latehar

एक साल से बकाए मजदूरी भुगतान को लेकर फूटा आक्रोश, मजदूरों ने वनरक्षी को तीन घंटे बनाया बंधक

#बरवाडीह #श्रमिक_मुद्दा : बेतला रेंज कार्यालय में मजदूरी भुगतान की मांग को लेकर हंगामा।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला रेंज कार्यालय परिसर में बकाए मजदूरी को लेकर मजदूरों का आक्रोश शुक्रवार को उग्र रूप में सामने आया। एक वर्ष से भुगतान नहीं होने से नाराज मजदूरों ने वनरक्षी को लगभग तीन घंटे तक कार्यालय में बंधक बनाए रखा। काफी समझाने और एक सप्ताह में भुगतान के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और मजदूरों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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  • बेतला रेंज कार्यालय परिसर में मजदूरों का हंगामा।
  • वनरक्षी गुलशन सुरीन को तीन घंटे तक बनाया बंधक।
  • दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक कराया गया था कार्य।
  • पलामू किला बीट में झाड़ियों की साफ-सफाई का मामला।
  • एक सप्ताह में भुगतान के आश्वासन पर मजदूरों ने छोड़ा।

बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत वन विभाग की कार्यशैली से आक्रोशित मजदूरों का गुस्सा शुक्रवार को उस समय फूट पड़ा, जब बकाए मजदूरी भुगतान को लेकर उन्होंने बेतला रेंज कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया। लंबे समय से मजदूरी भुगतान नहीं होने से परेशान मजदूरों ने वनरक्षी गुलशन सुरीन को लगभग तीन घंटे तक कार्यालय में बंधक बनाए रखा।

मजदूरों का कहना था कि विभाग द्वारा लगातार टाल-मटोल किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इस घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

एक वर्ष पहले कराया गया था काम

मजदूरों ने बताया कि उनसे वर्ष 2024 के दिसंबर तथा जनवरी–फरवरी 2025 में लगातार तीन माह तक कार्य कराया गया था। यह कार्य पलामू किला बीट क्षेत्र में झाड़ियों की साफ-सफाई से संबंधित था।

मजदूरों के अनुसार, यह काम वनरक्षी गुलशन सुरीन और तत्कालीन वनपाल रामकुमार के निर्देश पर कराया गया था। कार्य पूरा होने के बाद भी मजदूरी भुगतान नहीं किया गया, जबकि मजदूर बार-बार विभाग के चक्कर काटते रहे।

बकाए भुगतान से मजदूरों की बढ़ी परेशानी

मजदूर गिरेंद्र सिंह, सुदय सिंह, रामनाथ सिंह, बलराम सिंह, लव सिंह, दिनेश सिंह, सुनील सिंह, पच्चु सिंह, हरेंद्र सिंह, देवधनी सिंह, सुरेंद्र यादव, भोलाशंकर यादव समेत दर्जनों महिला मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि मजदूरी भुगतान न होने से उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मजदूरों का कहना है कि दैनिक मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए एक साल तक भुगतान न होना बेहद पीड़ादायक है। कई मजदूरों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर खर्च तक प्रभावित हो रहा है।

टाल-मटोल से भड़का आक्रोश

मजदूरों का आरोप है कि विभाग द्वारा बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन भुगतान के नाम पर केवल टाल-मटोल किया गया।

मजदूरों ने कहा कि जब वे कार्यालय जाते हैं, तो कभी फाइल लंबित होने की बात कही जाती है, तो कभी राशि आवंटन नहीं होने का बहाना बनाया जाता है। इसी उपेक्षा से तंग आकर उन्होंने कड़ा कदम उठाया।

तीन घंटे तक बना रहा तनाव

बेतला रेंज कार्यालय परिसर में मजदूरों के हंगामे से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मजदूरों ने स्पष्ट कहा कि जब तक मजदूरी भुगतान को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे वनरक्षी को नहीं छोड़ेंगे।

मौके पर मौजूद अन्य वनकर्मियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया और मजदूरों को शांत करने में जुटे रहे।

आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला

काफी प्रयास और बातचीत के बाद वन विभाग की ओर से मजदूरों को एक सप्ताह के भीतर मजदूरी भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद मजदूरों ने वनरक्षी गुलशन सुरीन को छोड़ा और मामला शांत हुआ।

हालांकि मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो वे फिर आंदोलन करेंगे।

वनरक्षी ने दी सफाई

मामले को लेकर वनरक्षी गुलशन सुरीन ने कहा कि मजदूरी भुगतान के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन भेजा जा चुका है।

उन्होंने कहा:
“राशि आवंटन के अभाव में मजदूरों का भुगतान लंबित है। जैसे ही आवंटन प्राप्त होगा, भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”

मजदूरों में अब भी असंतोष

हालांकि आश्वासन के बाद मजदूर मौके से लौट गए, लेकिन उनके मन में असंतोष बना हुआ है। मजदूरों का कहना है कि आश्वासन पहले भी मिले हैं, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।

न्यूज़ देखो: जवाबदेही तय होना जरूरी

यह घटना वन विभाग में मजदूरी भुगतान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मजदूरों से काम कराने के बाद समय पर भुगतान न होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के भी खिलाफ है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, ताकि मजदूरों को उनका हक समय पर मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजदूरों के अधिकारों के लिए जागरूक बनें

मेहनत की कमाई समय पर मिलना हर मजदूर का अधिकार है। यदि कहीं अन्याय हो रहा है, तो आवाज उठाना जरूरी है। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और मजदूर हितों के लिए जागरूकता फैलाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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