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लातेहार नगर पंचायत में ओबीसी आरक्षण को लेकर भड़का आक्रोश, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन

#लातेहार #ओबीसी_आरक्षण : नगर पंचायत अध्यक्ष पद में आरक्षण न मिलने से ओबीसी समाज का उग्र प्रदर्शन।

लातेहार नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर ओबीसी समुदाय को आरक्षण नहीं दिए जाने के विरोध में शनिवार को जोरदार प्रदर्शन हुआ। नगर पंचायत समाहरणालय के सामने ओबीसी समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। यह विरोध स्थानीय स्तर पर ओबीसी प्रतिनिधित्व की कमी और आरक्षण व्यवस्था को लेकर गहराते असंतोष को दर्शाता है।

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  • लातेहार नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर ओबीसी को आरक्षण नहीं मिलने का विरोध।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नगर पंचायत समाहरणालय के सामने पुतला दहन।
  • प्रदर्शन में रुपेश अग्रवाल, वीरेंद्र प्रसाद सहित कई ओबीसी नेता शामिल।
  • ओबीसी समाज ने संवैधानिक अधिकारों से वंचित किए जाने का आरोप लगाया।
  • जिले में ओबीसी प्रतिनिधित्व शून्य होने का दावा।
  • आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी गई।

लातेहार नगर पंचायत क्षेत्र में शनिवार को ओबीसी आरक्षण को लेकर माहौल पूरी तरह गरमा गया। नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर ओबीसी समुदाय को आरक्षण नहीं दिए जाने से आक्रोशित लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। नगर पंचायत समाहरणालय के सामने बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह फैसला न केवल ओबीसी समाज के साथ अन्याय है, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों की अनदेखी भी है।

नगर पंचायत अध्यक्ष पद में आरक्षण को लेकर नाराजगी

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर ओबीसी समाज को आरक्षण मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। ओबीसी समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि वर्षों से उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हाशिये पर रखा जा रहा है। उनका कहना था कि यदि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आरक्षण लागू किया जाता, तो इससे सामाजिक संतुलन और न्याय सुनिश्चित होता।

नारेबाजी और सरकार को चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान रुपेश अग्रवाल ने जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि आने वाले समय में ओबीसी समाज अपनी वोट की ताकत से सरकार को जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज कमजोर नहीं है और राज्य को सबसे अधिक राजस्व देने वाले वर्गों में शामिल है। इसके बावजूद यदि उन्हें उनका हक नहीं मिलता है, तो यह घोर अन्याय है।

रुपेश अग्रवाल ने कहा: “ओबीसी समाज को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है, और इसका जवाब हम लोकतांत्रिक तरीके से देंगे।”

प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ओबीसी समाज को उसका अधिकार मिल जाता, तो मुख्यमंत्री या सरकार को क्या नुकसान हो जाता।

आंदोलन को तेज करने की चेतावनी

ओबीसी नेता वीरेंद्र प्रसाद ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लातेहार जिला में वर्तमान समय में ओबीसी आरक्षण की स्थिति शून्य है।

वीरेंद्र प्रसाद ने कहा: “न जिले में कोई ओबीसी विधायक है, न जिला परिषद अध्यक्ष, न मुखिया और न ही अन्य महत्वपूर्ण पदों पर हमारा प्रतिनिधित्व है।”

उनका कहना था कि यह स्थिति ओबीसी समाज के साथ लंबे समय से हो रही उपेक्षा को दर्शाती है।

शिक्षा और रोजगार में भी उपेक्षा का आरोप

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज को केवल राजनीतिक पदों में ही नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालय में बच्चों के नामांकन से लेकर चौकीदार जैसे छोटे पदों तक में भी ओबीसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐसी स्थिति में ओबीसी समाज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उनका आरोप था कि सरकार की नीतियां केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका लाभ नहीं मिल रहा।

बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

इस उग्र प्रदर्शन में बलराम प्रसाद, रूपेश कुमार अग्रवाल, वीरेंद्र प्रसाद, शंभू प्रसाद, धर्मेंद्र प्रसाद, कमलेश प्रसाद, पवन कुमार, संतोष कुमार, राम कुमार मिस्त्री, मुकेश यादव, राजेश प्रसाद, विजय प्रसाद सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जो सरकार ओबीसी समाज के साथ अन्याय करेगी, वही आने वाले समय में राजनीतिक रूप से नुकसान उठाएगी। इसी चेतावनी और आक्रोश के साथ मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया।

न्यूज़ देखो: ओबीसी आरक्षण पर सरकार की नीति सवालों के घेरे में

लातेहार में हुआ यह प्रदर्शन दिखाता है कि ओबीसी समाज में आरक्षण को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी और प्रशासनिक स्तर पर उपेक्षा के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह संवैधानिक प्रावधानों की समीक्षा कर स्थिति स्पष्ट करे। क्या सरकार इस असंतोष को समय रहते दूर कर पाएगी, यह आने वाले दिनों में तय होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकार की आवाज को अनसुना न करें

ओबीसी समाज का यह आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग है। सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व के बिना लोकतंत्र अधूरा है। जरूरी है कि शासन और प्रशासन सभी वर्गों की आवाज सुने और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए। यदि आप भी सामाजिक न्याय और समान अधिकारों के पक्षधर हैं, तो अपनी राय साझा करें। इस खबर को आगे बढ़ाएं, चर्चा को मजबूत करें और जागरूक नागरिक होने की जिम्मेदारी निभाएं।

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