
#बिरनी #जनप्रतिवाद : भरकट्टा बाजार में सामंतवाद और दमन के खिलाफ भाकपा माले की जोरदार सभा आयोजित।
गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत भरकट्टा बाजार में शनिवार को भाकपा (माले) की ओर से आक्रोशपूर्ण प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया। सभा में सामंतवादी गठजोड़ और पुलिस-प्रशासन पर गरीबों, किसानों और मजदूरों के दमन का आरोप लगाया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी के साथ जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई गई। आयोजन को क्षेत्र में बढ़ते सामाजिक असंतोष और संगठित जनसंघर्ष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
- भरकट्टा बाजार, बिरनी प्रखंड में भाकपा माले की आक्रोशपूर्ण प्रतिवाद सभा।
- सामंतवादी ताकतों और पुलिस-प्रशासन पर संरक्षण का आरोप।
- किसान, मजदूर और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल।
- झूठे मुकदमे और दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ तीखा विरोध।
- आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी के साथ शांतिपूर्ण समापन।
गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में शनिवार को राजनीतिक और सामाजिक हलचल उस समय तेज हो गई, जब भरकट्टा बाजार में भाकपा (माले) ने आक्रोशपूर्ण प्रतिवाद सभा का आयोजन किया। सभा में क्षेत्र के किसान, मजदूर, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने सामंतवादी ताकतों और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया। पूरे बाजार क्षेत्र में जनआक्रोश और संघर्ष का माहौल देखने को मिला।
सामंतवादी गठजोड़ पर गंभीर आरोप
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सामंतवादी ताकतें संगठित होकर गरीबों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार कर रही हैं। नेताओं का कहना था कि इन ताकतों को पुलिस-प्रशासन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
वक्ताओं ने कहा:
भाकपा माले नेताओं ने कहा: “गरीब, किसान और मजदूर जब अपने हक की बात करते हैं, तो उन्हें डराने-धमकाने और झूठे मुकदमों में फंसाने का काम किया जाता है। यह सामंतवादी सोच और दमनकारी व्यवस्था अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
झूठे मुकदमों और दमनात्मक कार्रवाई का मुद्दा
सभा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आम जनता की आवाज को दबाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। कई मामलों में आंदोलन करने वाले ग्रामीणों और किसानों पर पुलिसिया कार्रवाई की बात कही गई। नेताओं ने इसे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
भाकपा (माले) नेताओं का कहना था कि जब भी लोग अपने अधिकारों के लिए संगठित होते हैं, तब प्रशासन दमन का रास्ता अपनाता है। इससे न केवल लोगों में भय का माहौल बनता है, बल्कि न्याय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।
किसान और मजदूरों की पीड़ा
प्रतिवाद सभा में शामिल किसानों और मजदूरों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं। किसानों ने भूमि, सिंचाई और फसल के उचित दाम का मुद्दा उठाया, जबकि मजदूरों ने रोजगार, मजदूरी और सम्मानजनक जीवन की मांग रखी।
ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में विकास की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर गरीबों को उनका लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में सामंतवादी ताकतें और मजबूत होती जा रही हैं, जबकि आम जनता हाशिए पर धकेली जा रही है।
आंदोलन को तेज करने की चेतावनी
सभा के दौरान भाकपा (माले) नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जनविरोधी नीतियों पर रोक नहीं लगाई गई और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रतिवाद सभा केवल शुरुआत है और जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक संघर्ष किया जाएगा।
नेताओं ने यह भी कहा कि जनता के हक-अधिकार की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है और इसे संगठित, शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
नारेबाजी और जनएकजुटता का प्रदर्शन
सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर जोरदार नारेबाजी की। नारे सामंतवाद, भ्रष्टाचार और पुलिसिया दमन के खिलाफ थे। बाजार क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, हालांकि सभा पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष करेंगे।
शांतिपूर्ण लेकिन सख्त संदेश
प्रतिवाद सभा का समापन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया, लेकिन वक्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों को लेकर आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता।
सभा के माध्यम से भाकपा (माले) ने प्रशासन और सामंतवादी ताकतों को साफ संदेश देने की कोशिश की कि जनता अब जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है।
न्यूज़ देखो: जनआक्रोश का संगठित रूप
भरकट्टा बाजार में हुई यह प्रतिवाद सभा क्षेत्र में बढ़ते सामाजिक असंतोष को उजागर करती है। सामंतवाद और दमन के आरोप अगर सही हैं, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। भाकपा माले ने संगठित आंदोलन के जरिए जनता की आवाज को सामने लाने का प्रयास किया है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और पीड़ितों को न्याय मिलता है या नहीं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की मजबूती जनता की जागरूकता से
लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब जनता अपने अधिकारों को लेकर सजग और संगठित रहती है। भरकट्टा की यह सभा बताती है कि ग्रामीण समाज अब अन्याय के खिलाफ चुप रहने को तैयार नहीं है।
आप भी अपने आसपास हो रहे सामाजिक और प्रशासनिक अन्याय पर नजर रखें और लोकतांत्रिक तरीकों से आवाज उठाएं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।



