
#गिरिडीह #औद्योगिक_हादसा : फैक्ट्री में काम के दौरान घायल ड्राइवर की इलाज के दौरान मौत।
गिरिडीह जिले के औद्योगिक क्षेत्र स्थित बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री में एक सप्ताह के भीतर दूसरी मजदूर मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामले में फैक्ट्री में कार्यरत ड्राइवर मुकेश कुमार मंडल की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन शुरू किया है। लगातार हो रहे हादसों से श्रमिकों में भय और आक्रोश का माहौल है।
- बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री में एक सप्ताह में दूसरी मजदूर मौत।
- मृतक मुकेश कुमार मंडल (35), निवासी बेल्हो गांव, जसपुर पंचायत।
- कार्य के दौरान गंभीर चोट लगने के बाद इलाज के लिए ले जाते समय मौत।
- परिजनों का फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप।
- श्रमिक संगठनों ने जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
- फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं।
गिरिडीह जिले के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। बीते एक सप्ताह के भीतर फैक्ट्री में काम के दौरान यह दूसरी मौत बताई जा रही है, जिससे न केवल मृतक का परिवार बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया है। ताजा घटना के बाद फैक्ट्री परिसर और आसपास तनाव की स्थिति बनी हुई है।
कौन थे मृतक मजदूर
इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान मुकेश कुमार मंडल (35 वर्ष) के रूप में हुई है। वे गिरिडीह सदर प्रखंड के जसपुर पंचायत अंतर्गत बेल्हो गांव के निवासी थे और उनके पिता का नाम शीतल मंडल बताया गया है। मुकेश कुमार मंडल बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे और परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा माने जा रहे थे। उनकी असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कैसे हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में कार्य के दौरान मुकेश कुमार मंडल को गंभीर चोटें लगी थीं। चोटों की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल बेहतर इलाज के लिए धनबाद अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने फैक्ट्री में काम कर रहे अन्य मजदूरों को भी दहला दिया है, क्योंकि यह हादसा किसी बड़ी मशीन या औद्योगिक गतिविधि के दौरान हुआ बताया जा रहा है।
परिजनों का आक्रोश और प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन फैक्ट्री पहुंचे और शव को लेकर फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती और मजदूरों के लिए उचित इंतजाम होते, तो इस तरह की मौत को टाला जा सकता था। प्रदर्शन के दौरान परिजन न्याय और मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
एक सप्ताह में दूसरी मौत से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि कुछ दिन पूर्व भी इसी फैक्ट्री में एक मजदूर की मौत हो चुकी है। लगातार दो घटनाओं ने फैक्ट्री की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। इससे श्रमिकों के बीच भय का माहौल पैदा हो गया है और वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
श्रमिक संगठनों की मांग
घटना के बाद श्रमिक संगठनों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल प्रबंधन बल्कि प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
लगातार हो रहे औद्योगिक हादसों ने स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच आवश्यक मानी जाती है। लेकिन इस तरह की घटनाओं से यह आशंका जताई जा रही है कि निरीक्षण और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रह गई है। मजदूरों का कहना है कि वे रोज अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
फैक्ट्री प्रबंधन की चुप्पी
घटना को लेकर फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रबंधन की चुप्पी ने मजदूरों और परिजनों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक मजदूरों की जान की कीमत पर उत्पादन चलता रहेगा और कब सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा।
न्यूज़ देखो: मजदूर सुरक्षा पर गंभीर चेतावनी
बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री में एक सप्ताह के भीतर दूसरी मौत यह बताने के लिए काफी है कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था में खामियां मौजूद हैं। मजदूरों की जान की कीमत पर विकास और उत्पादन स्वीकार्य नहीं हो सकता। अब जरूरत है कि प्रशासन और श्रम विभाग इस मामले में त्वरित और सख्त कदम उठाए। जांच, जवाबदेही और ठोस सुधार ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोक सकते हैं।
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मजदूर की जान सबसे कीमती, सुरक्षा से समझौता नहीं
औद्योगिक विकास तभी सार्थक है जब वह मानव जीवन की सुरक्षा के साथ आगे बढ़े। हर मजदूर सुरक्षित माहौल में काम करने का हकदार है। ऐसी घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सुरक्षा नियमों का पालन कितना जरूरी है।
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