
#गुमला #सांस्कृतिक_महोत्सव : केराटोली में आयोजित पुस मेला में पारंपरिक नागपुरी कला, गीत-संगीत और नृत्य ने ग्रामीणों को पूरी रात झूमने पर मजबूर किया।
- केराटोली, पालकोट में नवयुवक संघ ने भव्य पुस मेला आयोजित किया।
- कार्यक्रम का उद्घाटन मंगल सिंह भोगता और शशि प्रकाश सिंह गुडू ने संयुक्त रूप से किया।
- स्थानीय कलाकारों ने नागपुरी गीत-संगीत और नृत्य से समा बांधा।
- नेताओं ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षित करने की अपील की।
- मेला सफल बनाने में कई ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पालकोट प्रखंड के बिलिंगबिरा पंचायत के केराटोली में नवयुवक संघ द्वारा आयोजित पुस मेला मंगलवार की रात सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक नागपुरी संगीत और नृत्य की ऐसी प्रस्तुति हुई कि दर्शक घंटों तक मंत्रमुग्ध होकर बैठे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा किसान मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी मंगल सिंह भोगता और भाजपा मंडल अध्यक्ष शशि प्रकाश सिंह गुडू ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। सांस्कृतिक मंच पर स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति ने क्षेत्र में उत्साह और उमंग का वातावरण बना दिया।
मुख्य अतिथियों ने सांस्कृतिक विरासत बचाने पर दिया जोर
उद्घाटन के बाद मुख्य अतिथि मंगल सिंह भोगता ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए पारंपरिक संस्कृति और कला को बचाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंगल सिंह भोगता ने कहा: “गीत-संगीत और नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं, इन्हें संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। खेती-किसानी से विराम के बाद भगवान इंद्र के प्रति आस्था और समाज में एकता बढ़ाने के लिए इस तरह के मेले ग्रामीणों की सराहनीय पहल है।”
उन्होंने कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से पारंपरिक धरोहर को जीवंत बनाए रखें।
भाजपा मंडल अध्यक्ष शशि प्रकाश सिंह गुडू ने भी ग्रामीण समाज को संगठित, शिक्षित और सांस्कृतिक रूप से संपन्न बनाने पर बल दिया।
मंच पर कलाकारों की शानदार प्रस्तुति
मंच संचालन का शुभारंभ भरत सिंह द्वारा माता रानी की वंदना से हुआ। इसके बाद “झूमी झारखंड म्यूजिशियन ग्रुप” की धुन पर नागपुरी कलाकार चिंता, मोनिका देवी और अन्य स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। दर्शकों ने रातभर तालियों और नृत्य के बीच कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इन प्रस्तुतियों ने पारंपरिक नागपुरी संस्कृति की आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया। मंच पर आधुनिक और ठेठ नागपुरी दोनों स्वरूपों का सुन्दर समन्वय देखने को मिला, जिसने युवा और बुजुर्ग दोनों को उत्साहित किया।
आयोजन समिति का विशेष योगदान
मेला को सफल बनाने में कई ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
संतोष प्रधान, संतोष सिंह, दिनेश सिंह, मनोज खड़िया, छटकुपाल सिंह, राधेश्वर प्रधान, मुरारी सिंह, भावनाथ सिंह, केश्वर सिंह, डोमन पाहन, रामलखन पाहन, रमा प्रधान, रामजीत सिंह, मोहन सिंह, शंभु सिंह, मनोज सिंह, सीताराम प्रधान, रूपधारी सिंह, नारायण सिंह, कोंदा सिंह, तुलसी सिंह सहित कई ग्रामीण, जिनके प्रयासों से यह मेला सफल और आकर्षक बन पाया।
आयोजन समिति की ओर से साखु प्रधान और रोहित एक्का ने भी कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए।
पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक माहौल
पुस मेला के सफल आयोजन से बिलिंगबिरा पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में सांस्कृतिक माहौल बना रहा। लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम भी करते हैं।

न्यूज़ देखो: संस्कृति की पहचान को नया जीवन मिला
पालकोट के पुस मेला ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा है। स्थानीय कलाकारों को मंच देना न केवल उनकी प्रतिभा को आगे लाता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
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परंपरा जीवित रखिए, संस्कृति आगे बढ़ाइए
हमारी संस्कृति हमारी पहचान है—और इसे जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। पुस मेले जैसे आयोजन सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम हैं। आप भी अपने आसपास होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लें, कलाकारों को प्रोत्साहित करें और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाएं।
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