
#ठेठईटांगर #कोरोजों_मेला : तीन दिवसीय पारंपरिक मेला की बंदोबस्ती प्रखंड कार्यालय में पारदर्शी प्रक्रिया से पूरी हुई।
ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत कोरोजों में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय पारंपरिक मेला की बंदोबस्ती प्रक्रिया गुरुवार को प्रखंड कार्यालय ठेठईटांगर में संपन्न हुई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ₹34 हजार की सर्वोच्च बोली लगाकर भाजपा नेता नरेंद्र बड़ाईक ने मेला की बंदोबस्ती हासिल की। बंदोबस्ती की कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी की गई। मेला के सुचारु संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
- कोरोजों तीन दिवसीय मेला की बंदोबस्ती प्रक्रिया संपन्न।
- ₹34,000 की सर्वोच्च बोली लगाकर नरेंद्र बड़ाईक बने बंदोबस्तधारी।
- प्रखंड कार्यालय ठेठईटांगर में हुई नियमानुसार बोली।
- अजय एक्का, बिपिन मिंज और कमलेश उरांव की उपस्थिति।
- मेला में विधि-व्यवस्था और स्वच्छता पर विशेष जोर।
ठेठईटांगर प्रखंड के कोरोजों गांव में आयोजित होने वाले पारंपरिक तीन दिवसीय मेला को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को प्रखंड कार्यालय ठेठईटांगर में मेला की बंदोबस्ती प्रक्रिया आयोजित की गई। प्रशासन की देखरेख में पारदर्शी ढंग से बोली कराई गई, जिसमें कई इच्छुक लोगों ने भाग लिया। अंततः ₹34 हजार की सबसे ऊंची बोली लगाकर भाजपा नेता नरेंद्र बड़ाईक ने मेला की बंदोबस्ती अपने नाम कर ली।
प्रखंड कार्यालय में पूरी हुई बंदोबस्ती प्रक्रिया
कोरोजों मेला की बंदोबस्ती की प्रक्रिया प्रखंड कार्यालय परिसर में निर्धारित नियमों के अनुसार कराई गई। बोली प्रक्रिया के दौरान सभी प्रतिभागियों को समान अवसर दिया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य अजय एक्का, प्रखंड प्रमुख बिपिन मिंज तथा अंचल अधिकारी कमलेश उरांव उपस्थित रहे। सभी की निगरानी में बोली प्रक्रिया पूरी कराई गई। अधिकारियों ने बंदोबस्तधारी को मेला संचालन से जुड़े नियमों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी।
प्रशासन की प्राथमिकता, सुव्यवस्थित मेला आयोजन
प्रखंड प्रशासन की ओर से बताया गया कि मेला के दौरान विधि-व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, रोशनी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। मेला क्षेत्र में आने वाले स्थानीय लोगों और दूर-दराज से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा है कोरोजों मेला
कोरोजों मेला क्षेत्र का एक प्रमुख पारंपरिक आयोजन माना जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग शामिल होते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आपसी मेल-जोल और आजीविका का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
मेला संचालन को लेकर जिम्मेदारियां तय
बंदोबस्ती प्राप्त करने के बाद अब मेला के सफल संचालन की जिम्मेदारी नरेंद्र बड़ाईक पर होगी। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकती है।
न्यूज़ देखो: पारदर्शिता के साथ परंपरा का संरक्षण
कोरोजों मेला की बंदोबस्ती प्रक्रिया का पारदर्शी तरीके से संपन्न होना प्रशासनिक व्यवस्था की सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। ऐसे आयोजनों में नियमों का पालन और जनहित को प्राथमिकता देना जरूरी है। अब निगाहें मेला के सुव्यवस्थित और सुरक्षित आयोजन पर टिकी होंगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपरा और व्यवस्था का संतुलन जरूरी
कोरोजों मेला जैसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और सामाजिक एकता के प्रतीक होते हैं। इनका सफल आयोजन तभी संभव है जब प्रशासन, आयोजक और जनता मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
मेला के दौरान स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।
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