#बोलबा #अखंडहरिकीर्तन : समसेरा में वैदिक मंत्रोच्चार संग आयोजन प्रारंभ।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड अंतर्गत समसेरा बखरीटोली गांव में भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा के साथ अष्टप्रहरी अखण्ड हरि कीर्तन आरम्भ हुआ। 1 मार्च 2026 को शंख नदी से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जल उठाकर यात्रा निकाली गई। रामरेखा बाबा उमाकांत जी महाराज की अगुवाई में नाम यज्ञ शुरू हुआ। 2 मार्च को पूर्णाहुति और भंडारा होगा।
- 1 मार्च 2026 को शंख नदी से जल उठाकर निकली भव्य कलश यात्रा।
- पंडित नीलाबर पंडा व वैष्णव पारसमणि दास ने कराया वैदिक अनुष्ठान।
- रामरेखा बाबा उमाकांत जी महाराज की अगुवाई में आरम्भ हुआ कीर्तन।
- पांच किमी यात्रा में भारी संख्या में महिला-पुरुषों की सहभागिता।
- 2 मार्च 2026 को पूर्णाहुति, हवन, आरती और भंडारा।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड अंतर्गत समसेरा बखरीटोली गांव में धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में कलश यात्रा के साथ अष्टप्रहरी अखण्ड हरि कीर्तन की शुरुआत हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच निकली पांच किलोमीटर लंबी कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने भाग लिया। आयोजन को लेकर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है।
शंख नदी से जल उठाकर निकली कलश यात्रा
आयोजन समिति के संयोजक परमानन्द बड़ाइक ने बताया कि 1 मार्च 2026 की प्रातः बोलबा स्थित शंख नदी से जल उठाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित नीलाबर पंडा एवं वैष्णव पारसमणि दास ने अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद जयकारों के बीच भव्य कलश यात्रा की शुरुआत हुई।
करीब पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा में ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं। पुरुष श्रद्धालु भी भक्ति गीत गाते हुए यात्रा में सम्मिलित हुए।
भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में हुआ विधिवत पूजन
कलश यात्रा के उपरांत यज्ञ स्थल भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजन किया गया। इसके पश्चात रामरेखा बाबा उमाकांत जी महाराज की अगुवाई में नाम यज्ञ अष्टप्रहरी अखण्ड हरि कीर्तन आरम्भ हुआ।
कीर्तन में समसेरा, बोलबा, पालेमुंडा, लेटाबेड़ा, पाकरबहार और कछुपानी सहित कई गांवों की कीर्तन मंडलियों को आमंत्रित किया गया है। भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
प्रवचन में भक्ति और गुरु महिमा पर बल
कार्यक्रम के दौरान रामरेखा बाबा उमाकांत जी महाराज द्वारा प्रवचन भी दिया जा रहा है। उन्होंने भक्ति ज्ञान, आत्म ज्ञान और ईश्वरीय ज्ञान पर विस्तार से चर्चा की।
रामरेखा बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा: “ईश्वर की प्राप्ति के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। गुरु का स्थान सर्वोपरि है। ईश्वर अनंत है, गुरु की भक्ति करो तो ईश्वर की प्राप्ति हो जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि कलियुग में भगवान का नाम स्मरण ही मनुष्य को भावसागर से पार करा सकता है। धर्म के प्रति आस्था और विश्वास बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
धर्म जागरूकता पर दिया गया संदेश
प्रवचन में सनातन धर्म की प्राचीनता और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि गांव-गांव में कीर्तन और भजन के माध्यम से लोगों को धर्म के प्रति जागरूक रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंतिम दिन 2 मार्च 2026 को पूर्णाहुति, हवन पूजन, आरती, प्रसाद वितरण एवं भंडारा का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने अधिकाधिक श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील की है।
आयोजन समिति का सराहनीय योगदान
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के परमानन्द बड़ाइक, विकास कुमार सिंह, विजय प्रताप सिंह, लक्षमन बड़ाइक, दिलरखन राय, कृष्णा बड़ाइक, शखी राम बड़ाइक, रविन्द्र बड़ाइक, मनीष मांझी, बिनोद नायक, बिनोद नेगी, तारा देवी, सुषमा देवी, बिपिन बिहारी सिंह, संजय कुमार सिंह, फाल्गुन नायक, जहर सिंह, भुनेश्वर सिंह, रविन्द्र नाथ बड़ाईक, परशुराम बड़ाईक, रितेश बड़ाईक, बलिराम सिंह, सत्यनारायण सिंह, कमलेश बड़ाईक, संजय कुमार बड़ाईक, अजय बड़ाईक, अशोक बड़ाईक, दसरू बड़ाईक सहित अन्य ग्रामीणों का सक्रिय योगदान रहा।
ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान और सहयोग से आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
समसेरा बखरीटोली में आयोजित अष्टप्रहरी अखण्ड हरि कीर्तन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। गांव-गांव से श्रद्धालुओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि आस्था आज भी लोगों को जोड़ने का माध्यम है। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भक्ति के साथ जागरूक समाज की ओर
धार्मिक आयोजन हमें केवल पूजा-पाठ का संदेश नहीं देते, बल्कि अनुशासन, एकता और सेवा भावना भी सिखाते हैं। गांवों में इस तरह के सामूहिक कार्यक्रम सामाजिक बंधन को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।
आप भी ऐसे आयोजनों में भाग लेकर सामाजिक समरसता को बढ़ावा दें। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और सकारात्मक पहल को आगे बढ़ाने में सहभागी बनें।