गिरिडीह में प्रशिक्षण के दौरान सहायक शिक्षक की तबियत बिगड़ी: मौके पर मौत

गिरिडीह में प्रशिक्षण के दौरान सहायक शिक्षक की तबियत बिगड़ी: मौके पर मौत

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #शिक्षा : आईसीटी प्रशिक्षण के बीच सहदेव प्रसाद वर्मा का निधन, शिक्षा जगत में शोक की लहर
  • बिरनी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बंगरा खुर्द में हुआ हादसा।
  • सहायक शिक्षक सहदेव प्रसाद वर्मा की अचानक तबियत बिगड़ने से मौत।
  • मृतक शिक्षक उत्क्रमित मध्य विद्यालय झारखी में थे पदस्थापित।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनी ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित।
  • भाजपा नेता और सांसद प्रतिनिधियों ने जताया गहरा शोक।

गिरिडीह जिले से एक दुखद समाचार सामने आया है। बिरनी प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बंगरा खुर्द में शुक्रवार को चल रहे आईसीटी प्रशिक्षण के दौरान सहायक शिक्षक सहदेव प्रसाद वर्मा का अचानक निधन हो गया। दोपहर करीब 12 बजे प्रशिक्षण सत्र के बीच उनकी तबियत बिगड़ी और वे वहीं बेंच पर अचेत होकर गिर पड़े।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत

मौजूद शिक्षक तुरंत उन्हें आनन-फानन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनी लेकर पहुंचे। लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी अचानक हुई मौत से पूरा शिक्षा जगत शोक में डूब गया है। मृतक सहदेव प्रसाद वर्मा उत्क्रमित मध्य विद्यालय झारखी में पदस्थापित थे और अपने कार्य के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे।

शिक्षा जगत में शोक की लहर

सहयोगियों का कहना है कि वे एक शांत और जिम्मेदार शिक्षक थे। उनके निधन से विद्यालय परिवार सहित स्थानीय समुदाय को गहरा आघात पहुंचा है। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

नेताओं ने जताया शोक

भाजपा नेता एवं झारखी निवासी रामकृष्ण वर्मा ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

रामकृष्ण वर्मा: “उनके निधन से समाज को ऐसी क्षति हुई है जिसकी पूर्ति संभव नहीं है।”

वहीं मौके पर पहुंचे भाजपा नेता और सांसद प्रतिनिधि देवनाथ राणा तथा पूर्व मुखिया प्रेमचंद प्रसाद कुशवाहा ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की।

देवनाथ राणा और प्रेमचंद कुशवाहा ने कहा: “सहदेव प्रसाद वर्मा अपने कार्य के प्रति समर्पित थे और उनकी असमय मृत्यु से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा समुदाय शोकाकुल है।”

न्यूज़ देखो: शिक्षा जगत की अपूरणीय क्षति

सहदेव प्रसाद वर्मा का निधन सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा जगत की क्षति है। समर्पित शिक्षकों की कमी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि शिक्षकों का योगदान समाज की नींव है और उनके जाने से खालीपन लंबे समय तक महसूस होता रहेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जिम्मेदार नागरिकता का समय

सहदेव प्रसाद वर्मा की स्मृति में हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के प्रति हमारी जिम्मेदारी और बढ़े। अब समय है कि हम शिक्षक समाज की भूमिका को और मजबूत करें। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोगों में जागरूकता फैले।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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