
#मेदिनीनगर #मनरेगाबचाओसंग्राम : पलामू में एकदिवसीय उपवास और धरना देकर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध।
- मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत पलामू में कांग्रेस का एकदिवसीय उपवास एवं धरना।
- महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष नगर भवन में हुआ कार्यक्रम।
- जिलाध्यक्ष बिमला कुमारी ने मनरेगा को गरीबों का आत्मसम्मान बताया।
- बजट कटौती और भुगतान में देरी को गरीबों के अधिकारों पर हमला करार।
- कांग्रेस ने आंदोलन को सड़क से सदन तक ले जाने का संकल्प लिया।
केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा जैसी ऐतिहासिक जनकल्याणकारी योजना को कमजोर किए जाने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने पलामू जिले में जोरदार प्रदर्शन किया। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत शनिवार 11 जनवरी को पलामू जिला कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में मेदिनीनगर स्थित नगर भवन (टाउन हॉल) परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एकदिवसीय उपवास एवं धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पलामू कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिमला कुमारी ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
मनरेगा करोड़ों गरीबों के लिए सम्मान की गारंटी
धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष बिमला कुमारी ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के लिए रोज़गार, सुरक्षा और आत्मसम्मान की गारंटी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है, मजदूरी भुगतान में जानबूझकर देरी की जा रही है और योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है।
बिमला कुमारी ने कहा:
“मनरेगा पर चोट संविधान की आत्मा पर हमला है। यह योजना महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ी है और इसे कमजोर करना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना के खिलाफ है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।
भाजपा पर गरीब विरोधी होने का आरोप
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां गरीब, मजदूर और किसान विरोधी हैं। मनरेगा जैसी योजना, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और पलायन को रोका, आज उसी योजना को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरी भुगतान में महीनों की देरी से मजदूरों का भरोसा टूट रहा है और उनका जीवन प्रभावित हो रहा है।
आंदोलन रहेगा लगातार जारी
बिमला कुमारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” कोई एकदिवसीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह गरीबों और मजदूरों के हक की रक्षा का एक निरंतर चलने वाला आंदोलन है। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को गांव-गांव, सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ उठाएगी और जब तक मनरेगा को उसका अधिकार और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
धरना कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से सत्यानंद दुबे, चंद्रशेखर शुक्ला, रामाशीष पाण्डेय, विनोद तिवारी, श्याम नारायण सिंह, कामेश्वर तिवारी, ओमप्रकाश अमन, विश्राम दुबे, बिट्टू पाठक, मिथिलेश सिंह, मुकेश सिंह चंदेल, रामानंद पाठक, राजेश चौरसिया, गोपाल त्रिपाठी, गोपाल सिंह, शैलेश चंद्रवंशी, ईश्वरी प्रसाद सिंह, रंजन दुबे, रामचंद्र दीक्षित, नसीम खान, सुमन तिर्की, हेमंती लकड़ा, रेखा देवी, रेखा सिंह, सुमित्रा देवी, सीता देवी, राजमणि देवी, अनिल सिंह, रविन्द्र कुमार, अशोक सिंह, सितारे खां, रामप्रवेश सिंह, धनंजय पाठक, टिकैत कुमार, गुलाम नबी, अरविंद पाण्डेय, सुनील पाण्डेय, रिज़वान खान, राजेंद्र ओझा, राजेंद्र ठाकुर सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे।
गांधी की प्रतिमा के समक्ष दिया संघर्ष का संदेश
महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना देकर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मनरेगा केवल आर्थिक योजना नहीं, बल्कि गांधी के विचारों पर आधारित सामाजिक न्याय का प्रतीक है। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह गांधी ने अंतिम व्यक्ति तक न्याय की बात की थी, उसी तरह मनरेगा गांव के अंतिम मजदूर तक रोज़गार पहुंचाने का माध्यम है।
न्यूज़ देखो: मनरेगा बनाम केंद्र की नीतियां
मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है। झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में बजट कटौती और भुगतान में देरी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इन विरोध प्रदर्शनों के बाद क्या रुख अपनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
गरीबों के हक की इस लड़ाई में आप कहां खड़े हैं
मनरेगा जैसे कार्यक्रम ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं। यदि ये कमजोर होंगे, तो सबसे पहले असर गरीबों पर पड़ेगा। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और बताएं कि मनरेगा को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। आपकी आवाज़ बदलाव का आधार बन सकती है।





