News dekho specials
Simdega

बानो में आदिवासी एकता मंच का जागरूकता महा अधिवेशन 2026 संवैधानिक अधिकारों और ग्राम सभा सशक्तिकरण पर जोर

#बानो #आदिवासीमहाअधिवेशन : पहचान, अधिकार और ग्रामसभा सशक्तिकरण पर विस्तृत चर्चा हुई।

बानो में आदिवासी एकता मंच के तत्वावधान में आदिवासी जागरूकता महा अधिवेशन 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संवैधानिक अधिकार, पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य अतिथि ग्लैडसन डुंगडुंग और मुख्य वक्ता दयामनी बरला ने आदिवासी पहचान व ग्राम सभा की भूमिका को रेखांकित किया। विभिन्न गांवों के जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • आदिवासी एकता मंच बानो के तत्वावधान में भव्य अधिवेशन आयोजित।
  • ग्लैडसन डुंगडुंग ने पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून पर दी जानकारी।
  • दयामनी बरला ने आदिवासी पहचान और संगठन मजबूती पर दिया जोर।
  • कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य बिरजो कुंडलना सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल।
  • अध्यक्षता आनंद मशीह टोपनो, संचालन जगदीश बागे ने किया।

बानो में आयोजित आदिवासी जागरूकता महा अधिवेशन 2026 में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए मुखिया, पुरोहित, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और बुद्धिजीवियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और ग्राम सभा की शक्तियों के प्रति जागरूक करना था। वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को समुदाय की एकजुटता से जोड़ते हुए संगठनात्मक मजबूती पर बल दिया। अधिवेशन में सामाजिक मुद्दों, लैंगिक समानता और सामुदायिक चुनौतियों पर भी गंभीर विमर्श हुआ।

संवैधानिक अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका पर विस्तार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्लैडसन डुंगडुंग ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका प्रभावी उपयोग किए बिना आदिवासी समाज अपने संसाधनों की रक्षा नहीं कर सकता।

ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा: “भारतीय संविधान ने आदिवासियों को विशेष अधिकार दिए हैं, लेकिन इन अधिकारों का सही उपयोग तभी संभव है जब ग्राम सभा मजबूत और सक्रिय हो।”

उन्होंने पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकारों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की शक्ति समुदाय के हाथ में है। उनके अनुसार, ग्राम सभा को संगठित और जागरूक बनाकर ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

आदिवासी पहचान और संगठनात्मक मजबूती पर जोर

मुख्य वक्ता दयामनी बरला ने अपने संबोधन में आदिवासी और आदिवासियत की पहचान को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं, भाषा और सामुदायिक मूल्यों की रक्षा करना समय की मांग है।

दयामनी बरला ने कहा: “आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होना होगा, तभी हम अपनी पहचान सुरक्षित रख पाएंगे।”

उन्होंने आदिवासी संगठनों की वर्तमान कमजोरियों पर भी चर्चा की और संगठन को अधिक प्रभावी और एकजुट बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने सामुदायिक समस्याओं, सामाजिक असमानता और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।

News dekho specials

स्वागत भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुति

कार्यक्रम का स्वागत भाषण कृपा हेमरोम ने दिया। उन्होंने अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए अधिवेशन के उद्देश्य को स्पष्ट किया। मंच के अध्यक्ष आनन्द मसीह ने कार्यक्रम के दौरान आदिवासी गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भी जोड़ा, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।

संगठन के पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका

अधिवेशन की अध्यक्षता आनंद मशीह टोपनो ने की, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी जगदीश बागे ने निभाई। आयोजन को सफल बनाने में मंच के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सचिव अनूप मिंज, उपसचिव जगदीश बागे एवं एलायजर कुंडलना, उपाध्यक्ष सुधीर लुगुन, सोमारी कैथवार और अंटोनी सुरीन, तथा कोषाध्यक्ष प्रमोद लुगुन ने कार्यक्रम की रूपरेखा से लेकर व्यवस्थाओं तक सक्रिय योगदान दिया।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी

कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य बिरजो कुंडलना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा कृपा हेंब्रोम, विलकन बर्गरेला, कोनसोदे मुखिया सीता कुमारी, सोय मुखिया सोमारी कैथवार, अभिषेक बागे, हर्षित सांगा सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

विभिन्न गांवों के मुखिया, पुरोहित और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि क्षेत्र में आदिवासी अधिकारों और सामाजिक मुद्दों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। अधिवेशन में उपस्थित युवाओं ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

सामुदायिक मुद्दों पर खुली चर्चा

अधिवेशन के दौरान सामुदायिक समस्याओं, सामाजिक असमानता, संगठनात्मक चुनौतियों और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज को अपनी आंतरिक एकता को मजबूत करना होगा ताकि बाहरी चुनौतियों का सामना सामूहिक रूप से किया जा सके।

न्यूज़ देखो: अधिकारों की जानकारी से ही मजबूत होगी ग्राम सभा

बानो में आयोजित यह महा अधिवेशन यह स्पष्ट संकेत देता है कि आदिवासी समाज अब अपने संवैधानिक अधिकारों और पहचान को लेकर अधिक सजग हो रहा है। ग्राम सभा की भूमिका और पेसा कानून की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाना समय की जरूरत है। यह भी देखना होगा कि इस जागरूकता को व्यवहारिक स्तर पर कैसे लागू किया जाता है और संगठनात्मक मजबूती किस दिशा में आगे बढ़ती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूकता से सशक्तिकरण की ओर बढ़ता कदम

जब समाज अपने अधिकारों को समझता है, तभी वह सशक्त बनता है। बानो का यह अधिवेशन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामुदायिक चेतना का प्रतीक है।

जरूरत है कि हर गांव में ग्राम सभा सक्रिय हो, युवा आगे आएं और महिलाएं नेतृत्व में भागीदारी निभाएं।

आप भी अपने गांव और समाज की बैठकों में शामिल हों, अधिकारों की जानकारी साझा करें और सकारात्मक बदलाव की पहल करें।

अपनी राय कमेंट में लिखें, इस खबर को अपने साथियों तक पहुंचाएं और जागरूकता की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में भागीदार बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 3 / 5. कुल वोट: 1

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: