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तीसीबार पंचायत में मनरेगा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीणों को रोजगार अधिकारों की दी गई जानकारी

#पांडू #मनरेगा_दिवस : तीसीबार पंचायत में मनरेगा के उद्देश्यों और उपलब्धियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

पलामू जिले के पांडू प्रखंड अंतर्गत तीसीबार पंचायत में 2 फरवरी को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मनरेगा दिवस जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रावधानों, अधिकारों और लाभों की जानकारी दी गई। रोजगार सेवक फैय्याज ने पंचायत में चल रहे कार्यों और रोजगार सृजन की स्थिति पर प्रकाश डाला। इस आयोजन का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके कानूनी रोजगार अधिकारों के प्रति सजग बनाना रहा।

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  • तीसीबार पंचायत में 2 फरवरी को मनरेगा दिवस का आयोजन।
  • ग्रामीणों को मनरेगा के अधिकार, उद्देश्य और लाभ की जानकारी दी गई।
  • रोजगार सेवक फैय्याज ने पंचायत में कार्यों की स्थिति साझा की।
  • ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्धता पर भरोसा दिलाया गया।
  • कार्यक्रम में जागरूकता और सहभागिता पर विशेष जोर।

पलामू जिले के पांडू प्रखंड की तीसीबार पंचायत में मनरेगा दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 2 फरवरी को आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को मनरेगा योजना के तहत मिलने वाले रोजगार के अधिकारों, मजदूरी, कार्य की मांग प्रक्रिया और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम के दौरान यह बताया गया कि मनरेगा केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों को सम्मानजनक आजीविका और आर्थिक सुरक्षा देने का एक महत्वपूर्ण कानून है। वक्ताओं ने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर विकास को गति देने का प्रयास किया जाता है।

मनरेगा के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा

जागरूकता कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत प्रत्येक पंजीकृत परिवार को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिनों का रोजगार देने की गारंटी है। यदि समय पर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है।

कार्यक्रम में यह भी समझाया गया कि मनरेगा के अंतर्गत जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, भूमि सुधार जैसे कार्यों से न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि गांव के स्थायी विकास में भी मदद मिलती है। ग्रामीणों को अपने जॉब कार्ड, मजदूरी भुगतान और कार्यस्थल से जुड़ी शिकायतों को दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।

रोजगार सेवक फैय्याज का बयान

इस अवसर पर तीसीबार पंचायत के रोजगार सेवक फैय्याज ने पंचायत में चल रहे मनरेगा कार्यों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंचायत में मनरेगा के तहत काम संतोषजनक रूप से चल रहा है और इससे ग्रामीणों को नियमित रोजगार मिल रहा है।

रोजगार सेवक फैय्याज ने कहा: “तीसीबार पंचायत में मनरेगा का काम बहुत अच्छी तरह चल रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उन्हें बाहर पलायन नहीं करना पड़ रहा है।”

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे मनरेगा के तहत अधिक से अधिक कार्य की मांग करें और योजना का पूरा लाभ उठाएं। साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत निवारण प्रणाली की अहमियत भी बताई।

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ग्रामीणों की भागीदारी और प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों ने मनरेगा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कई ग्रामीणों ने कहा कि इस योजना से उन्हें अपने गांव में ही काम मिलने लगा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। कुछ ग्रामीणों ने मजदूरी भुगतान में देरी और काम की उपलब्धता को लेकर सवाल भी उठाए, जिनका मौके पर समाधान करने का प्रयास किया गया।

ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि वे पंचायत स्तर पर अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकते हैं, ताकि योजना के क्रियान्वयन में सुधार किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान जागरूकता पर्चे भी वितरित किए गए।

ग्रामीण विकास में मनरेगा की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। तीसीबार पंचायत जैसे क्षेत्रों में यह योजना न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देती है। मनरेगा दिवस जैसे आयोजन ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे मनरेगा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना पंचायत या संबंधित अधिकारियों को दें।

न्यूज़ देखो: जागरूकता से मजबूत होगा ग्रामीण रोजगार

तीसीबार पंचायत में मनरेगा दिवस का आयोजन यह दिखाता है कि जागरूकता के माध्यम से योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ग्रामीणों को अधिकारों की जानकारी मिलने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। हालांकि यह भी जरूरी है कि काम और भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मनरेगा की सफलता प्रशासन और जनता की संयुक्त भागीदारी पर निर्भर करती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक बनें, अधिकार पहचानें

मनरेगा जैसे कानून ग्रामीणों को सशक्त बनाने का माध्यम हैं। अपने अधिकारों को जानना और उनका उपयोग करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं और योजनाओं पर नजर रखें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और ग्रामीण जागरूकता को मजबूत बनाने में सहयोग करें।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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