
#सिमडेगा #महिला_सशक्तिकरण : टापूडेगा गांव में कार्यक्रम कर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान का समापन किया गया।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत मरोमड़ेगा पंचायत के टापूडेगा गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्था छोटानागपुर कल्याण निकेतन, सिमडेगा द्वारा किया गया, जिसमें 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के जागरूकता अभियान का समापन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और ग्रामीणों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण और बाल विवाह उन्मूलन का संदेश दिया। मुख्य अतिथि प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
- टापूडेगा गांव, मरोमड़ेगा पंचायत में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
- छोटानागपुर कल्याण निकेतन, सिमडेगा द्वारा 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का समापन।
- कार्यक्रम में प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज मुख्य अतिथि के रूप में रहे उपस्थित।
- बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां, किशोरियां और ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल।
- दीप प्रज्वलन कर अतिथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत की और महिलाओं को किया प्रेरित।
- कार्यक्रम के अंत में बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत मरोमड़ेगा पंचायत के टापूडेगा गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन संस्था छोटानागपुर कल्याण निकेतन, सिमडेगा द्वारा किया गया, जिसमें महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के विषय पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ही 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत चलाए गए जागरूकता अभियान का समापन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों, किशोरियों और ग्रामीणों ने भाग लेकर समाज में जागरूकता का संदेश दिया।
दीप प्रज्वलन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि ठेठईटांगर प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज, टापूडेगा ग्राम प्रधान, मरोमड़ेगा ग्राम प्रधान, तथा संस्था छोटानागपुर कल्याण निकेतन की सचिव प्रियंका सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने महिलाओं को उनके अधिकारों, सामाजिक भूमिका और समाज में उनके महत्व के बारे में प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र की महिलाओं, युवतियों और किशोरियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सभी ने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के महत्व को समझते हुए सक्रिय भागीदारी निभाई।
100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का समापन
कार्यक्रम के दौरान संस्था की सचिव प्रियंका सिंह ने 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत किए गए कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले 100 दिनों के दौरान विभिन्न गांवों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम, संवाद और सामुदायिक बैठकों का आयोजन किया गया, ताकि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त किया जा सके।
प्रियंका सिंह ने कहा: “हमारा उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई ही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही हम इस कुरीति को समाप्त कर सकते हैं।”
उन्होंने बताया कि संस्था लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और किशोरियों के अधिकारों को लेकर काम कर रही है और आने वाले समय में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
महिला दिवस के महत्व पर वक्ताओं ने रखे विचार
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में महिला दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, सम्मान, समान अवसर और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के बिना किसी भी समाज और राष्ट्र का समुचित विकास संभव नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी समाज को मजबूत और प्रगतिशील बनाती है।
प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने दिया प्रेरणादायक संदेश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने महिलाओं और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
बिपिन पंकज मिंज ने कहा: “आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी बेटियाँ शिक्षित हों, सुरक्षित हों और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अवसर मिले। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और समाज से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने में सहयोग करें।
संघर्ष की कहानी सुनाकर महिला ने किया प्रेरित
कार्यक्रम के दौरान एक महिला को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों की कहानी सभी के सामने साझा की और बताया कि संस्था छोटानागपुर कल्याण निकेतन के सहयोग से आज वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।
उन्होंने बताया कि पहले उनके सामने कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन संस्था के सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने अपने जीवन में बदलाव लाया और आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनकी कहानी ने उपस्थित महिलाओं और युवतियों को काफी प्रेरित किया।
कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान निरोज बा, शांति देवी, राखी देवी, सुमंती कीड़ो, रिंकी देवी और स्कोलॉस्टिका कुल्लू सहित कई महिलाओं ने अपने विचार साझा किए और शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक समानता के महत्व पर जोर दिया।
महिलाओं ने कहा कि समाज में बदलाव तभी संभव है जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक हों। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने और बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए काम करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर शकुंतला सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और ग्रामीणों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने गांव और समाज को बाल विवाह मुक्त बनाने तथा महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी और जागरूकता ने कार्यक्रम को और भी प्रेरणादायक बना दिया।
न्यूज़ देखो: जागरूक समाज ही खत्म कर सकता है बाल विवाह जैसी कुरीतियां
टापूडेगा गांव में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण समाज में जागरूकता की एक मजबूत पहल भी है। महिलाओं और किशोरियों की बड़ी भागीदारी इस बात का संकेत देती है कि अब समाज धीरे-धीरे बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। ऐसे प्रयासों से ही एक सुरक्षित और समान अवसर वाला समाज बनाया जा सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बदलाव की राह पर बढ़ते कदम समाज को देंगे नई दिशा
महिला सशक्तिकरण केवल एक दिन का विषय नहीं, बल्कि समाज के सतत विकास की आधारशिला है। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक होंगी, तभी परिवार और समाज दोनों मजबूत बनेंगे। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
अगर आपके गांव या क्षेत्र में भी इस तरह की सामाजिक पहल हो रही है, तो उसमें सक्रिय रूप से भाग लें। जागरूक बनें, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा दें और समाज में समानता का संदेश फैलाएं।






