
#सिमडेगा #पर्यावरण_जागरूकता : शून्य अपशिष्ट दिवस पर खाद्य संरक्षण का संदेश दिया गया।
सिमडेगा के सेंट जेवियर्स कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में “शून्य खाद्य अपशिष्ट” विषय पर छात्रों और शिक्षकों ने चर्चा की। इसमें खाद्य अपशिष्ट के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डाला गया। आयोजन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
- सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में शून्य अपशिष्ट दिवस मनाया गया।
- भूगोल विभाग द्वारा “शून्य खाद्य अपशिष्ट” विषय पर आयोजन।
- छात्रों ने खाद्य अपशिष्ट के दुष्परिणामों पर प्रस्तुति दी।
- कार्यक्रम में इंटरएक्टिव प्रश्नावली और संवाद सत्र आयोजित।
- छात्रों को सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
सिमडेगा स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज के भूगोल विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “शून्य खाद्य अपशिष्ट” था, जिसके माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को खाद्य अपशिष्ट की बढ़ती समस्या और उसके प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई और इसे सफलतापूर्वक संचालित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत और विषय परिचय
कार्यक्रम की शुरुआत छात्र आकाश बराइक द्वारा की गई, जिन्होंने विषय का परिचय देते हुए खाद्य अपशिष्ट को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आकाश बराइक ने कहा: “खाद्य अपशिष्ट को कम करना हमारी जिम्मेदारी है, जिससे पर्यावरण और समाज दोनों को लाभ मिल सकता है।”
वैश्विक महत्व पर प्रस्तुति
छात्रा संध्या सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस के महत्व और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने सतत उपभोग और संसाधनों के बेहतर उपयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
खाद्य अपशिष्ट के दुष्परिणामों पर चर्चा
प्रदीप केरकेट्टा ने खाद्य अपशिष्ट के पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भोजन की बर्बादी न केवल संसाधनों की हानि है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है।
प्रदीप केरकेट्टा ने कहा: “भोजन की बर्बादी से प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और यह जलवायु परिवर्तन को भी प्रभावित करता है।”
संवादात्मक सत्र ने बढ़ाई भागीदारी
कार्यक्रम में सुष्मिता ज़ेस द्वारा आयोजित इंटरएक्टिव प्रश्नावली सत्र ने छात्रों की भागीदारी को बढ़ाया। इस सत्र के माध्यम से छात्रों की जागरूकता का आकलन किया गया और उन्हें विषय से जोड़ने का प्रयास किया गया।
विभागाध्यक्ष का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर विभागाध्यक्ष सहायक प्रोफेसर हेम्ब्रोम मार्सेल ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और जिम्मेदार उपभोग की आदतें अपनाने की अपील की।
हेम्ब्रोम मार्सेल ने कहा: “छोटे-छोटे बदलाव से हम खाद्य अपशिष्ट को कम कर सकते हैं और एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।”
छात्रों में बढ़ी जागरूकता
इस आयोजन के माध्यम से छात्रों में खाद्य अपशिष्ट के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्हें अपने दैनिक जीवन में भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए प्रेरित किया गया।
टिकाऊ जीवनशैली की ओर कदम
यह कार्यक्रम छात्रों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की दिशा में प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।
न्यूज़ देखो: छोटी आदतें, बड़ा बदलाव
सिमडेगा के इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि खाद्य अपशिष्ट जैसी समस्या को केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जागरूकता से भी कम किया जा सकता है। यदि छात्र स्तर पर यह समझ विकसित होती है, तो भविष्य में बड़े बदलाव संभव हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भोजन का सम्मान करें, भविष्य संवारें
भोजन केवल जरूरत नहीं, बल्कि संसाधनों का सम्मान भी है।
जरूरी है कि हम उतना ही लें जितना खा सकें और बर्बादी से बचें।
छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
आइए, हम सब मिलकर शून्य अपशिष्ट की दिशा में कदम बढ़ाएं।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस महत्वपूर्ण संदेश को आगे बढ़ाएं।






