#बानोप्रखंड #आयुषस्वास्थ्य_शिविर : जराकेल और पबुड़ा पंचायत में आयोजित शिविरों में 275 मरीजों की जांच कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण — योग और आयुष पद्धति अपनाने की अपील
- जराकेल पंचायत में शिविर का उद्घाटन जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभद्रा कुमारी ने किया।
- जराकेल शिविर में 183 मरीजों की जांच कर निःशुल्क दवा वितरण।
- डॉ जावेद आलम ने दवाइयों के उपयोग और परहेज की दी जानकारी।
- पबुड़ा राजस्व ग्राम में आयोजित शिविर में 92 मरीजों का उपचार।
- पबुड़ा में डॉ इरफान आलम द्वारा जांच, ग्रामीणों के बीच औषधीय पौधों का वितरण।
बानो प्रखंड के जराकेल एवं पबुड़ा पंचायत में आयुष ग्राम स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर ग्रामीणों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। दोनों स्थानों पर शिविर का उद्घाटन जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभद्रा कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। शिविरों में कुल 275 मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर दवाइयों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान आयुष पद्धति, योग और प्राकृतिक उपचार पद्धति को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जराकेल पंचायत में आयुष शिविर का आयोजन
बानो प्रखंड के जराकेल पंचायत में आयोजित आयुष ग्राम स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभद्रा कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए आयुष चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
डॉ सुभद्रा कुमारी ने कहा: “सिमडेगा जिला के कई दूर-दराज के गांवों के लोगों को समय पर दवाई उपलब्ध नहीं हो पाती है। इसी वजह से आपके पंचायत में यह स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया है। शिविर का अधिक से अधिक लाभ लें और आयुष उपचार अपनाएं।”
उन्होंने विशेष रूप से गठिया रोग, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द सहित अन्य दीर्घकालिक रोगों के उपचार के लिए शिविर में पहुंचने की अपील की। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करने की सलाह दी।
डॉ सुभद्रा कुमारी ने कहा: “अपने जीवन में योग को समय दें। यहां योग के जानकार उपस्थित हैं, उनसे अवश्य जानकारी लें।”
183 मरीजों की जांच और निःशुल्क दवा वितरण
जराकेल शिविर में कुल 183 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठाया।
शिविर में डॉ जावेद आलम ने मरीजों को दवाइयों के सही उपयोग और आवश्यक परहेज के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ जावेद आलम ने कहा: “दवाइयों का नियमित और सही तरीके से सेवन करें तथा बताए गए परहेज का पालन करें, तभी उपचार का पूरा लाभ मिलेगा।”
इस अवसर पर बड़ा बाबू मीरा कुमारी, अरबिंद विश्वकर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
पबुड़ा पंचायत में भी लगा आयुष स्वास्थ्य शिविर
उधर पबुड़ा पंचायत स्थित राजस्व ग्राम पबुड़ा में भी आयुष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यहां भी शिविर का उद्घाटन जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभद्रा कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धति के महत्व पर प्रकाश डाला और लोगों से संकोच छोड़कर शिविर का लाभ लेने की अपील की।
डॉ सुभद्रा कुमारी ने कहा: “इस तरह के शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुलभ और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। संकोच न करें, आयुष उपचार का लाभ लें।”
92 मरीजों का उपचार, औषधीय पौधों का वितरण
पबुड़ा स्वास्थ्य शिविर में कुल 92 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। शिविर में डॉ इरफान आलम ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक दवाएं दीं।
इसके साथ ही ग्रामीणों के बीच औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया, ताकि लोग घरेलू स्तर पर भी आयुष पद्धति का लाभ उठा सकें। औषधीय पौधों के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर डॉ इरफान आलम, फ़ा बेंजामिन केरकेट्टा, सहिया कांति टेटे, कलावती देवी, सरस्वती देवी, पुतुल देवी, योग शिक्षक दिनेश देहरी, संध्या कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बानो प्रखंड के जराकेल और पबुड़ा में आयोजित इन शिविरों ने यह साबित किया कि आयुष पद्धति ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। जहां प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है, वहां ऐसे शिविर लोगों के लिए राहत का माध्यम बनते हैं।
विशेष रूप से गठिया, जोड़ों के दर्द और कमर दर्द जैसी समस्याएं ग्रामीणों में आम हैं। ऐसे में आयुष आधारित उपचार और योग के माध्यम से दीर्घकालिक लाभ संभव है। जिला आयुष विभाग की यह पहल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
न्यूज़ देखो: गांव-गांव तक स्वास्थ्य पहुंचाने की पहल
जराकेल और पबुड़ा में आयोजित आयुष स्वास्थ्य शिविर यह दर्शाते हैं कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो दूरदराज के गांवों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। 275 मरीजों की जांच और निःशुल्क दवा वितरण इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीणों को ऐसी सुविधाओं की सख्त जरूरत है। आयुष विभाग की यह पहल सराहनीय है, लेकिन जरूरी है कि ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित हों ताकि लोगों को निरंतर लाभ मिलता रहे।
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स्वस्थ गांव ही मजबूत समाज की नींव
स्वास्थ्य केवल अस्पतालों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि हमारी जीवनशैली, खानपान और जागरूकता पर भी आधारित है। योग, आयुष उपचार और नियमित जांच को अपनाकर हम कई बीमारियों से बच सकते हैं।
यदि आपके क्षेत्र में भी स्वास्थ्य शिविर आयोजित हो रहा है, तो अवश्य भाग लें और दूसरों को भी प्रेरित करें। गांव-गांव में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
अपने परिवार और पड़ोसियों को ऐसे शिविरों की जानकारी दें, ताकि कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे।