Ranchi

डीएवी राष्ट्रीय खेलों में खलारी के आयुष्मान और अनीश ने रचा इतिहास अंडर 14 वॉलीबॉल में झारखंड को दिलाया स्वर्ण पदक

#खलारी #रांची : हैदराबाद में आयोजित डीएवी राष्ट्रीय खेलों में डीएवी खलारी के दो छात्रों ने शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित डीएवी राष्ट्रीय खेल 2025-26 में झारखंड की अंडर-14 बालक वर्ग वॉलीबॉल टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक जीत में डीएवी पब्लिक स्कूल, खलारी के आयुष्मान उपाध्याय और अनीश कुमार की अहम भूमिका रही। दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि झारखंड के स्कूली खेल इतिहास में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

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  • डीएवी राष्ट्रीय खेल 2025-26 का आयोजन 6 से 8 जनवरी 2026 तक।
  • इंडोर स्टेडियम, सिकंदराबाद (हैदराबाद) में हुई प्रतियोगिता।
  • अंडर-14 बालक वर्ग वॉलीबॉल में झारखंड को स्वर्ण पदक।
  • डीएवी खलारी के आयुष्मान उपाध्याय और अनीश कुमार विजेता टीम में शामिल।
  • ₹5100 छात्रवृत्ति और 50 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी की घोषणा।

डीएवी कॉलेज एंड मैनेजिंग कमेटी के तत्वावधान में आयोजित डीएवी राष्ट्रीय खेल 2025-26 ने इस वर्ष कई उभरते खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। 6 से 8 जनवरी 2026 तक तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के डीएवी विद्यालयों की टीमों ने भाग लिया। इसी प्रतियोगिता में झारखंड प्रदेश की अंडर-14 बालक वर्ग वॉलीबॉल टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

डीएवी खलारी के दो सितारों ने बढ़ाया मान

इस स्वर्णिम सफलता में डीएवी पब्लिक स्कूल, खलारी के दो होनहार विद्यार्थियों — आयुष्मान उपाध्याय (कक्षा 7) और अनीश कुमार (कक्षा 8) — ने निर्णायक भूमिका निभाई। दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार तालमेल, तकनीकी दक्षता और अनुशासन का परिचय दिया।

टीम के महत्वपूर्ण मुकाबलों में आयुष्मान की तेज सर्विस और अनीश की मजबूत डिफेंस ने विपक्षी टीमों को दबाव में रखा। कोचों और खेल विशेषज्ञों ने भी दोनों खिलाड़ियों के खेल को संतुलित और परिपक्व बताया।

अनुशासन और समर्पण बना जीत की कुंजी

पूरे टूर्नामेंट में झारखंड की टीम ने एकजुट होकर खेलते हुए हर मुकाबले में आत्मविश्वास दिखाया। टीम प्रबंधन के अनुसार, नियमित अभ्यास, फिटनेस पर ध्यान और रणनीतिक तैयारी ने इस जीत की नींव रखी। आयुष्मान और अनीश ने न केवल तकनीकी रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को साबित किया।

प्राचार्य ने दी बधाई और प्रोत्साहन

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने दोनों विद्यार्थियों को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा:

डॉ. कमलेश कुमार ने कहा: “यह हमारे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। आयुष्मान उपाध्याय और अनीश कुमार ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। डीएवी कॉलेज एंड मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली द्वारा दोनों छात्रों को ₹5100 की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है और 50 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफ की गई है।”

उन्होंने आगे जानकारी दी कि डीएवी राष्ट्रीय खेल भारत सरकार के खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय से पंजीकृत हैं, जिससे इस प्रतियोगिता की राष्ट्रीय मान्यता और भी बढ़ जाती है।

एसजीएफआई के लिए सीधे क्वालीफाई

इस स्वर्ण पदक के साथ ही आयुष्मान उपाध्याय और अनीश कुमार ने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। यह उपलब्धि भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का रास्ता खोलती है।

प्राचार्य ने विद्यालय के खेल शिक्षकों और कोचिंग स्टाफ को भी इस सफलता का श्रेय देते हुए उनके समर्पण की सराहना की।

बालिका टीम का भी सराहनीय प्रदर्शन

विद्यालय की बालिका वॉलीबॉल टीम भी इन दिनों नोएडा में आयोजित प्रतियोगिता में भाग ले रही है। जानकारी के अनुसार, बालिका टीम ने अपने प्रारंभिक मुकाबले जीतकर शानदार शुरुआत की है और आगे भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।

झारखंड में स्कूली खेलों को मिली नई ऊर्जा

इस जीत को झारखंड में स्कूली खेलों के लिए नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह विद्यालय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को मंच और प्रोत्साहन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में राज्य से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभर सकते हैं।

न्यूज़ देखो: प्रतिभा, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन का परिणाम

डीएवी राष्ट्रीय खेलों में खलारी के छात्रों की यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणास्रोत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेल से संवरता भविष्य

खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन और आत्मविश्वास गढ़ने की प्रक्रिया है।
आयुष्मान और अनीश की सफलता हजारों छात्रों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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