डुमरी के करियारी में बाबा साहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई, नेताओं ने दी समानता और शिक्षा का संदेश

डुमरी के करियारी में बाबा साहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई, नेताओं ने दी समानता और शिक्षा का संदेश

author Surendra Verma
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#डुमरीगिरिडीह #अंबेडकरजयंती : करियारी में श्रद्धांजलि सभा के साथ विचारों को अपनाने का आह्वान किया गया।

गिरिडीह जिले के डुमरी विधानसभा क्षेत्र के करियारी में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। झारखंड मूल निवासी परिसंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो और उपाध्यक्ष भगतु रविदास ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर समानता, न्याय और शिक्षा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।

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  • करियारी, डुमरी गिरिडीह में मनाई गई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती
  • आयोजन झारखंड मूल निवासी परिसंघ द्वारा किया गया।
  • गंगाधर महतो और भगतु रविदास ने पुष्पांजलि अर्पित की।
  • कार्यक्रम में समानता, न्याय और शिक्षा के विचारों पर जोर।
  • बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी रही।

गिरिडीह जिले के डुमरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत करियारी में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान बाबा साहेब के विचारों और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

झारखंड मूल निवासी परिसंघ द्वारा किया गया आयोजन

इस कार्यक्रम का आयोजन झारखंड मूल निवासी परिसंघ द्वारा किया गया था, जिसमें क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य बाबा साहेब के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना और उनके सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम स्थल पर बाबा साहेब की प्रतिमा या चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। पूरे वातावरण में सम्मान और सामाजिक जागरूकता का भाव देखने को मिला।

नेताओं ने दी श्रद्धांजलि और रखा विचार

इस अवसर पर झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो और केंद्रीय उपाध्यक्ष भगतु रविदास उर्फ रवि कुमार ने विशेष रूप से भाग लिया। दोनों नेताओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

गंगाधर महतो ने कहा: “बाबा साहेब के विचार—समानता, न्याय और शिक्षा—आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में बदलाव लाना होगा।”

भगतु रविदास उर्फ रवि कुमार ने कहा: “डॉ. अंबेडकर ने समाज के वंचित वर्गों के लिए जो संघर्ष किया, वह हम सभी के लिए प्रेरणा है। हमें उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।”

दोनों नेताओं ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे बाबा साहेब के आदर्शों को अपनाएं और समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा दें।

स्थानीय लोगों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे सामाजिक भेदभाव को खत्म करने और शिक्षा के प्रसार के लिए काम करेंगे। कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी भी इन मूल्यों को समझ रही है।

सामाजिक संदेश और जागरूकता का मंच बना कार्यक्रम

यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण मंच बना। वक्ताओं ने समाज में समान अवसर, शिक्षा और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।

बाबा साहेब के विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताते हुए यह कहा गया कि जब तक समाज में समानता नहीं आएगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा।

न्यूज़ देखो: विचारों को अपनाने से ही सच्ची श्रद्धांजलि

करियारी में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी समाज के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। केवल जयंती मनाने से नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों को अपनाने से ही सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोगों को सही दिशा मिलती है। अब सवाल यह है कि क्या इन विचारों को व्यवहार में भी उतारा जाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बाबा साहेब के विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लें

समानता, शिक्षा और न्याय—ये केवल शब्द नहीं, बल्कि एक मजबूत समाज की नींव हैं। बाबा साहेब ने जिस समाज का सपना देखा था, उसे साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

अपने आसपास भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं और शिक्षा को बढ़ावा दें। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए छोटे-छोटे कदम भी बड़ा असर डालते हैं।

आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि बदलाव की शुरुआत हम खुद से कर सकते हैं।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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