
#गिरिडीह #फैक्ट्री_विवाद : मजदूरों को बिना नोटिस हटाने, प्रदूषण और फर्जी मुकदमों के आरोप पर जांच की मांग उठी।
गिरिडीह में मेसर्स बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री को लेकर मजदूर शोषण, प्रदूषण और फर्जी मुकदमों का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। 14 मार्च को निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने इन मुद्दों पर आवाज उठाते हुए प्रशासन से जल्द जांच की मांग की। असंगठित मजदूर मोर्चा और माले नेताओं का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के साथ अन्याय कर रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
- निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने 14 मार्च को बालमुकुंद फैक्ट्री विवाद पर जांच की मांग उठाई।
- मेसर्स बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री प्राइवेट लिमिटेड पर मजदूर शोषण और प्रदूषण फैलाने के आरोप।
- असंगठित मजदूर मोर्चा और किसान नेताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों का भी मुद्दा उठाया गया।
- मजदूरों से 12 घंटे काम करवाने और शिकायत करने वालों को नौकरी से निकालने का आरोप।
- 75 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों की नियुक्ति राज्य सरकार की नीति लागू करने की मांग।
गिरिडीह में औद्योगिक इकाइयों के संचालन और मजदूरों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री पर मजदूरों के शोषण, प्रदूषण फैलाने और आंदोलन करने वालों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने के आरोप लगाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने प्रशासन से जल्द जांच कराने की मांग की है। माले नेताओं और असंगठित मजदूर मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विधायक अरूप चटर्जी ने उठाया मुद्दा
निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने 14 मार्च को बालमुकुंद फैक्ट्री से जुड़े विवादित मामलों पर आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि मजदूरों को बिना नोटिस नौकरी से हटाना, प्रदूषण फैलाना और आंदोलनकारी नेताओं पर मुकदमा दर्ज करना गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि असंगठित मजदूर मोर्चा और किसान नेताओं ने लगातार प्रशासन को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
माले नेताओं ने प्रेस को दी जानकारी
इस पूरे मामले की जानकारी माले नेता राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने प्रेस को दी। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के प्रति उदासीन रवैया अपनाता है और मजदूरों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद मजदूरों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
मजदूरों से 12 घंटे काम कराने का आरोप
असंगठित मजदूर मोर्चा के नेताओं का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों से निर्धारित समय से अधिक काम करवाता है।
संगठन के अनुसार कई मजदूरों को 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। जो मजदूर इसका विरोध करते हैं या शिकायत करते हैं उन्हें तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाता है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री में काम के दौरान दुर्घटना में किसी मजदूर की मौत होने पर उसके परिवार को मुआवजा देने में भी अनावश्यक देरी की जाती है।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के साथ अन्याय कर रहा है। मजदूरों को डराकर उनसे ज्यादा काम कराया जाता है और शिकायत करने पर नौकरी से निकाल दिया जाता है।”
प्रदूषण को लेकर भी उठे सवाल
माले नेताओं ने आरोप लगाया कि बालमुकुंद फैक्ट्री के अलावा क्षेत्र की कई अन्य फैक्ट्रियां भी प्रदूषण मानकों का सही तरीके से पालन नहीं कर रही हैं।
उनका कहना है कि इस मामले की जानकारी कई बार उच्च अधिकारियों को दी गई, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन अपनी सफाई देकर मामले को टाल देता है। ऐसे में प्रशासनिक जांच और जन आंदोलन के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने की मांग
संगठन ने राज्य सरकार की नीति का हवाला देते हुए कहा कि औद्योगिक इकाइयों में कम से कम 75 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों को रोजगार देना अनिवार्य है।
माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि इस नीति का पालन नहीं किया जा रहा है और कई फैक्ट्रियां बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता दे रही हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा: “अगर कोई फैक्ट्री 75 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं देती है तो इसके लिए सरकार भी जिम्मेदार है, क्योंकि प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं करता।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन आंदोलन करने वालों पर प्रशासनिक दबाव बनाने की कोशिश करता है और कई ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।
पिकेट थाना की भूमिका पर भी सवाल
राजेश सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि पिकेट थाना के प्रभारी फैक्ट्री प्रबंधन के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो पिकेट थाना के सामने भी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलन की चेतावनी
माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के नेताओं मसूदन कोल, किशोर राय, भीम कोल, लखन कोल, पवन यादव और नवीन पांडेय ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन जारी रहेगा।
संगठन के नेताओं ने कहा: “फैक्ट्री प्रबंधन जितने भी फर्जी मुकदमे करेगा, हम सभी मामलों की न्यायालय से जांच करवाएंगे। हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है।”
संगठन की आगे की रणनीति
गिरिडीह और गांडेय के प्रभारी पूरन महतो ने कहा कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया जा रहा है। जल्द ही गिरिडीह में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
वहीं जिला सचिव अशोक पासवान ने कहा कि पार्टी लगातार जनता के मुद्दों पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अन्याय के खिलाफ जनता के साथ खड़ी रहेगी।
अशोक पासवान ने कहा: “जनता के सवालों पर हम हमेशा जनता के साथ हैं और पार्टी के साथी खुलकर गलत कार्यों का विरोध करें।”
न्यूज़ देखो: उद्योग और मजदूर अधिकार के बीच संतुलन जरूरी
गिरिडीह जैसे औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों की भूमिका आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ मजदूरों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर मजदूर शोषण और प्रदूषण के आरोप सही हैं तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि उद्योग और श्रमिकों के बीच संतुलित व्यवस्था बने ताकि विकास और न्याय दोनों साथ चल सकें।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों की आवाज ही लोकतंत्र की ताकत
किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब मजदूरों को सम्मान और न्याय मिले। उद्योगों का विकास जरूरी है, लेकिन मजदूरों के अधिकारों की कीमत पर नहीं।
अगर किसी क्षेत्र में मजदूरों की समस्याएं उठ रही हैं तो प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें गंभीरता से सुना जाए।
आइए हम सब मिलकर एक ऐसे समाज की दिशा में कदम बढ़ाएं जहां विकास के साथ न्याय भी सुनिश्चित हो।
इस मुद्दे पर आप अपनी राय जरूर दें, खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।





