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बगोदर प्रखंड सभागार में गूंजा ‘बन्दे मातरम्’: राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पर अधिकारियों और कर्मियों ने किया सामूहिक गायन

#गिरिडीह #राष्ट्रगीत_गौरव : बगोदर प्रखंड कार्यालय में अधिकारियों और कर्मियों ने एक स्वर में गाया ‘बन्दे मातरम्’
  • बगोदर प्रखंड सभागार, गिरिडीह में राष्ट्रगीत ‘बन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गायन का आयोजन किया गया।
  • कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी निशा कुमारी ने नेतृत्व करते हुए राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
  • पंचायत राज पदाधिकारी, पशुपालन पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी सेविका एवं अन्य कर्मी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
  • पूरे सभागार में ‘बन्दे मातरम्’ की गूंज से देशभक्ति और एकता का संदेश फैला।
  • आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक एकता के भाव को जन-जन तक पहुंचाना था।

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड सभागार में शुक्रवार को राष्ट्रगीत ‘बन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक भव्य सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रखंड के अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर राष्ट्रगीत के स्वरों में डूब गए। कार्यक्रम का उद्देश्य देशभक्ति की भावना को और अधिक प्रबल करना और स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक योगदान को याद करना था।

प्रखंड सभागार में राष्ट्रभावना का उल्लास

कार्यक्रम का नेतृत्व प्रखंड विकास पदाधिकारी निशा कुमारी ने किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘बन्दे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में पूरा सभागार देशभक्ति के रंग में रंग गया और एकता के स्वर से गूंज उठा।

निशा कुमारी ने कहा: “बन्दे मातरम् हमारे राष्ट्र की आत्मा है, इसका सामूहिक गायन हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है।”

अधिकारियों और कर्मियों की सक्रिय भागीदारी

इस अवसर पर पंचायत राज पदाधिकारी, पशुपालन पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी सेविका तथा अन्य सभी प्रखंड कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में ‘बन्दे मातरम्’ का गायन किया, जिससे माहौल ऊर्जावान और प्रेरणादायी बन गया। आयोजन के दौरान कर्मचारियों में उत्साह और गर्व का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

राष्ट्रगीत के गौरवशाली 150 वर्ष

कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘बन्दे मातरम्’ की भूमिका को याद किया। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है और आज भी यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। बगोदर में आयोजित यह आयोजन इसी गौरव की पुनर्स्मृति के रूप में देखा गया।

न्यूज़ देखो: एकता और राष्ट्रप्रेम का जीवंत प्रतीक बना ‘बन्दे मातरम्’

बगोदर प्रखंड सभागार में हुआ यह आयोजन प्रशासनिक परिवार की एकता और देशभक्ति की झलक प्रस्तुत करता है। राष्ट्रगीत के माध्यम से अधिकारियों और कर्मियों ने यह संदेश दिया कि सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रशासनिक तंत्र की नींव है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एक स्वर, एक भावना, एक भारत

‘बन्दे मातरम्’ का गायन सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हर भारतीय के भीतर छिपे देशप्रेम का जीवंत प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नए भारत के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
आइए, हम सब भी राष्ट्रभक्ति के इस भाव को आगे बढ़ाएं। अपनी राय साझा करें, खबर को शेयर करें और ‘बन्दे मातरम्’ की यह गूंज हर दिल तक पहुंचाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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