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सांसद कालीचरण सिंह से मिले बैंक मित्र, समस्याओं के समाधान का मिला आश्वासन

#चतरा #बैंकमित्रमांग : ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं से जुड़े बैंक मित्रों ने मानदेय और सुरक्षा को लेकर सौंपा ज्ञापन।

चतरा में बैंक मित्रों की लंबित समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई, जब बैंक मित्र फेडरेशन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सांसद कालीचरण सिंह से मुलाकात की। बैंक मित्रों ने वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में दी जा रही सेवाओं के बावजूद उपेक्षा का मुद्दा उठाया। इस दौरान मानदेय, बीमा सुरक्षा और कार्यदबाव से जुड़ी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। सांसद ने समस्याओं के समाधान के लिए उचित पहल का भरोसा दिलाया।

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  • 27 जनवरी को सांसद कालीचरण सिंह से चतरा आवास पर हुई मुलाकात।
  • बैंक मित्र फेडरेशन झारखंड के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन।
  • सम्मानजनक मानदेय और बीमा सुरक्षा की प्रमुख मांग।
  • कॉर्पोरेट दबाव से मुक्ति और पुराना कमीशन लागू करने की मांग।
  • यमुना प्रसाद, मनोज सिंह, रामेश्वर विश्वकर्मा सहित सैकड़ों बैंक मित्र शामिल।

ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बैंक मित्रों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 27 जनवरी को बैंक मित्र फेडरेशन झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार बरनवाल के नेतृत्व में बैंक मित्रों का एक प्रतिनिधिमंडल चतरा पहुंचा और सांसद कालीचरण सिंह से उनके आवास पर मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

बैंक मित्रों ने सांसद के समक्ष स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे वर्षों से ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आम जनता को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलता है और न ही किसी प्रकार की सामाजिक या बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है। उनका आरोप था कि बैंक और सरकार दोनों ही स्तरों पर बैंक मित्रों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

ग्रामीण बैंकिंग की रीढ़ हैं बैंक मित्र

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बैंक शाखाएं नहीं पहुंच पातीं, वहां बैंक मित्र ही आम लोगों के लिए बैंकिंग सेवाओं का एकमात्र सहारा हैं। खाता खोलने से लेकर नकद लेनदेन, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने तक, बैंक मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसके बावजूद, बैंक मित्रों को न तो स्थायित्व प्राप्त है और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा। बैंक मित्रों का कहना था कि वे पूरी निष्ठा से काम करते हैं, फिर भी उन्हें कॉर्पोरेट एजेंसियों और बैंकों की ओर से अनावश्यक दबाव झेलना पड़ता है।

ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें

बैंक मित्र फेडरेशन की ओर से सांसद को सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • सम्मानजनक मासिक मानदेय सुनिश्चित किया जाए।
  • बीमा सुरक्षा योजना लागू की जाए, ताकि कार्य के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में परिवार सुरक्षित रह सके।
  • बैंक मित्रों को कॉर्पोरेट कंपनियों के नियंत्रण से मुक्त किया जाए।
  • पहले से निर्धारित पुराना कमीशन सिस्टम पुनः लागू किया जाए।
  • बैंकों द्वारा डाले जा रहे अनुचित कार्यदबाव को समाप्त किया जाए।

बैंक मित्रों ने कहा कि इन मांगों का सीधा संबंध न केवल उनके जीवनयापन से है, बल्कि ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है।

सांसद कालीचरण सिंह ने दिया आश्वासन

सांसद कालीचरण सिंह ने बैंक मित्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि यह विषय पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि बैंक मित्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली का अहम हिस्सा हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार्य नहीं है।

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सांसद कालीचरण सिंह ने कहा: “बैंक मित्र वर्षों से ग्रामीण जनता की सेवा कर रहे हैं। उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मैं इस विषय को संबंधित मंत्रालय और बैंकिंग विभाग के समक्ष मजबूती से उठाऊंगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक मित्रों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक स्तर पर पहल की जाएगी, ताकि उन्हें सम्मान और सुरक्षा दोनों मिल सके।

बड़ी संख्या में बैंक मित्र रहे मौजूद

इस मुलाकात के दौरान यमुना प्रसाद, मनोज सिंह, रामेश्वर विश्वकर्मा सहित सैकड़ों बैंक मित्र उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी समस्याओं को उठाया और समाधान की मांग की। बैंक मित्रों का कहना था कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

हालांकि, सांसद से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद बैंक मित्रों में कुछ हद तक उम्मीद की किरण दिखाई दी।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण बैंकिंग की अनदेखी उजागर

बैंक मित्रों की यह मुलाकात एक बार फिर यह दर्शाती है कि ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था का बड़ा हिस्सा असंगठित और असुरक्षित स्थिति में काम कर रहा है। सरकार और बैंकिंग संस्थानों को चाहिए कि वे बैंक मित्रों की भूमिका को केवल अस्थायी माध्यम न मानें, बल्कि उन्हें सम्मानजनक कार्यशर्तें दें। अब देखना होगा कि सांसद के आश्वासन के बाद इस दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बैंक मित्रों का सम्मान ही मजबूत ग्रामीण बैंकिंग की नींव

ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था बैंक मित्रों के भरोसे आगे बढ़ रही है।
सेवा, समर्पण और ईमानदारी के बदले सुरक्षा और सम्मान मिलना जरूरी है।
नीतिगत फैसलों से लाखों परिवारों का भविष्य जुड़ा है।
इस मुद्दे पर आपकी राय भी महत्वपूर्ण है।
कमेंट करें, खबर साझा करें और बैंक मित्रों की आवाज़ को और मजबूत बनाएं।

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Binod Kumar

लावालोंग, चतरा

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