
#बानो #कृषि_नवाचार : उन्नीकेल पहानटोली के किसान ने आधुनिक तकनीक अपनाकर 5 एकड़ में तरबूज से बनाई पहचान।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के उन्नीकेल पहानटोली निवासी किसान सनिका मड़की ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर तरबूज की खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। ड्रिप सिंचाई और उन्नत विधियों के प्रयोग से उन्होंने अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर अच्छी आमदनी प्राप्त की है, जिससे वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
- सनिका मड़की ने 5 एकड़ में तरबूज की खेती की।
- ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) से बढ़ा उत्पादन और बचा पानी।
- कृषि विशेषज्ञ ओबैदुल्लाह एहरार के मार्गदर्शन में मिली सफलता।
- तरबूज की मांग खूँटी और चाईबासा जैसे जिलों में।
- बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ और लाभदायक खेत।
बानो, सिमडेगा। बानो प्रखंड के उन्नीकेल पहानटोली निवासी किसान सनिका मड़की आज अपने क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीक के सफल प्रयोग का उदाहरण बन चुके हैं। उन्होंने तरबूज की खेती के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि आसपास के किसानों को भी नई दिशा दिखाई है।
सनिका मड़की ने लगभग 5 एकड़ भूमि में तरबूज की खेती की है। करीब तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें इसका अच्छा परिणाम मिला है। उनके खेत में उगाए गए तरबूज की मांग अब खूँटी और चाईबासा जैसे अन्य जिलों में भी हो रही है।
आधुनिक तकनीक और मार्गदर्शन का मिला लाभ
कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) के सहायक तकनीकी प्रबंधक ओबैदुल्लाह एहरार के मार्गदर्शन में सनिका मड़की ने आधुनिक तकनीकों को अपनाया। उन्होंने समय-समय पर किसानों को नई कृषि विधियों की जानकारी दी, जिसका सीधा प्रभाव खेतों में देखने को मिल रहा है।
तरबूज की रोपाई 30 दिसंबर को मुख्य खेत में की गई थी। बीज बोने से पहले उन्हें कार्बेन्डाजिम से उपचारित किया गया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार हुआ।
ड्रिप सिंचाई से मिली सफलता
सनिका मड़की को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत PDMC (Per Drop More Crop) योजना से ड्रिप सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
ड्रिप सिंचाई एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें पानी को पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है।
ड्रिप सिंचाई के प्रमुख फायदे
ड्रिप सिंचाई से लगभग 40 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। पौधों को आवश्यक मात्रा में नियमित पानी मिलने से उनकी वृद्धि अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है।
इस विधि में खाद को पानी के साथ दिया जा सकता है, जिससे खाद की बर्बादी कम होती है। साथ ही खेत में खरपतवार कम उगते हैं और श्रम की बचत होती है।
धीरे-धीरे पानी देने से मिट्टी का कटाव नहीं होता और इसकी संरचना सुरक्षित रहती है। यह तकनीक लगभग सभी प्रकार की जमीन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
सनिका मड़की की सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। अब आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रखंड कृषि अधिकारी दीपक नायक ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को नई तकनीक अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

न्यूज़ देखो: खेती में तकनीक से बदल रही तस्वीर
बानो के किसान की यह सफलता दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए तो खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई जैसी योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आधुनिक खेती अपनाएं, बेहतर भविष्य बनाएं
नई तकनीक से खेती करना समय की जरूरत है।
किसान यदि जागरूक होकर योजनाओं का लाभ लें तो उनकी आय में वृद्धि संभव है।
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