
#सिमडेगा #पुल_सुरक्षा : सोय नदी पुल में दरार आने के बाद प्रशासन सतर्क।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में सोय नदी पर स्थित पुराने पुल के पिलर में दरार आने का मामला सामने आया है। यह पुल बानो से रांची को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर लगभग 50 वर्ष पूर्व निर्मित किया गया था, जिस पर वर्तमान में भारी वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित है। दरार दिखाई देने के बाद स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। प्रखंड विकास पदाधिकारी नैमुदिन अंसारी ने मौके पर पहुंचकर पुल का निरीक्षण किया और भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण रोक लगा दी है।
- बानो से रांची को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर सोय नदी पुल स्थित है।
- लगभग 50 साल पुराना पुल के पिलर में दरार दिखी।
- पहले निर्मित नई पुल भ्रष्टाचार के कारण दरारग्रस्त होकर बंद हुई।
- पुराने पुल पर भारी वाहनों का परिचालन पहले से प्रतिबंधित था।
- बीडीओ नैमुदिन अंसारी ने स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
- प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई गई।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड क्षेत्र में स्थित सोय नदी पर बना पुराना पुल एक बार फिर चर्चा में है। यह पुल बानो-कुरकुरा-बक्सपुर होते हुए रांची को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन का प्रमुख साधन है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस पुल का निर्माण लगभग 50 वर्ष पूर्व किया गया था, जो लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी साबित होता रहा है।
नई पुल के बंद होने के बाद बढ़ा दबाव
कुछ वर्ष पूर्व सड़क निर्माण के दौरान सोय नदी पर एक नई पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन वह पुल गुणवत्ता में कमी और अनियमितताओं के कारण कई जगहों पर दरारग्रस्त हो गई, जिसके बाद प्रशासन द्वारा उस पुल से आवागमन बंद कर दिया गया था। इसके चलते बानो से रांची जाने वाले वाहनों का दबाव दोबारा पुराने पुल पर आ गया।
नई पुल के बंद होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पुराने पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर पहले से ही रोक लगा रखी थी। केवल छोटे वाहनों और आम यात्रियों को ही इस पुल से गुजरने की अनुमति थी।
भारी वाहनों की अनदेखी बनी चिंता का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद इस पुराने पुल से भारी वाहनों का आना-जाना लगातार जारी रहा। कई वाहन चालकों द्वारा प्रतिबंध को नजरअंदाज किया गया, जिससे पुल की संरचना पर अतिरिक्त भार पड़ता रहा। यही कारण है कि अब पुराने पुल के पिलर में भी दरार दिखाई देने लगी है।
बुधवार सुबह जब ग्रामीणों और राहगीरों ने पुल के नीचे स्थित पिलर में स्पष्ट दरार देखी, तो इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते मरम्मत और ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासनिक निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी नैमुदिन अंसारी तुरंत सोय नदी पुल पर पहुंचे। उन्होंने पुल का बारीकी से निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान बीडीओ ने कहा कि पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सुरक्षा सर्वोपरि है।
प्रखंड विकास पदाधिकारी नैमुदिन अंसारी ने कहा: “पुराने पुल के पिलर में दरार दिखना गंभीर विषय है। इसलिए तत्काल प्रभाव से इस पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। मामले की पूरी जानकारी जिले के उच्च अधिकारियों को दे दी जाएगी, ताकि आगे आवश्यक तकनीकी जांच और मरम्मत का कार्य कराया जा सके।”
उन्होंने संबंधित विभाग के कर्मियों को निर्देश दिया कि पुल के दोनों ओर सूचना पट्ट लगाए जाएं और किसी भी परिस्थिति में भारी वाहनों को गुजरने न दिया जाए।
ग्रामीणों में भय और असंतोष
पुल में दरार आने के बाद बानो प्रखंड के विभिन्न गांवों के लोगों में डर का माहौल है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और आम नागरिक इसी मार्ग से रांची की ओर यात्रा करते हैं। ऐसे में पुल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा पुल की गहन जांच कराई जाए और वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पुल मरम्मत की आवश्यकता
सड़क और भवन निर्माण क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि इतने पुराने पुलों की समय-समय पर तकनीकी समीक्षा बेहद जरूरी होती है। पिलर और बीम में आई दरार यह संकेत देती है कि पुल की संरचना कमजोर हो रही है। उचित देखरेख, मरम्मत और यातायात नियंत्रण से ही इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नई और मजबूत पुल का निर्माण अथवा पुराने पुल की वैज्ञानिक मरम्मत जरूरी मानी जा रही है।

न्यूज़ देखो: ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सोय नदी के पुराने पुल में आई दरार प्रशासनिक अनदेखी और भारी वाहनों के अवैध परिचालन का परिणाम दिखाई देती है। यह घटना बताती है कि सार्वजनिक संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन कितना जरूरी है। स्थानीय अधिकारियों की सतर्कता सराहनीय है, लेकिन जिले स्तर पर तकनीकी जांच और ठोस पहल की आवश्यकता अब भी बनी हुई है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होगी या नहीं, यह देखना अहम रहेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हुनर के साथ जिम्मेदारी निभाएं
कड़ाके की ठंड के बीच यह खबर हमें सजग नागरिक बनने की सीख देती है।
सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के नियमों का पालन हम सभी को करना चाहिए।
भारी वाहनों के अवैध परिचालन की सूचना प्रशासन को तुरंत दें।
ऐतिहासिक और पुराने पुलों के संरक्षण के लिए सामूहिक आवाज जरूरी है।
प्रशासनिक बैठकों और योजनाओं में स्थानीय सहभागिता बढ़ानी होगी।
सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना हमारी साझा प्राथमिकता बने।
पुल में दरार से जुड़ी इस घटना पर अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें, ताकि क्षेत्र में जागरूकता फैले और प्रशासन को स्थायी समाधान के लिए प्रेरणा मिल सके।






