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बरसलोया में श्री रामनवमी महोत्सव को लेकर जोरदार तैयारी, 31 मार्च से भव्य कार्यक्रमों की होगी शुरुआत

#कोलेबिराबरसलोया #रामनवमीमहोत्सव : गांव में धार्मिक उत्साह चरम पर — कलश यात्रा और अखंड कीर्तन से सजेगा भक्ति पर्व।

कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव में श्री रामनवमी महोत्सव को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं। 27 मार्च से प्रारंभ होकर 3 अप्रैल तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 31 मार्च को कलश यात्रा के साथ मुख्य आयोजन शुरू होगा, जबकि 1 से 3 अप्रैल तक अखंड हरि कीर्तन और भजन कार्यक्रम होंगे। आयोजन को लेकर गांव में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।

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  • बरसलोया गांव में रामनवमी महोत्सव की तैयारी जोरों पर।
  • 27 से 30 मार्च तक प्रतिदिन रात्रि में पूजा-पाठ का आयोजन।
  • 31 मार्च को भव्य कलश यात्रा से मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ।
  • 1 से 3 अप्रैल तक अखंड हरि कीर्तन और भजन संकीर्तन का आयोजन।
  • 2 अप्रैल को सांस्कृतिक कार्यक्रम, 3 अप्रैल को शोभा यात्रा व समापन।

कोलेबिरा प्रखंड के ग्राम बरसलोया में श्री रामनवमी के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पूरे गांव में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामवासी और नवयुवक संघ के सदस्य मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भंडारे जैसे कई आकर्षक कार्यक्रम होंगे।

प्रारंभिक चार दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 से 30 मार्च तक प्रत्येक रात्रि राहसगुड़ी स्थल पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की विधिवत स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाएगी। इन दिनों विशेष रूप से रात्रि में ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

हर रात पूजा के उपरांत भगवान की प्रतिमाओं को जगरनाथ मंदिर परिसर में वापस लाया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक अनुशासन और परंपरा का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

31 मार्च को कलश यात्रा से होगा मुख्य आयोजन का शुभारंभ

महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम 31 मार्च को भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। पूरे गांव में इस दिन विशेष सजावट और धार्मिक वातावरण देखने को मिलेगा।

कलश यात्रा के माध्यम से पूरे क्षेत्र में भक्ति का संदेश फैलाया जाएगा और आयोजन को एक भव्य स्वरूप दिया जाएगा।

राहसगुड़ी में गूंजेगा अखंड हरि कीर्तन

1 अप्रैल से राहसगुड़ी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही श्री हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और अखंड हरि कीर्तन का शुभारंभ होगा।

1 से 3 अप्रैल तक लगातार भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अनवरत जाप, महाआरती और रात्रि में भक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम शामिल होंगे। यह पूरा आयोजन क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का आकर्षण

महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारा, आकर्षक झांकियां और मेले का आयोजन भी किया जाएगा। इससे न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक माहौल भी देखने को मिलेगा।

2 अप्रैल की रात्रि को विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

3 अप्रैल को शोभा यात्रा और समापन

महोत्सव का समापन 3 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन संकीर्तन के बाद नगर भ्रमण यानी शोभा यात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात प्रतिमाओं का विसर्जन और विशाल प्रसाद वितरण किया जाएगा।

इस आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे पूरा बरसलोया गांव भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।

आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प

आयोजकों और ग्रामवासियों ने इस महोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया है। सभी लोग मिलकर व्यवस्था, सजावट और कार्यक्रमों को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। इससे गांव में सामूहिकता और एकता का भी सुंदर उदाहरण देखने को मिल रहा है।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक बनता महोत्सव

बरसलोया का यह रामनवमी महोत्सव यह दर्शाता है कि गांव स्तर पर भी बड़े धार्मिक आयोजनों को एकजुटता के साथ भव्य रूप दिया जा सकता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। सवाल यह है कि क्या ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का प्रयास लगातार जारी रहेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

भक्ति के साथ समाज को जोड़ने का अवसर, आइए बनें सहभागी

ऐसे धार्मिक महोत्सव हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं और समाज में एकता का संदेश देते हैं। यह केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर सकारात्मक वातावरण बनाने का भी माध्यम है।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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