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शब-ए-बारात की पवित्र रात में डूबा बरवाडीह, इबादत और मगफिरत के लिए उमड़े मुस्लिम धर्मावलंबी

#बरवाडीह #शबएबारात : रहमत और मगफिरत की इस मुकद्दस रात में नमाज, दुआ और फातिहा में जुटे अकीदतमंद।

लातेहार जिले के बरवाडीह में आज शब-ए-बारात का पवित्र पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार माह-ए-शाबान की यह रात रहमत, मगफिरत और बरकत की रात मानी जाती है। मुस्लिम धर्मावलंबी दिनभर रोजा रखकर और रातभर इबादत कर अल्लाह से अपने और अपने पूर्वजों के गुनाहों की माफी की दुआ मांग रहे हैं। मस्जिदों और कब्रिस्तानों में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

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  • शब-ए-बारात को रहमत, मगफिरत और बरकत की रात माना जाता है।
  • मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रोजा, नमाज और कुरआन की तिलावत की।
  • मस्जिदों और कब्रिस्तानों में देर रात तक इबादत का सिलसिला।
  • पूर्वजों के लिए फातिहा और मगफिरत की विशेष दुआ।
  • क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बना रहा।

मुस्लिम समुदाय का पवित्र पर्व शब-ए-बारात आज बरवाडीह सहित पूरे क्षेत्र में पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है। इस रात को इस्लाम में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कबूल करते हैं और उनके गुनाहों को माफ करते हैं। इसी विश्वास के साथ मुस्लिम धर्मावलंबी दिनभर रोजा रखकर और रातभर इबादत में लीन रहे।

नमाज, कुरआन की तिलावत और नफ्ल इबादत

शब-ए-बारात की रात मस्जिदों में विशेष नमाज, नफ्ल इबादत और कुरआन की तिलावत का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। लोग अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाकर अपने गुनाहों की माफी और बेहतर भविष्य की दुआ मांगते नजर आए। कई अकीदतमंदों ने पूरी रात जागकर इबादत की, जिसे इस रात की सबसे बड़ी खासियत माना जाता है।

कब्रिस्तानों में जाकर पुरखों को किया याद

इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तानों में पहुंचे और अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ी। माना जाता है कि इस रात मृत आत्माओं के लिए की गई दुआ विशेष रूप से कबूल होती है। लोग अपने परिजनों और समाज के लिए अमन, चैन और सलामती की दुआ करते नजर आए।

मस्जिदों और धार्मिक स्थलों की विशेष तैयारी

शब-ए-बारात को लेकर पहले से ही मस्जिदों, कर्बलाओं और कब्रिस्तानों की साफ-सफाई और सजावट की गई थी। मस्जिद-ए-अजीजिया सरईडीह के इमाम अब्दुल हन्नान जौहर ने कहा:

इमाम अब्दुल हन्नान जौहर ने कहा: “शब-ए-बारात आत्मशुद्धि और अल्लाह के करीब होने की रात है। इस रात दिल से की गई इबादत इंसान के जीवन को नई दिशा देती है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि इस पवित्र रात को दिखावे से दूर रहकर सच्चे मन से इबादत करें और समाज में भाईचारे और अमन का संदेश फैलाएं।

मिठाइयों का आदान-प्रदान और भाईचारे का संदेश

शब-ए-बारात के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटी और शुभकामनाएं दीं। यह परंपरा आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है। पूरे क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द और शांति का माहौल देखने को मिला।

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क्षेत्र में बना रहा आध्यात्मिक वातावरण

बरवाडीह और आसपास के इलाकों में देर शाम से ही धार्मिक वातावरण स्पष्ट नजर आया। मस्जिदों से उठती दुआओं की आवाज और कब्रिस्तानों में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोग इस रात को कितनी अहमियत देते हैं। सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बरती गई।

न्यूज़ देखो: आस्था और सामाजिक सौहार्द की मिसाल

शब-ए-बारात का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में आत्ममंथन, आपसी भाईचारे और शांति का संदेश भी देता है। इस तरह के पर्व सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं और इंसान को बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

इबादत के साथ इंसानियत का संदेश

शब-ए-बारात हमें अपने कर्मों पर विचार करने और बेहतर इंसान बनने का अवसर देती है। इस पवित्र रात से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव फैलाएं। अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और सकारात्मक संदेश को लोगों तक पहुंचाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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