
#खलारी #रांची #बसंतनवरात्रि : विधि-विधान से पूजा शुरू, नववर्ष पर भक्तों में उत्साह।
रांची जिले के खलारी प्रखंड में चैत शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर कलश स्थापना के साथ बसंत नवरात्रि का शुभारंभ हुआ। लपरा शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिपूर्वक पूजा संपन्न हुई। इसके साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी आरंभ हुआ। क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
- खलारी प्रखंड में कलश स्थापना के साथ बसंत नवरात्रि की शुरुआत।
- लपरा शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिपूर्वक पूजा।
- पंडित जय प्रकाश पांडे व पंडित लल्लू पाठक के सानिध्य में अनुष्ठान।
- मनीष गिरि, चंदन कुमार, शोभा कुमारी बने यजमान।
- विक्रम संवत 2083 और कलियुग का 5128वां वर्ष भी प्रारंभ।
रांची जिले के खलारी प्रखंड क्षेत्र में गुरुवार को चैत शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर बसंत नवरात्रि की शुरुआत पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ हुई। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ की गई, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
लपरा शिव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना
खलारी के लपरा स्थित शिव मंदिर में विशेष आयोजन किया गया, जहां पंडित जय प्रकाश पांडे एवं पंडित लल्लू पाठक के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई।
इस अनुष्ठान में यजमान के रूप में मनीष गिरि, चंदन कुमार एवं शोभा कुमारी ने विधिपूर्वक पूजा संपन्न कराई।
पंडित जय प्रकाश पांडे ने कहा: “चैत नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। सच्चे मन से पूजा करने पर सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।”
मां शैलपुत्री की पूजा से शुरुआत
नवरात्रि के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की।
पूजा से पहले श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल की साफ-सफाई कर शुद्धिकरण किया। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोए गए और गंगाजल से भरे कलश को आम के पत्तों एवं नारियल के साथ स्थापित किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में विधि-विधान और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया।
हिंदू नववर्ष का भी हुआ शुभारंभ
चैत शुक्ल प्रतिपदा का दिन हिंदू नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत हुई, साथ ही कलियुग का 5128वां वर्ष भी प्रारंभ हुआ।
श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और सुख-समृद्धि की कामना की।
घर-घर में गूंजे भक्ति के स्वर
केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि घरों में भी भक्तों ने कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती पाठ और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा शुरू की।
श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर माता रानी की आराधना करेंगे और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्ति का माहौल बनाए रखेंगे।
नौ दिनों तक चलेंगे विशेष अनुष्ठान
नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा, पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
- 19 मार्च से प्रारंभ हुआ पर्व
- 27 मार्च को हवन एवं कन्या पूजन
- 28 मार्च को मूर्ति विसर्जन के साथ समापन
इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है।
श्रद्धालुओं की रही सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर आशीष चौरसिया, मनोज गिरि, अमित पाठक, विपुल कुमार, सुजीत कुमार सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का संगम
खलारी में बसंत नवरात्रि की शुरुआत यह दर्शाती है कि आज भी समाज में धार्मिक परंपराओं के प्रति गहरी आस्था और जुड़ाव है। ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करते हैं। जरूरी है कि इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक सही स्वरूप में पहुंचाया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी निभाएं, संस्कृति को आगे बढ़ाएं
नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक सोच का अवसर है।
इस दौरान हम अपने जीवन में अनुशासन और सदाचार को अपनाएं।
अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखें और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका महत्व बताएं।
आप भी अपने अनुभव साझा करें, इस खबर को शेयर करें और इस पावन पर्व की शुभकामनाएं सब तक पहुंचाएं।






