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लातेहार के हरकुटोली गांव में भूइहर मुंडा समुदाय की उपेक्षा, 25 वर्षों से ST दर्जे की मांग अधूरी

#लातेहार #भूइहर_मुंडा_समुदाय – जातीय पहचान और सरकारी योजनाओं से वंचित लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत

  • हरकुटोली गांव के 35 में से सिर्फ एक परिवार को मिला अबुआ आवास का लाभ
  • 25 वर्षों से अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग कर रहा भूइहर मुंडा समुदाय
  • जाति प्रमाण पत्र के अभाव में स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा और बिजली सुविधाओं से वंचित
  • बिजली के खंभे और तार तो लगे, लेकिन सप्लाई अब तक नहीं शुरू
  • आयुष्मान कार्ड बना, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी से कोई इलाज नहीं
  • सरकार से ST दर्जा, जाति प्रमाण पत्र और बुनियादी सुविधा की गुहार

आदिवासी पहचान के बावजूद संवैधानिक मान्यता से वंचित

लातेहार जिले के मनिका विधानसभा अंतर्गत हरकुटोली गांव में रहने वाला भूइहर मुंडा समुदाय, जिनकी संख्या गांव में करीब 35 परिवार और जिलेभर में लगभग तीन लाख है, आज भी अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की संवैधानिक मान्यता से वंचित है। पिछले 25 वर्षों से यह समुदाय ST दर्जे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है, लेकिन आज तक उनकी आवाज़ को शासन-प्रशासन से समर्थन नहीं मिला।

जाति प्रमाण पत्र के अभाव में टूट रही उम्मीदें

सरकारी योजनाओं की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण भूइहर मुंडा समुदाय के 34 परिवार आज भी अबुआ आवास योजना से वंचित हैं। सिर्फ एक परिवार को अब तक इसका लाभ मिल पाया है। आवास योजना ही नहीं, बल्कि राशन, छात्रवृत्ति, और अन्य सरकारी सहायता भी इन लोगों के लिए एक सपना बन चुकी है।

बिजली के खंभे और तारों के बावजूद गांव में अंधेरा

हरकुटोली गांव में करीब 15 साल पहले बिजली के खंभे लगाए गए थे और 2022 में तार भी बिछाए गए, लेकिन आज तक नियमित बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। गांव के लोग कभी-कभी बिजली की रोशनी देख पाते हैं, लेकिन अधिकतर दिन अंधेरे में ही गुज़र जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली और पानी की सुविधा भगवान भरोसे चल रही है।

तकनीकी खामियों से अटका इलाज, आयुष्मान कार्ड निष्क्रिय

हालांकि अधिकांश ग्रामीणों के आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा कार्ड बन चुके हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण ये कार्ड ऑनलाइन सक्रिय नहीं हो पाए हैं। इससे आज तक किसी भी ग्रामीण को सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। इलाज के नाम पर ग्रामीणों को या तो निजी अस्पतालों में भारी खर्च उठाना पड़ता है या फिर इलाज टालना पड़ता है।

आवाज़ उठा रहे ग्रामीण, मांगा ST दर्जा और मूलभूत सुविधाएं

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा, जाति प्रमाण पत्र, नियमित बिजली आपूर्ति, और स्वास्थ्य व आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं। उनका कहना है कि “हमारे पूर्वज भी इस ज़मीन पर रहते आए हैं, फिर भी हमें न तो आदिवासी माना जा रहा है और न ही नागरिक अधिकार दिए जा रहे हैं।”

न्यूज़ देखो : आदिवासी समाज की आवाज़ बनकर उभरी हमारी पत्रकारिता

न्यूज़ देखो आपकी हर उस आवाज़ को मंच देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे वर्षों से दबा दिया गया है। भूइहर मुंडा समुदाय की तरह हजारों आवाज़ें आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं — हम उन्हें आगे लाकर सरकार और समाज के सामने रखने का कार्य कर रहे हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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