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गढ़वा में शराब दुकानों पर बड़ा फैसला: 2025-26 में सिर्फ कम्पोजिट दुकानें, देशी-विदेशी शराब की अलग दुकानें नहीं खुलेंगी

गढ़वा #नीतिनिर्धारण : उपायुक्त की अध्यक्षता में उत्पाद समिति की बैठक, नए वित्तीय वर्ष में शराब दुकानों की संख्या व स्वरूप पर अहम निर्णय
  • उपायुक्त दिनेश कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई जिला उत्पाद परामर्शदात्री समिति की बैठक।
  • 2025-26 में गढ़वा जिले में कुल 37 कम्पोजिट शराब दुकानें संचालित करने का प्रस्ताव।
  • देशी या विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानें नहीं खुलेंगी, सिर्फ कम्पोजिट दुकानें होंगी।
  • प्रस्तावित दुकानों की स्थान-चयन प्रक्रिया में आपत्तिरहित स्थल को प्राथमिकता।
  • बैठक में पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता सहित कई अधिकारी रहे मौजूद।

बैठक में लिया गया सर्वसम्मत निर्णय – शराब दुकानों का होगा पुनर्संरचना

गढ़वा जिला में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा शराब दुकानों के संचालन को लेकर जिला उत्पाद परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त दिनेश कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिले में शराब दुकान नीति में बदलाव पर चर्चा की गई और सर्वसम्मति से नया प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक में उत्पाद अधीक्षक निर्मल कुमार ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में कुल 43 स्वीकृत खुदरा शराब दुकानें हैं, जिनमें देशी शराब की 7, विदेशी शराब की 7 और कम्पोजिट (देशी, विदेशी व बीयर सहित) शराब की 29 दुकानें संचालित हैं।

अब सिर्फ कम्पोजिट दुकानें संचालित होंगी

बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले वित्तीय वर्ष में देशी या विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानें नहीं खोली जाएंगी। इसके स्थान पर सिर्फ 37 कम्पोजिट शराब दुकानें संचालित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

यह दुकानें नगर परिषद गढ़वा, नगर पंचायत मंझिआंव और श्री बंशीधर नगर सहित पूरे जिले में उन स्थलों पर संचालित होंगी जो पूर्व से आपत्तिरहित रूप में स्वीकृत हैं, या फिर नये आपत्तिरहित स्थलों पर खोली जाएंगी।

उपायुक्त दिनेश कुमार यादव ने कहा:
“शराब दुकानों के संचालन में पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन आवश्यक है। हमारा प्रयास है कि कोई भी दुकान विवादित या आपत्तिजनक स्थल पर न खुले। जनता की राय और शांति व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है।”

सामाजिक संतुलन और राजस्व संतुलन के बीच संतुलन की कोशिश

बैठक में शराब दुकानों की संख्या घटाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे न सिर्फ व्यवस्थित ढंग से राजस्व संग्रह हो सकेगा बल्कि स्थानीय विवादों और आपत्तियों को भी कम किया जा सकेगा। यह बदलाव राज्य की शराब नीति के अनुरूप है, जहां शराब की उपलब्धता तो नियंत्रित हो, लेकिन अवैध व्यापार पर सख्ती बनी रहे।

न्यूज़ देखो: शराब नीति में बदलाव – जनहित और संतुलन का संकेत

गढ़वा जिला प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय एक संतुलित सोच की ओर इशारा करता है। शराब दुकानों को लेकर अक्सर स्थानीय स्तर पर विरोध या असंतोष देखा जाता है, लेकिन इस बार पूर्व से स्वीकृत और आपत्तिरहित स्थलों पर दुकानों को सीमित रखने का फैसला स्वागत योग्य है।

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