
#BiharPolitics | महागठबंधन के CM फेस को लेकर कांग्रेस की नई सियासी चाल :
- कांग्रेस ने तेजस्वी यादव की जगह दलित नेता राजेश राम को CM फेस बनाने की मांग की।
- कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष यशवंत चमन ने उठाई मांग।
- कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर मतभेद गहराने लगे हैं।
- VIP प्रमुख मुकेश सहनी भी डिप्टी CM पद की दावा ठोक रहे हैं।
- महागठबंधन में दरार के संकेत तेज होते जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव पर नहीं बनी सहमति
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, महागठबंधन के अंदर विरोधाभास तेज़ होता जा रहा है। अब कांग्रेस की ओर से सीधी चुनौती सामने आई है। कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष यशवंत कुमार चमन ने महागठबंधन से दलित नेता व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग की है।
“बिहार की राजनीति में अगर वाकई सामाजिक न्याय और समावेशिता को प्राथमिकता दी जा रही है, तो राजेश राम जैसे दलित नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाना चाहिए।”
— यशवंत कुमार चमन, कांग्रेस नेता
कांग्रेस में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता
यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरजेडी पहले ही तेजस्वी यादव को सीएम फेस के तौर पर आगे बढ़ा रही है। लेकिन कांग्रेस के इस कदम से साफ है कि पार्टी अब सिर्फ पिछलग्गू बनकर नहीं रहना चाहती, बल्कि अपना राजनीतिक वजूद भी स्थापित करना चाह रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता चमन पूर्व में प्रदेश सचिव भी रह चुके हैं। उनके बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता, और इससे यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब नेतृत्व के मसले पर खुलकर दांव खेलने को तैयार है।
VIP और कांग्रेस दोनों ने बढ़ाई बेचैनी
वहीं दूसरी ओर, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी खुद को डिप्टी सीएम का दावेदार बताते हुए पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं। उनके बयानों और कांग्रेस की नई रणनीति से यह साफ झलक रहा है कि चुनाव आते-आते महागठबंधन में तालमेल की चुनौती बढ़ेगी।
कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारू ने भी हाल में बयान दिया था कि सीट बंटवारे पर अभी तक कोई बात नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव को लेकर सवाल पूछे जाने पर चुप्पी साध ली थी, जिससे यह साफ होता है कि अंदरखाने कुछ और ही पक रहा है।
गठबंधन की गांठें कमजोर पड़ती दिख रही
एक तरफ जहां तेजस्वी यादव अपने कार्यकाल और लोकप्रियता को लेकर सीएम फेस बनने का दावा ठोकते हैं, वहीं कांग्रेस और वीआईपी जैसे दलों की बढ़ती मांगों ने गठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजद इन मांगों को लेकर समझौता करेगा या फिर महागठबंधन में टकराव की स्थिति और तेज़ होगी।
चुनाव से पहले सियासी जमीन तैयार करती कांग्रेस
बिहार की राजनीति में यह नया मोड़ दलित नेतृत्व के मुद्दे को मुख्यधारा में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अगर कांग्रेस इस पर अडिग रही, तो चुनाव में नए समीकरण बन सकते हैं। दूसरी ओर, अगर राजद झुकती है तो तेजस्वी यादव की छवि को झटका लग सकता है।
अब जनता देखेगी अगला दांव: दलित राजनीति या यादव नेतृत्व?
बिहार की राजनीति में दलित बनाम यादव नेतृत्व की चर्चा अब ज़ोर पकड़ रही है। एक तरफ तेजस्वी का करिश्मा, तो दूसरी ओर कांग्रेस द्वारा खड़ा किया जा रहा दलित कार्ड— इस मुकाबले से ही तय होगा महागठबंधन का भविष्य।
राजनीतिक तूफान के बीच जनता की नजरें बनी रहेंगी — “नेतृत्व किसे?”
बिहार की जनता अब यह जानने को उत्सुक है कि महागठबंधन की बागडोर किसके हाथ में जाएगी — युवा चेहरा तेजस्वी यादव या दलित कार्ड के साथ उभरे राजेश राम? यह चुनाव सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि नेतृत्व की कसौटी भी बन चुका है।
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