#लावालौंग #बिजली_संकट : बिरहोर टोला में समस्या—आदिम जनजाति परिवार अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर।
चतरा के लावालौंग प्रखंड के बिरहोर टोला भुडकुडवा में छह महीने से बिजली ठप है। ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद नया नहीं लगाया गया। आदिम जनजाति के लोग अंधेरे में जीवन जी रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल बिजली बहाल करने की मांग की है।
- बिरहोर टोला में 6 महीनों से बिजली आपूर्ति ठप।
- ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद नया नहीं लगाया गया।
- आदिम जनजाति के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर।
- बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन प्रभावित।
- ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत कटिया पंचायत के बिरहोर टोला भुडकुडवा में रहने वाले आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के लोग पिछले छह महीनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं। टोला में लगा ट्रांसफॉर्मर जल जाने के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
यह स्थिति न केवल बुनियादी सुविधाओं की कमी को दर्शाती है, बल्कि आदिम जनजाति समुदाय की उपेक्षा को भी उजागर करती है।
ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद नहीं मिली राहत
ग्रामीणों के अनुसार, पहले लगा ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद विभाग ने छोटा ट्रांसफॉर्मर लगाया था, लेकिन वह भी कुछ ही दिनों में खराब हो गया।
एक ग्रामीण ने कहा: “छोटा ट्रांसफॉर्मर लगाने से समस्या का समाधान नहीं हुआ, वह भी जल्दी जल गया।”
इसके बाद से आज तक कोई नया ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाया गया।
अंधेरे में गुजर रही जिंदगी
टोला एक बड़ी बस्ती है, जहां कई परिवार निवास करते हैं, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है।
एक महिला ने कहा: “शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जिससे डर और परेशानी दोनों बढ़ जाती है।”
बच्चों की पढ़ाई पर असर
बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
एक अभिभावक ने कहा: “बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।”
गर्मी में बढ़ी परेशानी
गर्मी के मौसम में बिजली नहीं रहने से हालात और खराब हो गए हैं।
एक ग्रामीण ने कहा: “पंखा नहीं चलने से रात में सोना मुश्किल हो गया है।”
कई बार दी गई शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग को इस समस्या की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
एक युवक ने कहा: “हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन काम नहीं होता।”
प्रशासन से तत्काल मांग
बिरहोर टोला के लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से जल्द उचित क्षमता का नया ट्रांसफॉर्मर लगाने की मांग की है।
एक ग्रामीण ने कहा: “हमारी बस्ती की लगातार अनदेखी की जा रही है।”
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
आदिम जनजाति की अनदेखी पर सवाल
यह मामला आदिम जनजाति समुदाय की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
न्यूज़ देखो: विकास से दूर क्यों आदिवासी बस्तियां
लावालौंग का यह मामला दिखाता है कि आदिम जनजाति क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं अभी भी उपेक्षित हैं। क्या प्रशासन अब इस समस्या को प्राथमिकता देगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बुनियादी अधिकार सुनिश्चित करें
बिजली हर घर की जरूरत है।
आदिवासी क्षेत्रों का विकास जरूरी है।
जागरूकता और आवाज उठाना जरूरी है।
आइए, हम समान विकास की मांग करें।
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