
#सिमडेगा #पिछड़ावर्गआरक्षण : भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा की बैठक में शून्य आरक्षण पर गंभीर चर्चा, उपायुक्त से न्यायोचित हिस्सेदारी की मांग।
सिमडेगा में भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा जाति मोर्चा ने जिले में पिछड़ा वर्ग को शून्य प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष शंभू भगत की अध्यक्षता में आयोजित आवश्यक बैठक में 2011 की जातीय जनगणना के आंकड़ों के बावजूद आरक्षण नहीं मिलने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त सिमडेगा को ज्ञापन सौंपकर आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की। यह मामला स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय से सीधे जुड़ा बताया गया।
- भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा की आवश्यक बैठक भाजपा कार्यालय सिमडेगा में आयोजित।
- जिलाध्यक्ष शंभू भगत की अध्यक्षता में शून्य आरक्षण पर विशेष चर्चा।
- 2011 जातीय जनगणना के अनुसार जिले में 40.42 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग आबादी।
- नगर परिषद सिमडेगा में ट्रिपल टेस्ट के बाद भी 20 वार्डों में एक भी आरक्षण नहीं।
- बैठक के बाद उपायुक्त सिमडेगा को सौंपा गया मांगपत्र।
- कई वरिष्ठ व कार्यकर्ता रहे उपस्थित, प्रतिनिधित्व की मांग तेज।
सिमडेगा जिले में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण नहीं मिलने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा जाति मोर्चा द्वारा आयोजित बैठक में यह सवाल प्रमुखता से उठाया गया कि जब जिले में पिछड़ा वर्ग की आबादी बड़ी संख्या में है, तो उन्हें स्थानीय निकायों और प्रशासनिक ढांचे में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा। बैठक में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
भाजपा कार्यालय में हुई आवश्यक बैठक
भारतीय जनता पार्टी कार्यालय सिमडेगा में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता पिछड़ा जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष शंभू भगत ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा जिले में पिछड़ा जाति को शून्य प्रतिशत आरक्षण मिलने का विषय रहा। वक्ताओं ने कहा कि यह स्थिति न केवल निराशाजनक है, बल्कि संवैधानिक भावना के भी खिलाफ है। बैठक में मौजूद नेताओं ने एक स्वर में कहा कि लंबे समय से पिछड़ा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
2011 जातीय जनगणना के आंकड़ों का हवाला
बैठक में यह तथ्य प्रमुखता से रखा गया कि वर्ष 2011 की जातीय जनगणना रिपोर्ट के अनुसार सिमडेगा जिले में पिछड़ा वर्ग की आबादी 40.42 प्रतिशत है। इसके बावजूद जिले में उन्हें किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वक्ताओं का कहना था कि जब आबादी का बड़ा हिस्सा पिछड़ा वर्ग से आता है, तो शून्य आरक्षण की स्थिति पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
नगर परिषद सिमडेगा में प्रतिनिधित्व का सवाल
बैठक में नगर परिषद सिमडेगा का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नगर परिषद के 20 वार्डों में पिछड़ा जाति के लिए एक भी वार्ड आरक्षित नहीं किया गया है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया। नेताओं ने कहा कि इससे पिछड़ा वर्ग राजनीतिक रूप से हाशिये पर चला गया है।
उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन
बैठक के बाद शंभू भगत के नेतृत्व में भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त सिमडेगा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जिले में पिछड़ा जाति को उचित आरक्षण देने की मांग की गई। साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि नगर परिषद और अन्य स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत हो सके।
बैठक में रहे ये प्रमुख लोग उपस्थित
इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा और पिछड़ा जाति मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष संजय ठाकुर, दीपक पूरी, तुलसी साहू, रवि गुप्ता, दिलीप साहू, संटू गुप्ता, श्रीलाल साहू, घनश्याम केशरी, महावीर बड़ाईक, बजरंग प्रसाद, सुभाष साहू, दिनेश प्रसाद, दीपनारायण दास, कृष्णा ठाकुर सहित कई अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एकमत से आरक्षण की मांग को जायज बताया।
पिछड़ा वर्ग में बढ़ता असंतोष
बैठक में यह भी सामने आया कि शून्य आरक्षण की स्थिति से पिछड़ा वर्ग में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। नेताओं का कहना था कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो सामाजिक असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
न्यूज़ देखो: आबादी के अनुपात में अधिकार की मांग
सिमडेगा में पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल है। 40 प्रतिशत से अधिक आबादी के बावजूद शून्य आरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। ज्ञापन सौंपकर मांग उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अब जिम्मेदारी प्रशासन और नीति निर्धारकों पर है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मांग पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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प्रतिनिधित्व से ही मजबूत होगा लोकतंत्र
लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिले। पिछड़ा वर्ग की यह मांग सिर्फ आरक्षण की नहीं, बल्कि सम्मान और भागीदारी की भी है। यदि समय रहते संतुलित निर्णय लिया जाए, तो सामाजिक विश्वास और सहभागिता दोनों बढ़ सकते हैं।





