कोलेबिरा में भाजपा ने बीडीओ को सौंपा ज्ञापन: सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच और नगड़ी की रैयती जमीन लौटाने की मांग

कोलेबिरा में भाजपा ने बीडीओ को सौंपा ज्ञापन: सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच और नगड़ी की रैयती जमीन लौटाने की मांग

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #राजनीतिकआंदोलन : भाजपाइयों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर हेमंत सरकार पर लगाया आदिवासियों के साथ अन्याय का आरोप
  • कोलेबिरा में भाजपा कार्यकर्ताओं ने बीडीओ को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
  • मांग की गई कि स्व. सूर्या हांसदा एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराई जाए।
  • नगड़ी की रैयती जमीन किसानों को वापस लौटाने पर जोर दिया गया।
  • मंडल अध्यक्ष अशोक इंदवार ने सरकार को संवेदनहीन और भ्रष्ट करार दिया।
  • मौके पर चिंतामणि कुमार, जनेश्वर बिल्हौर, दिलेश्वर सिंह समेत कई नेता मौजूद रहे।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड में गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से स्व. सूर्या हांसदा की कथित एनकाउंटर में हुई मौत की सीबीआई जांच कराने और नगड़ी क्षेत्र की रैयती जमीन किसानों को वापस लौटाने की मांग उठाई गई। भाजपा नेताओं ने हेमंत सरकार पर आदिवासियों के साथ अन्याय करने और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का गंभीर आरोप लगाया।

सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर सवाल

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने आदिवासी समाज के हितैषी होने का दिखावा किया, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। अशोक इंदवार ने कहा कि सूर्या हांसदा, जो पूर्व में विभिन्न दलों से चुनाव लड़ चुके थे, उनके खिलाफ कोई वारंट लंबित नहीं था। 14 मामलों में वे बरी हो चुके थे और 5 मामलों में जमानत मिल चुकी थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें घर से उठाया, टॉर्चर किया और गोली मार दी।

अशोक इंदवार ने आरोप लगाया: “राज्य पुलिस ने इस एनकाउंटर को अपराधियों की कार्रवाई बताकर लीपापोती की, जबकि यह सीधी हत्या थी। मीडिया को भी जानकारी नहीं दी गई, जिससे यह और स्पष्ट हो जाता है।”

नगड़ी की जमीन पर किसानों की चिंता

भाजपा नेताओं ने नगड़ी क्षेत्र के किसानों की जमीन अधिग्रहण पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि 1956 में बिहार सरकार ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के लिए जमीन लेने का प्रयास किया, लेकिन भारी विरोध के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री ने स्वयं आकर जमीन न लेने की घोषणा की थी। इसके बाद किसानों के नाम पर नियमित मालगुजारी रसीद काटी जाती रही।
वर्ष 2012 में झारखंड सरकार ने एक बार फिर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन विरोध के बाद उसे रोक दिया गया। तब से किसानों को रसीद नहीं दी जा रही है, जिससे वे अपनी जमीन को लेकर आशंकित हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि हेमंत सरकार रिम्स-2 परियोजना के नाम पर किसानों को उजाड़ने पर आमादा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

हेमंत सरकार पर भाजपा का सीधा हमला

अशोक इंदवार ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के कारण राज्य की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों और माफियाओं ने सरकार के संरक्षण में पूरे तंत्र पर कब्जा जमा लिया है। भाजपा नेताओं का कहना था कि आदिवासियों की हत्या और उनकी जमीन छीने जाने से साबित होता है कि यह सरकार आदिवासी समाज के हित में नहीं है।

ज्ञापन सौंपने वाले कार्यकर्ता

ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व सांसद प्रतिनिधि चिंतामणि कुमार, जनेश्वर बिल्हौर, दिलेश्वर सिंह, लक्ष्मण राम, मिस्त्री दीपक बड़ाईक, लोधा सिंह, कलिंदर लोहरा के अलावा कई अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो: आदिवासियों की सुरक्षा और जमीन पर बड़ा सवाल

कोलेबिरा की इस राजनीतिक हलचल ने सरकार के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर आदिवासियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं तो दूसरी ओर किसानों की जमीन छीने जाने का विरोध तेज होता जा रहा है। यदि सरकार इन मुद्दों पर पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती है तो जन आक्रोश और बढ़ेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आदिवासियों की आवाज को अनदेखा न करें

यह घटना बताती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की जमीन और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। जनता को सजग रहकर अपनी मांगें सामने रखनी होंगी ताकि सत्ता में बैठे लोग जिम्मेदार बनें। अपनी राय नीचे कमेंट करें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें ताकि आदिवासियों की आवाज बुलंद हो सके।

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Written by

सिमडेगा

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