
#सिमडेगा #राजनीतिक_धरना : नगर निकाय चुनाव की मांग को लेकर भाजपा ने महाधरना की रूपरेखा तय की।
सिमडेगा में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 5 जनवरी को एक दिवसीय महाधरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस धरना के जरिए नगर निकाय चुनाव से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। भाजपा जिला कार्यालय में जिलाध्यक्ष लक्ष्मण बड़ाईक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह आयोजन स्थानीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गति देने की मांग के रूप में अहम माना जा रहा है।
- 05 जनवरी, समय 11 बजे सिमडेगा के अंबेडकर चौक के समीप महाधरना।
- भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मण बड़ाईक की अध्यक्षता में रणनीतिक बैठक।
- नगर परिषद क्षेत्र के सभी 20 वार्डों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी पर जोर।
- धरना के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें राज्य सरकार के समक्ष रखी जाएंगी।
- कार्यक्रम संयोजक और सह संयोजकों को दी गई जिम्मेदारियां।
- बड़ी संख्या में भाजपा समर्पित कार्यकर्ताओं की उपस्थिति का आह्वान।
सिमडेगा में नगर निकाय चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी द्वारा 5 जनवरी को अंबेडकर चौक के समीप एक दिवसीय महाधरना प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। इस धरना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भाजपा जिला कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठनात्मक तैयारी, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और धरना की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता और उद्देश्य
भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष लक्ष्मण बड़ाईक ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी महाधरना को सफल बनाना और नगर परिषद क्षेत्र के सभी 20 वार्डों से अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस कार्यक्रम को गंभीरता से लें और इसे जन-आंदोलन का रूप दें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा विषय है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी जनता के अधिकारों को प्रभावित करती है।
लक्ष्मण बड़ाईक ने कहा: “नगर निकाय चुनाव में देरी से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है, इसे लेकर पार्टी सड़क पर उतरेगी।”
महाधरना के माध्यम से रखी जाएंगी तीन प्रमुख मांगें
भाजपा के इस एक दिवसीय महाधरना प्रदर्शन के जरिए राज्य सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी जाएंगी। पहली मांग नगर निकाय चुनाव को जल्द से जल्द कराने की है। पार्टी का कहना है कि लंबे समय से चुनाव लंबित रहने के कारण स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों की कमी है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
दूसरी मांग दलीय आधार पर चुनाव कराने की है, ताकि जनता को स्पष्ट विकल्प मिल सके और राजनीतिक जवाबदेही तय हो। तीसरी मांग ईवीएम से चुनाव कराने को लेकर है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
संगठनात्मक तैयारी और जिम्मेदारियां
बैठक में कार्यक्रम की सफलता के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कार्यक्रम संयोजक दीपक पूरी और सह संयोजक संजय ठाकुर को धरना की समग्र व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को भी अलग-अलग दायित्व सौंपे गए, ताकि आयोजन व्यवस्थित और अनुशासित ढंग से संपन्न हो सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी 20 वार्डों में कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग धरना में शामिल हों।
बैठक में मौजूद प्रमुख कार्यकर्ता
इस महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा के कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें मुकेश श्रीवास्तव, चंदन प्रसून, दिलीप साहू, शंभू भगत, श्रीलाल साहू, दीपनारायण दास, अनूप केशरी, कृष्णा ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह, घनश्याम केशरी, बजरंग प्रसाद, संटू गुप्ता, महावीर बड़ाईक, सुभाष साहू, दिनेश प्रसाद सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
सभी ने एक स्वर में महाधरना को सफल बनाने का संकल्प लिया और संगठन के निर्देशों के अनुसार कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल
सिमडेगा सहित पूरे राज्य में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगा रहे हैं। भाजपा का मानना है कि समय पर चुनाव नहीं होने से शहरी विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
महाधरना के माध्यम से पार्टी न केवल अपनी मांगें रखेगी, बल्कि जनता को भी इस मुद्दे पर जागरूक करने का प्रयास करेगी।
न्यूज़ देखो: लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर बढ़ता राजनीतिक दबाव
सिमडेगा में भाजपा का यह महाधरना स्थानीय लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को केंद्र में लाता है। नगर निकाय चुनाव की मांग लंबे समय से उठ रही है और अब इसे सड़क पर लाने की तैयारी साफ नजर आती है। यह आयोजन राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का एक संगठित प्रयास है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की मजबूती में नागरिक सहभागिता जरूरी
नगर निकाय चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहरी विकास की नींव होते हैं। ऐसे आंदोलनों के जरिए जनता के मुद्दे सामने आते हैं और जवाबदेही तय होती है। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब समय पर चुनाव और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हो।




