दुमका में बृन्दा करात ने खनन से विस्थापन और प्रदूषण पर माकपा की रिपोर्ट जारी

दुमका में बृन्दा करात ने खनन से विस्थापन और प्रदूषण पर माकपा की रिपोर्ट जारी

author Saroj Verma
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#दुमका #खनन_मुद्दा : संताल परगना में खनन से विस्थापन, प्रदूषण और जमीन के सवाल पर माकपा ने उठाई चिंता।

दुमका में आयोजित एक प्रेस वार्ता में माकपा की वरिष्ठ नेता बृन्दा करात ने संताल परगना क्षेत्र में खनन से हो रहे विस्थापन, प्रदूषण, खेती को हो रहे नुकसान और बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के बावजूद यहां के लोगों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

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  • माकपा नेता बृन्दा करात ने संताल परगना में खनन से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्ट जारी की।
  • खनन के कारण विस्थापन, प्रदूषण और खेती पर असर को लेकर चिंता जताई गई।
  • संताल आदिवासी और पहाड़िया जनजाति की जमीन को लेकर सवाल उठाए गए।
  • आरोप लगाया गया कि निजी कंपनियां स्थानीय दलालों के माध्यम से जमीन अधिग्रहण कर रही हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईसीएल द्वारा खनन कार्य आउटसोर्सिंग कंपनियों को दिए जाने पर भी सवाल उठे।

दुमका में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान माकपा की वरिष्ठ नेता बृन्दा करात ने संताल परगना क्षेत्र में खनन गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासी समुदायों की जमीन और संसाधनों की विशेष सुरक्षा का प्रावधान है। इसके बावजूद यहां के लोगों को आज भी साफ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

जमीन और खनिज संसाधनों पर बढ़ती नजर

बृन्दा करात ने कहा कि संताल परगना में संताल आदिवासी और पहाड़िया जनजाति की बड़ी आबादी रहती है और यहां जमीन का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशी-विदेशी कंपनियों की नजर इस क्षेत्र की खनिज संपदा पर है और कई जगहों पर स्थानीय दलालों के माध्यम से रैयतों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है।

बृन्दा करात ने कहा: “संताल परगना काश्तकारी कानून की अनदेखी कर जमीन अधिग्रहण की कोशिशें हो रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।”

खनन क्षेत्र में बढ़ती समस्याएं

उन्होंने अमड़ापाड़ा के पचुआड़ा कोल ब्लॉक के आसपास के गांवों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कंपनी के खिलाफ खुलकर बोलने का माहौल भी नहीं बन पा रहा है।

इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईसीएल द्वारा खनन कार्य को आउटसोर्सिंग कंपनियों को दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए। उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों के अधिकार और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

न्यूज़ देखो: खनन और विकास के बीच संतुलन जरूरी

संताल परगना में खनन गतिविधियों को लेकर उठे सवाल यह दर्शाते हैं कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का संतुलन बेहद जरूरी है। क्षेत्र के लोगों की जमीन, आजीविका और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नीतियों को लागू करना आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विकास के साथ अधिकारों की सुरक्षा

खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है। समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही संतुलित और सतत विकास संभव है।

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Written by

दुमका/देवघर

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