#गढ़वा #नगरपरिषदचुनाव : अध्यक्ष पद के लिए 12 प्रत्याशी अलग अलग प्रचार तरीकों से सक्रिय।
गढ़वा नगर परिषद चुनाव को लेकर शहर का राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। अध्यक्ष पद के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में उतरकर अलग-अलग रणनीतियों के साथ मतदाताओं को साधने में जुटे हैं। वार्ड स्तर पर डोर-टू-डोर संपर्क, जनसभाएं और डिजिटल प्रचार अभियान तेज हो चुके हैं। चुनाव आयोग की आचार संहिता के बीच प्रशासन निष्पक्ष मतदान की तैयारी में लगा है।
- अध्यक्ष पद के लिए कुल 12 प्रत्याशी मैदान में।
- वार्डों में तेज डोर-टू-डोर संपर्क अभियान।
- शहरभर में लगे होर्डिंग, बैनर और पोस्टर।
- जनसभाओं में उठे मुद्दे — पेयजल, सड़क, नाली, सफाई।
- युवाओं को साधने के लिए बढ़ा सोशल मीडिया प्रचार।
गढ़वा नगर परिषद चुनाव ने शहर की राजनीति को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। अध्यक्ष पद के लिए 12 प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। हर प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। शहर के अलग-अलग वार्डों में चुनावी हलचल सुबह से देर शाम तक दिखाई दे रही है।
डोर-टू-डोर अभियान से साध रहे मतदाता
कई प्रत्याशी पारंपरिक तरीके को प्राथमिकता देते हुए घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक वे समर्थकों के साथ वार्डों में भ्रमण कर रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावशाली लोगों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि भरोसा मजबूत हो सके।
प्रत्याशी मतदाताओं से व्यक्तिगत संवाद कर अपनी प्राथमिकताएं बता रहे हैं। विकास योजनाओं, स्थानीय समस्याओं और अपने विजन को साझा किया जा रहा है। कई वार्डों में महिलाओं की अलग बैठकें और युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि हर वर्ग को साधने की कोशिश की जा रही है।
होर्डिंग और बैनर से दृश्य प्रचार
दूसरी ओर कुछ प्रत्याशी दृश्य प्रचार को अधिक प्रभावी मानते हुए बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर के माध्यम से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों और वार्डों में आकर्षक पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं।
इनमें प्रत्याशियों की तस्वीरें, चुनाव चिन्ह और प्रमुख वादों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। यह रणनीति उन मतदाताओं तक पहुंचने का माध्यम बन रही है, जिनसे प्रत्यक्ष संपर्क संभव नहीं हो पाता। शहर में चुनावी रंग साफ दिखाई देने लगा है।
जनसभा और नुक्कड़ सभा का दौर
कई प्रत्याशी जनसभाओं और नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर रहे हैं। इन सभाओं में वे अपने पिछले कार्यों का उल्लेख करते हुए भविष्य की योजनाओं को सामने रख रहे हैं। पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, नालियों की सफाई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।
प्रत्याशी पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने का वादा कर रहे हैं। कुछ सभाओं में स्थानीय समस्याओं पर खुलकर चर्चा भी हो रही है, जिससे मतदाताओं की भागीदारी बढ़ी है।
सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव
इस बार नगर परिषद चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम हो गई है। युवा प्रत्याशी फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। प्रचार वीडियो, पोस्टर, छोटे संदेश और लाइव संवाद के जरिए वे युवाओं तक पहुंच बना रहे हैं।
कुछ प्रत्याशियों ने डिजिटल कैंपेन के तहत समर्थकों को भी सक्रिय किया है, जो सोशल मीडिया पर सामग्री साझा कर माहौल बनाने में जुटे हैं। इससे युवा मतदाता वर्ग विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है।
ऐसा ही एक सोशल मीडिया कैंपेन अभी वायरल है जिसमें समर्थक अपने प्रत्याशी के समर्थन में अपने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की DP बदल रहे हैं।
समर्थकों की सक्रियता और जनता की चर्चा
समर्थकों की सक्रियता भी चुनावी माहौल को और तेज कर रही है। अलग-अलग वार्डों में समर्थक पर्चे बांट रहे हैं और अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं। शाम होते ही चाय की दुकानों और चौक-चौराहों पर चुनावी बहस छिड़ जाती है।
लोग प्रत्याशियों की छवि, वादों और पूर्व कार्यों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि मतदाता भी इस बार सोच-समझकर निर्णय लेने के मूड में हैं।
आचार संहिता और प्रशासनिक तैयारी
चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके तहत प्रचार के सभी नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। प्रशासन की ओर से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए निगरानी रखी जा रही है। नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
न्यूज़ देखो: रणनीति की जंग में जनता निर्णायक
गढ़वा नगर परिषद चुनाव में प्रचार की रफ्तार साफ संकेत दे रही है कि मुकाबला कड़ा है। 12 प्रत्याशियों के बीच रणनीति, संसाधन और जनसंपर्क की प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। अब असली परीक्षा मतदाताओं की है कि वे वादों और वास्तविक क्षमता के बीच अंतर कैसे करते हैं। क्या इस बार मुद्दों पर मतदान होगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग मतदाता ही तय करेगा शहर की दिशा
नगर परिषद का चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की दिशा तय करने का क्षण है।
वादों से आगे बढ़कर कार्यक्षमता और ईमानदारी को परखें।
अपने वार्ड की जरूरतों को ध्यान में रखकर मतदान करें।
लोकतंत्र में आपकी भागीदारी ही असली ताकत है।
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें, खबर को साझा करें और जागरूक मतदान के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें।