
#सिमडेगा #विवेकानंद_जयंती : महावीर चौक पर चित्रकला प्रतियोगिता और बाल सहभागिता के साथ प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ।
सिमडेगा शहर के महावीर चौक में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एक बाल केंद्रित और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें स्वामी विवेकानंद के विचार, राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों के साथ अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी रही और सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
- महावीर चौक, सिमडेगा में हुआ स्वामी विवेकानंद जयंती का आयोजन।
- बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।
- वैभव, राधिका, सान्वी, अतुलित, शिवानी, प्रियंशी, दिव्यांश, आयुषी, आदित्य की सहभागिता।
- तीन बच्चों ने स्वामी विवेकानंद का वेश धारण कर सबका ध्यान आकर्षित किया।
- अभिभावकों और आयोजकों द्वारा पुरस्कार वितरण एवं प्रसाद वितरण।
सिमडेगा शहर के प्रमुख स्थल महावीर चौक में सोमवार को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूरी तरह बच्चों को केंद्र में रखकर किया गया, जिसमें रचनात्मकता, अनुशासन और प्रेरणा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का वातावरण सुबह से ही उत्साहपूर्ण रहा और आसपास के लोग भी बच्चों की प्रस्तुतियों को देखने के लिए एकत्रित होते रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मक सोच
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों, राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति को रंगों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में वैभव, राधिका, सान्वी, अतुलित, शिवानी, प्रियंशी, दिव्यांश, आयुषी एवं आदित्य ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बच्चों के चित्रों में कहीं स्वामी विवेकानंद का ओजस्वी व्यक्तित्व उभरकर सामने आया, तो कहीं भारत की युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण का संदेश स्पष्ट दिखाई दिया। बच्चों की कल्पनाशीलता और विषय की गहराई ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।
स्वामी विवेकानंद के वेश में बच्चों ने बढ़ाया आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उस समय देखने को मिला जब तीन बच्चों ने स्वामी विवेकानंद का वेश धारण कर मंच पर उपस्थिति दर्ज कराई। उनके आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतीकरण ने न केवल बच्चों, बल्कि उपस्थित अभिभावकों और दर्शकों को भी प्रेरित किया। यह दृश्य बच्चों में संस्कार आधारित शिक्षा और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने की भावना को दर्शाता रहा।
अभिभावकों की सक्रिय और सराहनीय भूमिका
इस आयोजन में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी सक्रिय एवं सराहनीय उपस्थिति रही। उपस्थित अभिभावकों में अमिता, सुमन, आरती, प्रीति, बेलावती, निराला, खुशमनी, सुमा एवं नेहा शामिल रहीं। अभिभावकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और ऐसे आयोजनों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया।
अभिभावकों का मानना रहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और महान व्यक्तित्वों से जोड़ते हैं।
पुरस्कार वितरण से बढ़ा बच्चों का मनोबल
आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। आयोजकों ने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को मंच देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है।
इस दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके आदर्शों और युवाओं के लिए दिए गए प्रेरणादायक संदेशों पर भी प्रकाश डाला गया। बच्चों को सरल शब्दों में बताया गया कि स्वामी विवेकानंद किस प्रकार आत्मबल, अनुशासन और सेवा भाव पर जोर देते थे।
प्रसाद वितरण के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बच्चों, अभिभावकों और उपस्थित लोगों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान महावीर चौक का वातावरण आध्यात्मिकता, प्रेरणा और आनंद से परिपूर्ण रहा।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करेंगे और बच्चों को भी उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
न्यूज़ देखो: बाल चेतना से राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव
महावीर चौक में आयोजित यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि यदि बच्चों को सही मंच और दिशा मिले, तो वे कम उम्र में ही महान विचारों से जुड़ सकते हैं। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को बच्चों की रचनात्मकता से जोड़ना एक सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजन न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को भी मजबूत करते हैं। आने वाले समय में इस तरह के बाल केंद्रित कार्यक्रमों की निरंतरता आवश्यक है।
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बच्चों में संस्कार ही बनाते हैं उज्ज्वल भविष्य
बचपन में सीखे गए मूल्य जीवन भर साथ चलते हैं।
स्वामी विवेकानंद के विचार बच्चों को आत्मबल और लक्ष्य की दिशा दिखाते हैं।
रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व को निखारती हैं।
समाज की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को सकारात्मक मंच प्रदान करे।














